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...अब मतगणना पर टिकीं निगाहें,जीत-हार की कवायद शुरु
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गोपीगंज। लोकसभा सीट पर छठवें चरण का मतदान संपन्न होते ही लोगों की निगाहें अब मतगणना पर टिक गई हैं। जीत-हार के दावों के साथ चाय-पान की दुकानों और चट्टी-चौराहों पर जुबानी जंग तेज हो है।
संसदीय सीट के पांचों विधानसभा क्षेत्रों में पड़े मत के आंकड़ों को गिनाते हुए भाजपा समर्थक जहां जीत का पक्का दावा कर रहे है। मतदान के बाद अब लोगों की निगाहें मतगणना पर टिक गई है। मतगणना के परिणाम को लेकर सोमवार को क्षेत्र में लोग अलग-अलग तरह के दावे और पूर्वानुमान करते नजर आ रहे हैं। चट्टी चौपाल हो या चाय-पान की दुकान। दर्जन भर से अधि क लोगों का जमावड़ा होते ही अपने-अपने प्रत्याशि यों की जीत पल भर में सुनिश्चित करने में कसर नहीं छोड़ रहे हैं। कहीं-कहीं तो जीत और हार को लेकर लोगों में झड़पें होना स्वाभाविक होने लगती हैं। कभी हंस कर तो कहीं मामले को टाल कर लोग बचने में अपनी भलाई समझ रहे हैं। लोकसभा की सीट पर दलबदल निर्दल प्रत्याशियों की स्थिति से मूल्यांकन शुरू होकर राष्ट्रीय राजनीति तक पहुंच जा रहा है। चर्चा में सब भागीदारी कर रहे है लेकिन जो वाकपटुता से अपनी बात रखते हुए तर्क देना शुरू कर देता है तो सब खामोश होकर हां में हां मिलाने लगते है। किस पोलिंग बूथ के आसपास किस प्रत्याशी के कार्यकर्ता के बूथ पर ज्यादा पर्चियां बन रहीं थी और कहां कम थी, कहां सन्नाटा छाया था और कहां कार्यकर्ताओं के मुख्य मंडल का रंग फीका पड़ गया था। इस तरह की तमाम बातों पर चर्चाएं जोर पकड़ रही है। कोई किसी पार्टी के प्रत्याशी की जीत की उम्मीद का इजहार कर रहा है। तो कोई दूसरे उम्मीदवार को विजय सुनिश्चित बताता है। कोई किसी प्रत्याशी को ही मुख्य मुकाबले में बाहर घोषित कर उसकी पराजय बता रहा है। भाजपा-गठबंधन के बीच टक्कर, परिणाम कम संख्या से होने का दावा कर रहा है। सबका अपना अलग-अलग नजरिया और पैमाना है। किसी का पैमाना जातीय और सांप्रदायिक आधार पर मतों का ध्रुवीकरण या बिखराव है तो किसी का पैमाना जज्बाती लहर। इन्हीं दावों तथा पूर्वानुमान को लेकर लोगों में बहस छिड़ी है। जीत-हार को लेकर शर्त भी बढ़ती जा रही है तो परिणाम की भविष्यवाणीयों से लोग पीछे नहीं हैं। बहरहाल असलियत कुछ भी हो ऊंट किस करवट बैठेगा वैसे 19 तारीख की देर शाम को ही एग्जिट पोल आना शुरू हो जाएगा लेकिन संपूर्ण जानकारी 23 मई को मतगणना के बाद स्वयं स्पष्ट कर देगा। किसके आंगन में विजय की शहनाई का मंगल वादन होगा, किसके द्वार पर अरण्यरोदन होगा, किस के आंगन में विजय का उल्लासपर्व होगा, किसके यहां मातमी माहौल होगा। यह फैसला 23 मई को मतगणना के दिन वक्त खुद अपने हाथों से लिख देगा।
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संसदीय सीट के पांचों विधानसभा क्षेत्रों में पड़े मत के आंकड़ों को गिनाते हुए भाजपा समर्थक जहां जीत का पक्का दावा कर रहे है। मतदान के बाद अब लोगों की निगाहें मतगणना पर टिक गई है। मतगणना के परिणाम को लेकर सोमवार को क्षेत्र में लोग अलग-अलग तरह के दावे और पूर्वानुमान करते नजर आ रहे हैं। चट्टी चौपाल हो या चाय-पान की दुकान। दर्जन भर से अधि क लोगों का जमावड़ा होते ही अपने-अपने प्रत्याशि यों की जीत पल भर में सुनिश्चित करने में कसर नहीं छोड़ रहे हैं। कहीं-कहीं तो जीत और हार को लेकर लोगों में झड़पें होना स्वाभाविक होने लगती हैं। कभी हंस कर तो कहीं मामले को टाल कर लोग बचने में अपनी भलाई समझ रहे हैं। लोकसभा की सीट पर दलबदल निर्दल प्रत्याशियों की स्थिति से मूल्यांकन शुरू होकर राष्ट्रीय राजनीति तक पहुंच जा रहा है। चर्चा में सब भागीदारी कर रहे है लेकिन जो वाकपटुता से अपनी बात रखते हुए तर्क देना शुरू कर देता है तो सब खामोश होकर हां में हां मिलाने लगते है। किस पोलिंग बूथ के आसपास किस प्रत्याशी के कार्यकर्ता के बूथ पर ज्यादा पर्चियां बन रहीं थी और कहां कम थी, कहां सन्नाटा छाया था और कहां कार्यकर्ताओं के मुख्य मंडल का रंग फीका पड़ गया था। इस तरह की तमाम बातों पर चर्चाएं जोर पकड़ रही है। कोई किसी पार्टी के प्रत्याशी की जीत की उम्मीद का इजहार कर रहा है। तो कोई दूसरे उम्मीदवार को विजय सुनिश्चित बताता है। कोई किसी प्रत्याशी को ही मुख्य मुकाबले में बाहर घोषित कर उसकी पराजय बता रहा है। भाजपा-गठबंधन के बीच टक्कर, परिणाम कम संख्या से होने का दावा कर रहा है। सबका अपना अलग-अलग नजरिया और पैमाना है। किसी का पैमाना जातीय और सांप्रदायिक आधार पर मतों का ध्रुवीकरण या बिखराव है तो किसी का पैमाना जज्बाती लहर। इन्हीं दावों तथा पूर्वानुमान को लेकर लोगों में बहस छिड़ी है। जीत-हार को लेकर शर्त भी बढ़ती जा रही है तो परिणाम की भविष्यवाणीयों से लोग पीछे नहीं हैं। बहरहाल असलियत कुछ भी हो ऊंट किस करवट बैठेगा वैसे 19 तारीख की देर शाम को ही एग्जिट पोल आना शुरू हो जाएगा लेकिन संपूर्ण जानकारी 23 मई को मतगणना के बाद स्वयं स्पष्ट कर देगा। किसके आंगन में विजय की शहनाई का मंगल वादन होगा, किसके द्वार पर अरण्यरोदन होगा, किस के आंगन में विजय का उल्लासपर्व होगा, किसके यहां मातमी माहौल होगा। यह फैसला 23 मई को मतगणना के दिन वक्त खुद अपने हाथों से लिख देगा।
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