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जॉब वर्क पर जीएसटी दर कम करने का गर्मजोशी से स्वागत
Updated Sun, 06 Aug 2017 12:56 AM IST
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भदोही। जीएसटी काउंसिल की शनिवार की हुई बैठक में कालीन जॉब वर्क पर लगने वाला जीएसटी 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत किए जाने की खबर का कालीन उद्यमियों, मजदूरों ने गर्मजोशी के साथ स्वागत किया है। इसके लिए सभी का मिलाजुला प्रयास बताया जा रहा है। अखिल भारतीय कालीन निर्माता संघ (एकमा) इसके लिए 19 जुलाई को हुए जबरदस्त आंदोलन के बाद सांसद विरेंद्र सिंह के प्रयासों से केंद्रीय वित्तमंत्री और केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री से मुलाकात को भी बताया जा रहा है, जहां एकमा और सीईपीसी प्रतिनिधिमंडल ने अपनी बातें रखीं।
कालीन निर्माण जॉब वर्क पर 18 प्रतिशत जीएसटी की घोषणा होने के बाद से कालीन उत्पादकों, निर्यातकों की नींद उड़ी हुई थी। उद्यमी कालीन बिक्री पर लगे 12 प्रतिशत जीएसटी को भूलकर केवल जाबवर्क पर लगे कल को हटवाने के एक सूत्रीय प्रयासों में लग गए थे। इस क्रम में एकमा के कालीन भवन में कई बार बैठकों के बाद 19 जुलाई को सड़क पर उतरने का एलान किया गया। उक्त हड़ताल बेहद सफल हुआ था और पूर्ण बंदी कर बुनकर, मजदूर, कालीन निर्यातक, उत्पादन, कांट्रैक्टर आदि सड़क पर उतर गए थे। मर्यादपट्टी से लेकर तहसील तक हुए पैदल मार्च में हजारो लोगों के साथ एकमा और कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) के तमाम सदस्य सड़क पर उतरे थे। 19 जुलाई के बाद भी एकमा प्रतिनिधि चुप नहीं रहे और 27 जुलाई को जाब वर्क पर 18 प्रतिशत जीएसटी से होने वाली समस्याओं का पुलिंदा लेकर नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री संतोष गंगवार से भेंट की थी। उसी दिन प्रतिनिधियों ने पीएमओ कार्यालय में भी अपना ज्ञापन सौंपा था लेकिन संयोग से उस दिन प्रधानमंत्री दिल्ली में नहीं थे।
2 अगस्त को पीएमओ आफिस से भदोही एकमा कार्यालय में फोन पर जब बताया गया कि उनके ज्ञापन को आवश्यक दिशा निर्देश के साथ वित्त मंत्री अरुण जेटली के पास भेज दिया गया है तो पुन: 3 अगस्त को एकमा प्रतिनिधि नई दिल्ली केंद्रीय वित्त मंत्री से मिलने पहुंच गए। जहां उन्हें विस्तार से कालीन निर्माण की प्रक्रिया से अवगत कराते हुए इससे होने वाली समस्याओं के बारे में बताया।
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एकमा के मानद सचिव पियूष कुमार बरनवाल (जो खुद प्रतिनिधित्व कर रहे थे) ने इस खबर के आने पर कहा कि कालीन उद्योग और इसमें लगे कालीन मजदूर सांसद विरेंद्र सिंह के आभारी हैं जिन्होंने हम सबको साथ लेकर केंद्रीय मंत्रियों से भेंट कराया और हम अपनी बातें वहां तक पहुंचा सके। सीईपीसी चेयरमैन महावीर प्रताप उर्फ राजा शर्मा, हाजी अब्दुल रब अंसारी, एकमाध्यक्ष गुलाम सर्फुद्दीन अंसारी, रवि पाटोदिया, हाजी फिरोज वजीरी, शिवसागर तिवारी, वासिफ अंसारी, उमेश कुमार गुप्ता, अतहर अंसारी, अश्फाक अंसारी, शमीम आलम लल्लन, हाजी अब्दुल सत्तार, शाहिद जमाल, भरतलाल मौर्य, इम्तीयाज अंसारी आदि ने निर्णय का स्वागत किया।
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कालीन निर्माण जॉब वर्क पर 18 प्रतिशत जीएसटी की घोषणा होने के बाद से कालीन उत्पादकों, निर्यातकों की नींद उड़ी हुई थी। उद्यमी कालीन बिक्री पर लगे 12 प्रतिशत जीएसटी को भूलकर केवल जाबवर्क पर लगे कल को हटवाने के एक सूत्रीय प्रयासों में लग गए थे। इस क्रम में एकमा के कालीन भवन में कई बार बैठकों के बाद 19 जुलाई को सड़क पर उतरने का एलान किया गया। उक्त हड़ताल बेहद सफल हुआ था और पूर्ण बंदी कर बुनकर, मजदूर, कालीन निर्यातक, उत्पादन, कांट्रैक्टर आदि सड़क पर उतर गए थे। मर्यादपट्टी से लेकर तहसील तक हुए पैदल मार्च में हजारो लोगों के साथ एकमा और कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) के तमाम सदस्य सड़क पर उतरे थे। 19 जुलाई के बाद भी एकमा प्रतिनिधि चुप नहीं रहे और 27 जुलाई को जाब वर्क पर 18 प्रतिशत जीएसटी से होने वाली समस्याओं का पुलिंदा लेकर नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री संतोष गंगवार से भेंट की थी। उसी दिन प्रतिनिधियों ने पीएमओ कार्यालय में भी अपना ज्ञापन सौंपा था लेकिन संयोग से उस दिन प्रधानमंत्री दिल्ली में नहीं थे।
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2 अगस्त को पीएमओ आफिस से भदोही एकमा कार्यालय में फोन पर जब बताया गया कि उनके ज्ञापन को आवश्यक दिशा निर्देश के साथ वित्त मंत्री अरुण जेटली के पास भेज दिया गया है तो पुन: 3 अगस्त को एकमा प्रतिनिधि नई दिल्ली केंद्रीय वित्त मंत्री से मिलने पहुंच गए। जहां उन्हें विस्तार से कालीन निर्माण की प्रक्रिया से अवगत कराते हुए इससे होने वाली समस्याओं के बारे में बताया।
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एकमा के मानद सचिव पियूष कुमार बरनवाल (जो खुद प्रतिनिधित्व कर रहे थे) ने इस खबर के आने पर कहा कि कालीन उद्योग और इसमें लगे कालीन मजदूर सांसद विरेंद्र सिंह के आभारी हैं जिन्होंने हम सबको साथ लेकर केंद्रीय मंत्रियों से भेंट कराया और हम अपनी बातें वहां तक पहुंचा सके। सीईपीसी चेयरमैन महावीर प्रताप उर्फ राजा शर्मा, हाजी अब्दुल रब अंसारी, एकमाध्यक्ष गुलाम सर्फुद्दीन अंसारी, रवि पाटोदिया, हाजी फिरोज वजीरी, शिवसागर तिवारी, वासिफ अंसारी, उमेश कुमार गुप्ता, अतहर अंसारी, अश्फाक अंसारी, शमीम आलम लल्लन, हाजी अब्दुल सत्तार, शाहिद जमाल, भरतलाल मौर्य, इम्तीयाज अंसारी आदि ने निर्णय का स्वागत किया।