फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bhadohi News ›   कालीन नगरी में कुपोषण से जूझते मासूम

कालीन नगरी में कुपोषण से जूझते मासूम

Sun, 10 Mar 2019 11:16 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 10 Mar 2019 11:16 PM IST
विज्ञापन
कालीन नगरी में कुपोषण से जूझते मासूम

विज्ञापन
ज्ञानपुर। मखमली कालीनों के लिए विश्वविख्यात भदोही जिले के नौनिहाल कुपोषण की जद में हैं। कुपोषण से जंग में सरकारी योजनाएं धरातल पर फलीभूत होती नहीं दिख रही है। विभाग के त्रैमासिक रिपोर्ट के अनुसार ही जिले में 12 हजार से अधिक बच्चे कुपोषित और छह हजार से अधिक बच्चे अति कुपोषित हैं। हालांकि यह संख्या हकीकत इससे काफी अधिक है।
जिले में कुपोषण की काली छाया मासूमों की जिंदगी तबाह कर रही है। कुपोषण के चलते हजारों बच्चे बीमारों जैसी जिंदगी जीने को मजबूर हैं। मासूमों की हड्डियां टेढ़ी करती इस बीमारी से जंग में कारगर मास्टर प्लान का अभाव देश के कर्णधारों पर भारी पड़ने लगा है। बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से गर्भवती धात्रियों और नौनिहालों को स्वस्थ रखने के लिए पौष्टिक आहार, हाटकुक्ड समेत अन्य योजनाएं संचालित की जाती हैं। विभाग की लचर व्यवस्था के चलते सरकार की कल्याणकारी योजनाएं धरातल पर नाकाम साबित हो रही हैं।
विज्ञापन

आंकड़ों पर गौर करें तो हाटकुक्ड और पौष्टिक आहार योजना में करीब तीन से चार करोड़ रुपये प्रत्येक छह माह में खर्च होता है, लेकिन उसका असर कहीं दिख नहीं रहा है। विभाग की ओर से दिसंबर 2018 में बनाई गई त्रैमासिक रिपोर्ट के अनुसार जिले में 12, 522 कुपोषित और 6,127 अति कुपोषित बच्चे हैं। विभाग का दावा है कि तीन से चार माह में कुपोषित बच्चों की संख्या में 50 फीसदी तक कमी आई है। भदोही नगर, माधोसिंह, घोसिया जैसे नगरों में कुपोषण का दायरा काफी अधिक है।
विज्ञापन
विज्ञापन

जिला कार्यक्रम अधिकारी उर्मिला देवी ने कहा कि सरकार की योजनाओं को शत प्रतिशत लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। हाटकुक्ड और पौष्टिक आहार के माध्यम से कुपोषण कम किया जा रहा है। पूर्व की तुलना में कुपोषित बच्चों की संख्या में कमी आई है।

हर साल सात से आठ करोड़ का खर्च
ज्ञानपुर। बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिकाओं के मानदेय से लेकर पुष्टाहार और हाटकुक्ड पर हर साल सात से आठ करोड़ खर्च होता है, लेकिन जमीन पर बच्चों के स्वास्थ्य पर इसका खास असर नहीं दिखता। अधिकतर केंद्रों पर 70 फीसदी पोषाहार बाजारों में बिक जाता है।


लापरवाही से होता है कुपोषण
ज्ञानपुर। वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अनिल श्रीवास्तव ने कहा कि लापरवाही के चलते कुपोषण बढ़ता है। जिले में हर तीसरी गर्भवती महिला कुपोषण की शिकार है। हमारे समाज में स्त्रियां अपने स्वयं के खानपान पर ध्यान नहीं देती हैं। जबकि गर्भवती स्त्रियों को ज्यादा पौष्टिक भोजन की आवश्यकता होती है। उन्हें फलदार, पत्तीदार सब्जी, प्रोटीन, कैल्शियम युक्त भोजन करना चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed