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करोड़ो खर्च के बाद भी 250 स्कूली भवन जर्जर

Fri, 14 Jun 2019 12:12 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 14 Jun 2019 12:12 AM IST
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करोड़ो खर्च के बाद भी 250 स्कूली भवन जर्जर
ज्ञानपुर। कॉन्वेंट की तर्ज पर आगे बढ़ते परिषदीय विद्यालयों की तस्वीर तेजी से बदल रही है, लेकिन अब भी करीब 250 स्कूलों के भवन जर्जर हाल में हैं। इनमें बच्चों को शिक्षा-दीक्षा दी जाती है। जुलाई तक ऐसे भवनों की स्थिति सुधार पाना मुश्किल ही दिख रहा है। ऐसे में एक बार फिर इन्हीं भवनों में नौनिहाल पढ़ेंगे। 150 से अधिक स्कूलों में पंखे और बिजली की व्यवस्था भी नहीं है।
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बुनियादी शिक्षा की स्थिति को बेहतर बनाने के लिए सरकार तमाम योजनाएं चला रही है, लेकिन धरातल पर स्थिति इसके उलट है। मानक के अनुसार भवनों का निर्माण नहीं होने के कारण वे निर्माण के बाद जल्द ही जर्जर हो जा रहे हैं। जिले में जूनियर और प्राइमरी के कुल 1113 परिषदीय विद्यालय हैं। इनमें से 25 फीसदी विद्यालय एक दशक पुराने हैं। इनकी छतें, दीवारें, फर्श, खिड़की, दरवाजे सब कुछ जर्जर हो गए हैं। 75 फीसदी भवन सर्व शिक्षा अभियान के तहत 2005 से 2013 तक बनवाए गए। मानक के अनुरूप निर्माण नहीं होने से इन स्कूलों के भवन कम समय में ही जर्जर होने लगे हैं। वर्ष 2018 की बारिश के बाद विभाग की ओर से कराए गए सर्वे में जिले में 179 विद्यालयों के 935 भवन जर्जर पाए गए। इनमें 95 फीसदी एक कक्षीय और द्विकक्षीय भवन रहे। बारिश के दौरान इन भवनों की छतों से पानी टपकता है और दरकी हुई दीवारों से सीमेंट की छपाई झड़ती है। इसकी बानगी डीघ के पूर्व माध्यमिक विद्यालय बिछियां में देखी जा सकती है। इसी तरह औराई, चौरी का लठियां, सुरियावां, अभोली और भदोही के कई विद्यालयों में बारिश के मौसम में कक्षाएं संचालित करना मुश्किल हो जाता है। विद्यार्थी ही नहीं, शिक्षक भी इस आशंका से परेशान रहते हैं कि कहीं भवन ढह गया तो बड़ा हादसा हो सकता है। हालांकि 2019 के लोकसभा चुनाव में मतदान केंद्र बने स्कूलों में सुधार करने के साथ ही ढाई करोड़ की कंपोजिट ग्रांट समेत अन्य मदों से स्कूलों की तस्वीर बदलने की कवायद शुरू हुई। विभागीय आंकड़ों पर गौर किया जाए तो जर्जर भवनों की संख्या में काफी कमी आई है। 935 के बजाए अब 200 से लेकर 250 भवन ऐसे हैं, जिनकी मरम्मत होनी है।
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बीएसए अमित कुमार सिंह ने कहा कि एक वर्ष के अंदर व्यापक स्तर पर सरकारी स्कूलों में सुधार किया गया है। पूर्व में निष्प्रयोज्य भवनों में कक्षाओं का संचालन बंद करा दिया गया है। जर्जर भवनों में सुधार किया जा चुका है। कुछ गिने-चुने स्कूल हैं, जिनका काम प्रगति पर है।
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