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स्वावलंबन के लिए शिल्पियों को दिया जा रहा प्रशिक्षण
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भदोही। भारतीय परंपरागत शिल्पकला को बचाने और क्राफ्ट के नए उत्पादों से शिल्पियों को रूबरू करने के लिए विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) भारत सरकार के अधीन काउंसिल फार हैंडीक्राफ्ट्स डेवलपमेंट कारपोरेशन (कोहैंड्स) से बृहस्पतिवार से भारतीय कालीन प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईसीटी) में चार दिवसीय शिल्प जागरूकता प्रदर्शनी का शुभारंभ किया गया। शुभारंभ करते हुए नगर पालिका अध्यक्ष अशोक जायसवाल ने कहा कि भारतीय कला को बचाने के लिए शिल्पकारों को नए उत्पादों से रूबरू कराते हुए हर संभव सहयोग मिलना चाहिए।
पालिकाध्यक्ष ने कहा कि भारतीय शिल्पियों में हुनर है। लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर होने से वे स्वयं का कारोबार शुरू नहीं कर पाते। भारत सरकार की ओर से उन्हें स्वावलंबी बनाने के क्रम में यह कार्यक्रम में सफल होगा। बताया कि शिल्पियों को नए उत्पादों की जानकारी देने के साथ- साथ उन्हें माल बनाकर बेचने में भी सहयोग मिलने से वे विकास की सीढ़ी चढ़ सकेंगे। नोडल अधिकारी डॉ. एसके पांडेय ने बताया कि इस तरह के प्रदर्शनी के लिए देशभर के 20 जनपदों को चयनित किया गया है, जिसमें प्रदेश के वाराणसी, फिरोजाबाद, आगरा, उन्नाव, सहारनपुर, मुरादाबाद के साथ भदोही को भी शामिल है। बताया कि शुक्रवार से इसी तरह की प्रदर्शनी मर्यादपट्टी के कालीन भवन में और नगर पालिका कार्यालय में भी शुभारंभ होगा। बताया कि भारत सरकार का उद्देश्य है कि शिल्पियों को नए-नए प्रकार के उत्पादों से रूबरू कराकर उन्हें उनका उत्पादन करने को प्रेरित किया जाए। इतना ही नहीं प्रदर्शनी में शिल्पी कार्ड के आवेदन के अलावा मुद्रा लोन आदि के बारे में भी शिल्पियों को आवश्यक जानकारी दी जा रही है। प्रदर्शनी में एंब्रायडरी कालीन, कपड़ा एंब्रायडरी (कोरैशिया वर्क), जूट और काटन के वाल हैंगिंग, मूज (सरपत) क्राफ्ट के आकर्षक वस्तुएं तैयार की जा रही है। इस मौके पर सहयोग में एमए अंसारी, जितेंद्र प्रजापति, आईए सिद्दीकी, नरेश, सैयद वसीम, सफीउल्लाह सिद्दीकी आदि ने व्यापक सहयोग किया।
पालिकाध्यक्ष ने कहा कि भारतीय शिल्पियों में हुनर है। लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर होने से वे स्वयं का कारोबार शुरू नहीं कर पाते। भारत सरकार की ओर से उन्हें स्वावलंबी बनाने के क्रम में यह कार्यक्रम में सफल होगा। बताया कि शिल्पियों को नए उत्पादों की जानकारी देने के साथ- साथ उन्हें माल बनाकर बेचने में भी सहयोग मिलने से वे विकास की सीढ़ी चढ़ सकेंगे। नोडल अधिकारी डॉ. एसके पांडेय ने बताया कि इस तरह के प्रदर्शनी के लिए देशभर के 20 जनपदों को चयनित किया गया है, जिसमें प्रदेश के वाराणसी, फिरोजाबाद, आगरा, उन्नाव, सहारनपुर, मुरादाबाद के साथ भदोही को भी शामिल है। बताया कि शुक्रवार से इसी तरह की प्रदर्शनी मर्यादपट्टी के कालीन भवन में और नगर पालिका कार्यालय में भी शुभारंभ होगा। बताया कि भारत सरकार का उद्देश्य है कि शिल्पियों को नए-नए प्रकार के उत्पादों से रूबरू कराकर उन्हें उनका उत्पादन करने को प्रेरित किया जाए। इतना ही नहीं प्रदर्शनी में शिल्पी कार्ड के आवेदन के अलावा मुद्रा लोन आदि के बारे में भी शिल्पियों को आवश्यक जानकारी दी जा रही है। प्रदर्शनी में एंब्रायडरी कालीन, कपड़ा एंब्रायडरी (कोरैशिया वर्क), जूट और काटन के वाल हैंगिंग, मूज (सरपत) क्राफ्ट के आकर्षक वस्तुएं तैयार की जा रही है। इस मौके पर सहयोग में एमए अंसारी, जितेंद्र प्रजापति, आईए सिद्दीकी, नरेश, सैयद वसीम, सफीउल्लाह सिद्दीकी आदि ने व्यापक सहयोग किया।
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