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काशी टू कुंभ बाया जलमार्ग
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सीतामढ़ी। कुंभ मेले के दौरान वाराणसी से प्रयागराज तक गंगा नदी में पानी के जहाज से जल मार्ग यात्रा शुरू होने वाली है। यह सौगात केंद्र और प्रदेश सरकार ने दी है। गंगा नदी में पानी के जहाज से जल मार्ग यात्रा का श्रीगणेश कुंभ के पावन अवसर पर शुरू होगा। इसके लिए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। जहाज को रोकने के लिए स्टेशन भी निर्धारित हो चुके हैं। इनमें वाराणसी के रामनगर, मिर्जापुर में विंध्याचल, चुनार, भदोही के धार्मिक स्थली सीतामढ़ी, प्रयागराज के सिरसा और छतनाग के गंरगा घाटों पर ‘जैटी’ का निर्माण यानी पानी के जहाज से उतरने और जहाज पर चढ़ने के लिए घाट पर जाने के लिए पानी मे लकड़ी का रास्ता बन कर तैयार हो चुका है। सीतामढ़ी में जैटी का निर्माण राम घाट उड़िया बाबा आश्रम घाट के पास किया गया है।
जल मार्ग से पानी के जहाजों का आवागमन शुरू होते ही काशी, प्रयाग, विंध्याचल और सीतामढ़ी जैसे पावन तीर्थ स्थल जलमार्ग के माध्यम से एक सूत्र में बंध जाएंगे। इन सभी धार्मिक एवं पौराणिक स्थलों पर श्रद्धालुओं के साथ देशी- विदेशी सैलानियों का आवागमन जलमार्ग से बड़ी से सरलतापूर्वक होने लगेगा। इसके लिए केंद्र सरकार की आईडब्लूआई ( इनलैंड वाटर वेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया) की 200 यात्रियों की क्षमता वाली तीन बड़ी जहाजें गंगा में हिचकोले लगाते हुए श्रद्धालुओं और सैलानियों को सुगम और मनोहारी यात्रा कराएगी। साथ ही राज्य सरकार ने भी गंगा में दो दर्जन पानी की छोटी जहाजें चलाने की योजना तैयार की है। इसके लिए तैयारियां अंतिम दौर में है। गंगा में पानी के जहाज से जल यात्रा शुरू होते ही वाराणसी से प्रयागराज जल मार्ग शुरू होते ही उत्तर भारत के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ जाएगा। आईडब्ल्यूआई के टेक्नीशियन पंकज गुप्ता ने फोन पर बताया कि सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। विभिन्न घाटों पर निर्मित जैटी को चार जनवरी को राज्य सरकार को हैंडओवर कर दी जाएगी। बताया कि आईडब्ल्यूआई की तीन पानी की बड़ी जहाजें वाराणसी से प्रयागराज कुंभ के लएि चलेंगी। वाराणसी से प्रयागराज का सफर 6 घंटे में होगा।
सैलानियों को दिखेगा मनोरम दृश्य
सीतामढ़ी। गंगा की अविरल धारा में हिचकोले लेती पानी की जहाजें सैलानियों को न सिर्फ सुखद अहसास कराएगी बल्कि गंगा के घाटों का मनोहारी नयनाभिराम दृश्य और धार्मिक और पौराणिक स्थलों का दर्शन करने का सुअवसर प्राप्त होगा। गंगा में जलयान की सुगम और मनोहारी यात्रा के साथ यात्रियों को जहाज में ही लजीज जायकेदार ब्यनजन भी उपलब्ध रहेगा।जो यात्रा का सुखद अहसाह कराएगा। जल मार्ग शुरू होने से वाराणसी, चुनार, मिर्जापुर, विंध्याचल, रामपुर, सेमराध नाथ, सीतामढ़ी, पश्चिम वाहिनी , लाक्षागृह आदि धार्मिक पौराणिक एवं पर्यटन स्थलों को एक कॉरिडोर में जुड़ जाएंगे। इससे सभी स्थलों के विकास के साथ रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
जल मार्ग से पानी के जहाजों का आवागमन शुरू होते ही काशी, प्रयाग, विंध्याचल और सीतामढ़ी जैसे पावन तीर्थ स्थल जलमार्ग के माध्यम से एक सूत्र में बंध जाएंगे। इन सभी धार्मिक एवं पौराणिक स्थलों पर श्रद्धालुओं के साथ देशी- विदेशी सैलानियों का आवागमन जलमार्ग से बड़ी से सरलतापूर्वक होने लगेगा। इसके लिए केंद्र सरकार की आईडब्लूआई ( इनलैंड वाटर वेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया) की 200 यात्रियों की क्षमता वाली तीन बड़ी जहाजें गंगा में हिचकोले लगाते हुए श्रद्धालुओं और सैलानियों को सुगम और मनोहारी यात्रा कराएगी। साथ ही राज्य सरकार ने भी गंगा में दो दर्जन पानी की छोटी जहाजें चलाने की योजना तैयार की है। इसके लिए तैयारियां अंतिम दौर में है। गंगा में पानी के जहाज से जल यात्रा शुरू होते ही वाराणसी से प्रयागराज जल मार्ग शुरू होते ही उत्तर भारत के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ जाएगा। आईडब्ल्यूआई के टेक्नीशियन पंकज गुप्ता ने फोन पर बताया कि सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। विभिन्न घाटों पर निर्मित जैटी को चार जनवरी को राज्य सरकार को हैंडओवर कर दी जाएगी। बताया कि आईडब्ल्यूआई की तीन पानी की बड़ी जहाजें वाराणसी से प्रयागराज कुंभ के लएि चलेंगी। वाराणसी से प्रयागराज का सफर 6 घंटे में होगा।
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सैलानियों को दिखेगा मनोरम दृश्य
सीतामढ़ी। गंगा की अविरल धारा में हिचकोले लेती पानी की जहाजें सैलानियों को न सिर्फ सुखद अहसास कराएगी बल्कि गंगा के घाटों का मनोहारी नयनाभिराम दृश्य और धार्मिक और पौराणिक स्थलों का दर्शन करने का सुअवसर प्राप्त होगा। गंगा में जलयान की सुगम और मनोहारी यात्रा के साथ यात्रियों को जहाज में ही लजीज जायकेदार ब्यनजन भी उपलब्ध रहेगा।जो यात्रा का सुखद अहसाह कराएगा। जल मार्ग शुरू होने से वाराणसी, चुनार, मिर्जापुर, विंध्याचल, रामपुर, सेमराध नाथ, सीतामढ़ी, पश्चिम वाहिनी , लाक्षागृह आदि धार्मिक पौराणिक एवं पर्यटन स्थलों को एक कॉरिडोर में जुड़ जाएंगे। इससे सभी स्थलों के विकास के साथ रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
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