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इस्लाम के उसूलों की जानकारी देता है मोहर्रम
Bhadohi
Updated Fri, 16 Nov 2012 12:00 PM IST
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भदोही। इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना मोहर्रमुलहराम गुरुवार से शुरू हो गया। गुरुवार की शाम चांद के तस्दीक होते ही इमाम चौकों की साफ-सफाई और रंगाई पुताई कराकर उस पर अगरबत्ती जला दी गई। इसलामी कैलेंडर का पहला महीना होने के साथ साथ मोहर्रम कई अजमतें और फजीलतें लेकर आता है।
मोहर्रम का महीना कई मायने में इसलाम के उसूलों की जानकारी देता है। जो गलत राह पर हैं उन्हें सही रास्ता दिखाता है। दसवीं मोहर्रम को हजरत मोहम्मद सल्ल. के नवासे हजरत इमाम हुसैन की शहादत को तो लोग भुला नहीं पा रहे हैं और ताजियों के जुलूस के साथ उनकी शहादत को याद करने की परंपरा सैकड़ों साल से चली आ रही है। गुरुवार शाम चांद दिखते ही लोगों ने एक दूसरे को नए साल की बधाई दी। मर्यादपट्टी मदरसा शमसिया तेगिया के प्रिंसिपल मौलाना फैसल अशर्फी ने बताया कि मोहर्रम महीना अपने आप में इस्लाम का इतिहास समेटे हुए हैं। इस महीने की दसवीं तारीख की इसलाम में खास अहमियत है।
उन्होंने बताया दुनिया बनाई गई दसवीं मोहर्रम को, हजरत मूसा अलैसलाम को फिरऔन से बचाया गया दसवीं मोहर्रम को, हजरत ईसा को दुनिया से उठाया गया दसवीं मोहर्रम को, हजरत आदम अलैसलाम की तौबा कबूल हुई दसवीं मोहर्रम को, हजरत नू अलैसलाम की कश्ती किनारे लगी दसवीं मोहर्रम को। मौलाना ने कहा कि दसवीं मोहर्रम को कर्बला के मैदान में हुई इसलाम की सबसे बड़ी जंग में हजरत इमाम हुसैन ने अपने साथ पूरा खानदान कुर्बान कर दिया। उस जंग ने इस्लामी तौर तरीकों की दुनिया बदल दी। मौलाना ने बताया कि मोहर्रम मनाने का सबसे अफजल तरीका है कि दसवीं के दिन रोजा रखें, इबादत में वक्त बिताएं साथ ही हजरत इमाम हुसैन की कुरबानी की जानकारी दूसरों से बांटें।
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बिजली कटौती न हो
भदोही। अंजुमन ताजियादारानें भदोही के अध्यक्ष सैयद नियाज अहमद बाबू भाई ने मोहर्रम के मद्देनजर जिला प्रशासन से भरपूर बिजली आपूर्ति की मांग की है। उन्होंने कहा कि नगर के अधिकतर ताजिए लोग खुद बनाते हैं जिसकी तैयारी भी शुरू हो गई लेकिन प्रशासन को इतना सहयोग करना होगा। सैयद नियाज ने कहा कि मोहर्रम का चांद हो चुका है और रविवार 25 नवंबर को ताजिया जुलूस निकालकर कर्बला में दफनाए जाएंगे। समय रहते प्रशासन को चाहिए कि नगर की सभी गलियों की मरम्मत करा दे।
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मोहर्रम का महीना कई मायने में इसलाम के उसूलों की जानकारी देता है। जो गलत राह पर हैं उन्हें सही रास्ता दिखाता है। दसवीं मोहर्रम को हजरत मोहम्मद सल्ल. के नवासे हजरत इमाम हुसैन की शहादत को तो लोग भुला नहीं पा रहे हैं और ताजियों के जुलूस के साथ उनकी शहादत को याद करने की परंपरा सैकड़ों साल से चली आ रही है। गुरुवार शाम चांद दिखते ही लोगों ने एक दूसरे को नए साल की बधाई दी। मर्यादपट्टी मदरसा शमसिया तेगिया के प्रिंसिपल मौलाना फैसल अशर्फी ने बताया कि मोहर्रम महीना अपने आप में इस्लाम का इतिहास समेटे हुए हैं। इस महीने की दसवीं तारीख की इसलाम में खास अहमियत है।
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उन्होंने बताया दुनिया बनाई गई दसवीं मोहर्रम को, हजरत मूसा अलैसलाम को फिरऔन से बचाया गया दसवीं मोहर्रम को, हजरत ईसा को दुनिया से उठाया गया दसवीं मोहर्रम को, हजरत आदम अलैसलाम की तौबा कबूल हुई दसवीं मोहर्रम को, हजरत नू अलैसलाम की कश्ती किनारे लगी दसवीं मोहर्रम को। मौलाना ने कहा कि दसवीं मोहर्रम को कर्बला के मैदान में हुई इसलाम की सबसे बड़ी जंग में हजरत इमाम हुसैन ने अपने साथ पूरा खानदान कुर्बान कर दिया। उस जंग ने इस्लामी तौर तरीकों की दुनिया बदल दी। मौलाना ने बताया कि मोहर्रम मनाने का सबसे अफजल तरीका है कि दसवीं के दिन रोजा रखें, इबादत में वक्त बिताएं साथ ही हजरत इमाम हुसैन की कुरबानी की जानकारी दूसरों से बांटें।
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बिजली कटौती न हो
भदोही। अंजुमन ताजियादारानें भदोही के अध्यक्ष सैयद नियाज अहमद बाबू भाई ने मोहर्रम के मद्देनजर जिला प्रशासन से भरपूर बिजली आपूर्ति की मांग की है। उन्होंने कहा कि नगर के अधिकतर ताजिए लोग खुद बनाते हैं जिसकी तैयारी भी शुरू हो गई लेकिन प्रशासन को इतना सहयोग करना होगा। सैयद नियाज ने कहा कि मोहर्रम का चांद हो चुका है और रविवार 25 नवंबर को ताजिया जुलूस निकालकर कर्बला में दफनाए जाएंगे। समय रहते प्रशासन को चाहिए कि नगर की सभी गलियों की मरम्मत करा दे।