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ज्यादातर रैन बसेरों में ठंड से बचने की सुविधाएं नहीं
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ज्ञानपुर। मुख्यमंत्री ने बढ़ रही ठंड को देखते हुए पिछले महीने जिला प्रशासन को ठंड से निपटने की उचित व्यवस्था कराने का निर्देश दिया था। ठंड से किसी की मौत न हो, इसके लिए उन्होंने अस्थायी रैन बसेरा बनाने का निर्देश जारी किया था। जिला प्रशासन समेत नगर और पंचायत प्रशासन ने अस्थायी रैन बसेरा तो बनवा दिया लेकिन ज्यादातर रैन बसेरों में ठंड से बचने की सुविधाएं नहीं हैं। वहीं, कंबल वितरण का काम एनजीओ के सहारे पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।
बेसहारा और असहाय लोगों को सर्दी से बचाने के लिए प्रदेश सरकार ने अस्थायी रैन बसेरे बनाने का निर्देश दिया था। वहीं, शासन की ओर से जिला प्रशासन को 34 सौ कंबल का वितरण कराने का निर्देश दिया गया था। जिला प्रशासन ने एनजीओ के सहारे कंबल वितरण तो करा दिया लेकिन रैन बसेरे में ठंड से बचने की कोई व्यवस्था नहीं की गई। शायद उसे इसकी सुधि नहीं है। इससे जिले में रैन बसेरे का टोटा पड़ा हुआ है। नियमानुसार रैन बसेरे में फूहा, अलाव, गद्दा और रजाई की व्यवस्था होनी चाहिए लेकिन जिले के गिने चुने जगहों पर बनाए गए अस्थायी रैन बसेरों में फूहा रखे गए हैं। इससे बेसहारा और असहायों के लिए ठंड से बचने को काफी जद्दोजहद करनी पड़ रही है। वह स्टेशन, बस अड्डे और अन्य सार्वजनिक जगहों पर अलाव के सहारे अपनी रात काटने को मजबूर हैं। वहीं ठंड से गत दिनों गोपीगंज के चूड़िहारी मोहाल निवासी नूर हसन और औराई क्षेत्र के जयरामपुर निवासी मोहन सरोज समेत कई लोगों की ठंड से मौत हो चुकी है। इसके बावजूद, जिला प्रशासन के साथ ही नगर और पंचायत प्रशासन चेतने को तैयार नहीं है। इससे ठंड बढ़ने के साथ-साथ गरीबों और बेसहारों की ठंड से बचने की चिंता बढ़ती जा रही है।
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तीनों तहसीलों में कंबल वितरण का जो लक्ष्य था, वह पूरा हो गया है। अब ज्यादा से ज्यादा जरूरतमंदों को लाभ देने का प्रयास किया जा रहा है।
- राम सिंह वर्मा, एडीएम
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बेसहारा और असहाय लोगों को सर्दी से बचाने के लिए प्रदेश सरकार ने अस्थायी रैन बसेरे बनाने का निर्देश दिया था। वहीं, शासन की ओर से जिला प्रशासन को 34 सौ कंबल का वितरण कराने का निर्देश दिया गया था। जिला प्रशासन ने एनजीओ के सहारे कंबल वितरण तो करा दिया लेकिन रैन बसेरे में ठंड से बचने की कोई व्यवस्था नहीं की गई। शायद उसे इसकी सुधि नहीं है। इससे जिले में रैन बसेरे का टोटा पड़ा हुआ है। नियमानुसार रैन बसेरे में फूहा, अलाव, गद्दा और रजाई की व्यवस्था होनी चाहिए लेकिन जिले के गिने चुने जगहों पर बनाए गए अस्थायी रैन बसेरों में फूहा रखे गए हैं। इससे बेसहारा और असहायों के लिए ठंड से बचने को काफी जद्दोजहद करनी पड़ रही है। वह स्टेशन, बस अड्डे और अन्य सार्वजनिक जगहों पर अलाव के सहारे अपनी रात काटने को मजबूर हैं। वहीं ठंड से गत दिनों गोपीगंज के चूड़िहारी मोहाल निवासी नूर हसन और औराई क्षेत्र के जयरामपुर निवासी मोहन सरोज समेत कई लोगों की ठंड से मौत हो चुकी है। इसके बावजूद, जिला प्रशासन के साथ ही नगर और पंचायत प्रशासन चेतने को तैयार नहीं है। इससे ठंड बढ़ने के साथ-साथ गरीबों और बेसहारों की ठंड से बचने की चिंता बढ़ती जा रही है।
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तीनों तहसीलों में कंबल वितरण का जो लक्ष्य था, वह पूरा हो गया है। अब ज्यादा से ज्यादा जरूरतमंदों को लाभ देने का प्रयास किया जा रहा है।
- राम सिंह वर्मा, एडीएम