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35 हजार पेंशनरों की टूटने लगी उम्मीद
Updated Mon, 23 Oct 2017 12:51 AM IST
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ज्ञानपुर (भदोही)।
अखिलेश सरकार की महत्वाकांक्षी समाजवादी पेंशन योजना के विकल्प को लेकर योगी सरकार की ओर से अब तक कोई निर्णय नहीं लिया गया। जिससे जिले के करीब 35 हजार पेंशनरों की उम्मीद भी टूटने लगी है। शासन की ओर से ऐसे पेंशनरों को लेकर कोई दिशा-निर्देश भी जारी नहीं हुआ, इससे विभाग भी शांत मुद्रा साधे हुआ है।
आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को सहायता राशि देने के लिए पूर्व की सपा सरकार ने समाजवादी पेंशन योजना को लागू किया था। योजना में 35 साल से लेकर 60 साल तक के लोगों को 500 रुपए प्रति माह पेंशन के तौर पर दिया जा रहा था। जिले के छह ब्लॉकों में करीब 35 हजार से अधिक लाभार्थियों का चयन कर त्रैमासिक पेंशन भेजी जाती थी। योजना को और बेहतर बनाने के लिए अभिभावकों को अपने बच्चों को स्कूल भेजने के लिए 50 से 100 रुपए अतिरिक्त पुरस्कार राशि भी दी जाती है। मार्च 2017 में सूबे में भाजपा की सरकार बनने के बाद योजना को बंद कर दिया गया। शासन के निर्देश पर लाभार्थियों की जांच शुरू की गई। उस दौरान चर्चा होने लगी कि सरकार जांच कराने के बाद समाजवादी शब्द हटाकर मुख्यमंत्री पेंशन योजना के नाम पर इसे चलाएगी। सरकार बने करीब सात माह से अधिक समय गुजर गया लेकिन अब तक उक्त योजना के विकल्प रूप में कोई निर्णय नहीं लिया गया। इससे जिले में करीब 35 हजार समाजवादी पेंशन के लाभार्थियों को पेंशन मिलने की उम्मीद भी टूटने लगी है। लाभार्थी उक्त योजना में शामिल होने के चलते दूसरी पेंशन योजनाओं में आवेदन नहीं कर पा रहे हैं। शासन की ओर से कोई दिशा-निर्देश न आने से विभाग भी इस पर कोई ठोस निर्णय नहीं ले पा रहा है। विभाग भी मान चुका है कि एक वित्तीय वर्ष के सात माह तक योजना को लेकर कोई निर्देश न मिलने से वह बंद ही हो चुकी है।
जिला समाज कल्याण अधिकारी आरके सिंह ने कहा कि सरकार की ओर से पेंशन की जांच कराने के लिए कहा गया था। मई-जून में जांच कराकर रिपोर्ट भेजा जा चुका है। उसके बाद कोई निर्देश अब तक नहीं आया है।
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अखिलेश सरकार की महत्वाकांक्षी समाजवादी पेंशन योजना के विकल्प को लेकर योगी सरकार की ओर से अब तक कोई निर्णय नहीं लिया गया। जिससे जिले के करीब 35 हजार पेंशनरों की उम्मीद भी टूटने लगी है। शासन की ओर से ऐसे पेंशनरों को लेकर कोई दिशा-निर्देश भी जारी नहीं हुआ, इससे विभाग भी शांत मुद्रा साधे हुआ है।
आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को सहायता राशि देने के लिए पूर्व की सपा सरकार ने समाजवादी पेंशन योजना को लागू किया था। योजना में 35 साल से लेकर 60 साल तक के लोगों को 500 रुपए प्रति माह पेंशन के तौर पर दिया जा रहा था। जिले के छह ब्लॉकों में करीब 35 हजार से अधिक लाभार्थियों का चयन कर त्रैमासिक पेंशन भेजी जाती थी। योजना को और बेहतर बनाने के लिए अभिभावकों को अपने बच्चों को स्कूल भेजने के लिए 50 से 100 रुपए अतिरिक्त पुरस्कार राशि भी दी जाती है। मार्च 2017 में सूबे में भाजपा की सरकार बनने के बाद योजना को बंद कर दिया गया। शासन के निर्देश पर लाभार्थियों की जांच शुरू की गई। उस दौरान चर्चा होने लगी कि सरकार जांच कराने के बाद समाजवादी शब्द हटाकर मुख्यमंत्री पेंशन योजना के नाम पर इसे चलाएगी। सरकार बने करीब सात माह से अधिक समय गुजर गया लेकिन अब तक उक्त योजना के विकल्प रूप में कोई निर्णय नहीं लिया गया। इससे जिले में करीब 35 हजार समाजवादी पेंशन के लाभार्थियों को पेंशन मिलने की उम्मीद भी टूटने लगी है। लाभार्थी उक्त योजना में शामिल होने के चलते दूसरी पेंशन योजनाओं में आवेदन नहीं कर पा रहे हैं। शासन की ओर से कोई दिशा-निर्देश न आने से विभाग भी इस पर कोई ठोस निर्णय नहीं ले पा रहा है। विभाग भी मान चुका है कि एक वित्तीय वर्ष के सात माह तक योजना को लेकर कोई निर्देश न मिलने से वह बंद ही हो चुकी है।
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जिला समाज कल्याण अधिकारी आरके सिंह ने कहा कि सरकार की ओर से पेंशन की जांच कराने के लिए कहा गया था। मई-जून में जांच कराकर रिपोर्ट भेजा जा चुका है। उसके बाद कोई निर्देश अब तक नहीं आया है।
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