{"_id":"59b591b64f1c1bb0488b58ff","slug":"31505071542-bhadohi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"लापरवाही में ठिठकी सोलर वाटर पंप योजना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लापरवाही में ठिठकी सोलर वाटर पंप योजना
Updated Mon, 11 Sep 2017 12:55 AM IST
विज्ञापन
ज्ञानपुर। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी सोलर पंप योजना जिले में लापरवाही से ठिठक गई है। प्रशासनिक उदासीनता के चलते दो साल में मात्र 13 सोलर पंप ही लग सके जबकि 42 पंप अब भी लगने बाकी हैं। जिन स्थानों पर पंप लगने के लिए चिन्हित हुए थे, वहां अब भी लोग इंतजार कर रहे हैं।
शहर से लेकर गांव तक सभी को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए सरकारें गंभीर हैं। पूर्व में लोग कुओं से अपनी प्यास बुझाते थे लेकिन कुएं का पानी दूषित होने से लोगों को तमाम बीमारी से जूझना पड़ता था। कुछ दिनों बाद समूह पेयजल योजनाओं और उसके बाद हैंडपंप से लोग अपनी प्यास बुझाते। प्रदूषण की मात्रा बढ़ने से 100 से 120 फीट नीचे का पानी भी अब शुद्ध नहीं रह गया है। वर्ष 2015-16 में केंद्र सरकार ने लोगों को शुद्ध पानी मुहैया कराने के लिए सोलर वाटर पंप योजना को लागू किया। सोलर से चलने वाले इस पंप का पानी करीब 350 मीटर नीचे से निकलता है। जिससे वह शुद्ध रहता है। एक वाटर पंप पर करीब छह लाख 90 हजार तक का खर्च आता है। जिले में 55 सोलर वाटर पंप लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया, जिस पर करीब चार करोड़ खर्च होता। शुरूआती दिनों में विकास भवन, केएनपीजी, डीघ ब्लॉक, सांसद आदर्श गांव कौलापुर समेत करीब 13 स्थानों पर पंप लगा, लेकिन उसके बाद एक भी पंप नहीं लगा। जिन स्थानों पर पंप लगाने के लिए चिन्हित किया गया है वहां के लोगों में इसको लेकर नाराजगी है। करीब दो साल बाद भी 42 पंप नहीं लगने से लोगों को शुद्ध पानी देने का सरकार का सपना पूरा होता नहीं दिख रहा है। सूत्रों की माने तो सत्तापक्ष के एक नेता के ईशारे पर वाटर पंप चिन्हित स्थानों पर नहीं लग सके हैं।
विज्ञापन
शहर से लेकर गांव तक सभी को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए सरकारें गंभीर हैं। पूर्व में लोग कुओं से अपनी प्यास बुझाते थे लेकिन कुएं का पानी दूषित होने से लोगों को तमाम बीमारी से जूझना पड़ता था। कुछ दिनों बाद समूह पेयजल योजनाओं और उसके बाद हैंडपंप से लोग अपनी प्यास बुझाते। प्रदूषण की मात्रा बढ़ने से 100 से 120 फीट नीचे का पानी भी अब शुद्ध नहीं रह गया है। वर्ष 2015-16 में केंद्र सरकार ने लोगों को शुद्ध पानी मुहैया कराने के लिए सोलर वाटर पंप योजना को लागू किया। सोलर से चलने वाले इस पंप का पानी करीब 350 मीटर नीचे से निकलता है। जिससे वह शुद्ध रहता है। एक वाटर पंप पर करीब छह लाख 90 हजार तक का खर्च आता है। जिले में 55 सोलर वाटर पंप लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया, जिस पर करीब चार करोड़ खर्च होता। शुरूआती दिनों में विकास भवन, केएनपीजी, डीघ ब्लॉक, सांसद आदर्श गांव कौलापुर समेत करीब 13 स्थानों पर पंप लगा, लेकिन उसके बाद एक भी पंप नहीं लगा। जिन स्थानों पर पंप लगाने के लिए चिन्हित किया गया है वहां के लोगों में इसको लेकर नाराजगी है। करीब दो साल बाद भी 42 पंप नहीं लगने से लोगों को शुद्ध पानी देने का सरकार का सपना पूरा होता नहीं दिख रहा है। सूत्रों की माने तो सत्तापक्ष के एक नेता के ईशारे पर वाटर पंप चिन्हित स्थानों पर नहीं लग सके हैं।
विज्ञापन