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Bhadohi News: अधिवक्ता डॉ. परमेश्वर ने हाईकोर्ट में 24 दिन की बहस
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ऊंज। 9 नवंबर, 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने रामलला विराजमान के पक्ष में फैसला सुनाया और 22 जनवरी को जन्मभूमि में रामलला विराजमान हो जाएंगे। वर्षों के संघर्ष और बलिदान के बाद यह अवसर आया है। राम जन्मभूमि के लिए डीघ ब्लॉक के इब्राहिमपुर, सेमराध निवासी वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. परमेश्वरनाथ मिश्र ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में हिंदू पक्ष की ओर से पैरवी की थी और उन्हें प्राण प्रतिष्ठा समारोह का निमंत्रण मिला है।
उन्होंने हाईकोर्ट में 24 कार्यदिवसों तक अयोध्या के मामले में बहस की थी। उन्होंने बताया कि 2010 में श्रीराम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ समक्ष 2007 निर्णयों, 125 संदर्भ ग्रंथों और 23 अधिनियमों को प्रस्तुत किया था। लगातार 24 कार्यदिवसों तक बहस की गई थी। 30 सितंबर 2010 के हाईकोर्ट के 7800 पृष्ठ के निर्णय में उनकी बहस का 100 से अधिक बार हवाला दिया गया है।
मामला जब वर्ष 2011 में सर्वोच्च न्यायालय पहुंचा तो पांच न्यायाधीशों वाली बृहत्तर बेंच के समक्ष उन्होंने लगातार पांच दिनों तक बहस की। इसका जिक्र सुप्रीम कोर्ट ने अपने 9 नवम्बर 2011 के अपने निर्णय में किया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय में लगभग 25 बार उनका नामोल्लेख है। सुप्रीम कोर्ट के लगभग 1000 पैराग्राफ के निर्णय में 250 पैराग्राफ उनकी बहस पर आधारित हैं। उनके योगदानों को देखते हुए श्रीराम जन्मभूमि न्यास ने उन्हें प्राण प्रतिष्ठा समारोह का आमंत्रण भेजा है।
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उन्होंने कहा कि निमंत्रण मिलना गौरव की बात है। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के मध्य बंगाल प्रांत के प्रभारी प्रचारक कृष्ण मण्डल ने कोलकाता स्थित उनके आवास पर जाकर निमंत्रण दिया। सुनवाई के दौरान उनके साथ उनका परिवार भी असुरक्षा का महसूस कर रहा था लेकिन प्रभु श्रीराम की कृपा से सब कुशलता से पूरा हो गया। 22 जनवरी को प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल होने के लिए वे 20 जनवरी को अयोध्या पहुंचेंगे।
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उन्होंने हाईकोर्ट में 24 कार्यदिवसों तक अयोध्या के मामले में बहस की थी। उन्होंने बताया कि 2010 में श्रीराम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ समक्ष 2007 निर्णयों, 125 संदर्भ ग्रंथों और 23 अधिनियमों को प्रस्तुत किया था। लगातार 24 कार्यदिवसों तक बहस की गई थी। 30 सितंबर 2010 के हाईकोर्ट के 7800 पृष्ठ के निर्णय में उनकी बहस का 100 से अधिक बार हवाला दिया गया है।
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मामला जब वर्ष 2011 में सर्वोच्च न्यायालय पहुंचा तो पांच न्यायाधीशों वाली बृहत्तर बेंच के समक्ष उन्होंने लगातार पांच दिनों तक बहस की। इसका जिक्र सुप्रीम कोर्ट ने अपने 9 नवम्बर 2011 के अपने निर्णय में किया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय में लगभग 25 बार उनका नामोल्लेख है। सुप्रीम कोर्ट के लगभग 1000 पैराग्राफ के निर्णय में 250 पैराग्राफ उनकी बहस पर आधारित हैं। उनके योगदानों को देखते हुए श्रीराम जन्मभूमि न्यास ने उन्हें प्राण प्रतिष्ठा समारोह का आमंत्रण भेजा है।
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उन्होंने कहा कि निमंत्रण मिलना गौरव की बात है। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के मध्य बंगाल प्रांत के प्रभारी प्रचारक कृष्ण मण्डल ने कोलकाता स्थित उनके आवास पर जाकर निमंत्रण दिया। सुनवाई के दौरान उनके साथ उनका परिवार भी असुरक्षा का महसूस कर रहा था लेकिन प्रभु श्रीराम की कृपा से सब कुशलता से पूरा हो गया। 22 जनवरी को प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल होने के लिए वे 20 जनवरी को अयोध्या पहुंचेंगे।