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मुश्किलों से जीतकर लगाई रेस
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ज्ञानपुर। क्या यह संभव है कि ओवरवेट लिफ्टिंग के कारण पैर क्षतिग्रस्त होकर टेढ़े हो जाएं और चिकित्सक दोबारा कोई भी कठिन काम करने से मना कर दें और खिलाड़ी 15 किलोमीटर की रेस नंगे पांव दौड़ते हुए पहला स्थान हासिल कर ले...। आसान नहीं लगता न यह सब! लेकिन, इसे संभव कर दिखाया है, जिले के एक लाल ने। जी हां! भदोही जिले के 27 वर्षीय युवक शाश्वत शुक्ला ने तीन मार्च को पुणे में आयोजित ब्रिटेन सर्टिफाइड एफएसएआई लाइफ मैराथन में 58 मिनट 12 सेकंड में 15 किलोमीटर की दूरी नंगे पांव तय कर विश्व रिकॉर्ड बना दिया है। लंबे संघर्षों के बाद मिली उपलब्धि पर अब बॉलीवुड उस पर फिल्म बना रही है।
डीघ ब्लॉक क्षेत्र के सागररायपुर गांव निवासी सुरेंद्र शुक्ला के बेटे शाश्वत ने 58 मिनट 12 सेकंड में 15 किलोमीटर की दूरी नंगे पांव तय कर विश्व रिकॉर्ड बना दिया है। तीन मार्च को पुणे में आयोजित ब्रिटेन सर्टिफाइड एफएसएआई लाइफ मैराथन में शाश्वत ने चार हजार धावकों के बीच अपना मुकाम बनाया। उनकी इस उपलब्धि को वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है। खास बात यह कि यह उपलब्धि उन्होंने तब हासिल की, जब रेस की प्रैक्टिस के दौरान ज्यादा भार उठाने के कारण उनका बायां पैर के घुटने से चोटिल होकर टेढ़ा हो गया। इसके बाद लंबे इलाज के बाद डॉक्टरों ने ट्रैक पर दोबारा उतरने की गलती न करने की चेतावनी दे दी।
अमर उजाला से बातचीत में शाश्वत ने कहा कि 2007 में हुई इस घटना के बाद वह काफी निराश हो गया था। लगता था कि अब कभी ट्रैक पर नहीं उतर पाऊंगा। चोट लगने के बाद मैं जींस, जूते वगैरह भी नहीं पहन पाता था। इन हालातों से उबरने के लिए शाश्वत को सात साल लग गए और वह दोबारा 2014 में दौड़ के नंगे पैर संस्करण में आने का फैसला किया। लेकिन, दुर्भाग्य ने यहां भी साथ नहीं छोड़ा और वह बाईपोलर डिसऑर्डर के शिकार हो गए। इस चुनौती से भी लड़ते हुए दो वर्ष पूर्व शाश्वत पूरी तरह ट्रैक पर आए और पुणे में आयोजित रेस में प्रथम स्थान हासिल किया। इसके बाद बधाइयों का तांता लग गया। शाश्वत ने बताया कि हिंदी फिल्मों के जाने-माने निर्देशक कुणाल देशमुख अपनी आने वाली फिल्म में मेरी जिंदगी के कुछ हिस्से को भी आधार बनाया है। गौरतलब है कि केएनपीजी कॉलेज से 2015 में बीकॉम की पढ़ाई करने के बाद शाश्वत इन दिनों पुणे में एलएलबी के साथ वहां के जिला न्यायालय में वकालत की प्रैक्टिस कर रहे हैं।
डीघ ब्लॉक क्षेत्र के सागररायपुर गांव निवासी सुरेंद्र शुक्ला के बेटे शाश्वत ने 58 मिनट 12 सेकंड में 15 किलोमीटर की दूरी नंगे पांव तय कर विश्व रिकॉर्ड बना दिया है। तीन मार्च को पुणे में आयोजित ब्रिटेन सर्टिफाइड एफएसएआई लाइफ मैराथन में शाश्वत ने चार हजार धावकों के बीच अपना मुकाम बनाया। उनकी इस उपलब्धि को वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है। खास बात यह कि यह उपलब्धि उन्होंने तब हासिल की, जब रेस की प्रैक्टिस के दौरान ज्यादा भार उठाने के कारण उनका बायां पैर के घुटने से चोटिल होकर टेढ़ा हो गया। इसके बाद लंबे इलाज के बाद डॉक्टरों ने ट्रैक पर दोबारा उतरने की गलती न करने की चेतावनी दे दी।
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अमर उजाला से बातचीत में शाश्वत ने कहा कि 2007 में हुई इस घटना के बाद वह काफी निराश हो गया था। लगता था कि अब कभी ट्रैक पर नहीं उतर पाऊंगा। चोट लगने के बाद मैं जींस, जूते वगैरह भी नहीं पहन पाता था। इन हालातों से उबरने के लिए शाश्वत को सात साल लग गए और वह दोबारा 2014 में दौड़ के नंगे पैर संस्करण में आने का फैसला किया। लेकिन, दुर्भाग्य ने यहां भी साथ नहीं छोड़ा और वह बाईपोलर डिसऑर्डर के शिकार हो गए। इस चुनौती से भी लड़ते हुए दो वर्ष पूर्व शाश्वत पूरी तरह ट्रैक पर आए और पुणे में आयोजित रेस में प्रथम स्थान हासिल किया। इसके बाद बधाइयों का तांता लग गया। शाश्वत ने बताया कि हिंदी फिल्मों के जाने-माने निर्देशक कुणाल देशमुख अपनी आने वाली फिल्म में मेरी जिंदगी के कुछ हिस्से को भी आधार बनाया है। गौरतलब है कि केएनपीजी कॉलेज से 2015 में बीकॉम की पढ़ाई करने के बाद शाश्वत इन दिनों पुणे में एलएलबी के साथ वहां के जिला न्यायालय में वकालत की प्रैक्टिस कर रहे हैं।
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