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उचित मूल्य न मिलने से दुग्ध उत्पादन में आई गिरावट- प्लानिंग
Updated Mon, 11 Sep 2017 12:55 AM IST
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ज्ञानपुर। जिले में पूर्ववर्ती सपा सरकार की महत्वाकांक्षी योजना कामधेनु दम तोड़ रही है। दूध का उचित मूल्य न मिलने से कामधेनु संचालक बैंकों का कर्ज चुकाने में अपने को असहज पा रहे हैं। एक-दो कामधेनु डेयरी बंद भी हो चुकी है। पिछले वर्ष की अपेक्षा वित्तीय वर्ष में दूध के उत्पादन में गिरावट आई है। पिछले वर्ष दूध का उत्पादन प्रतिदिन 1.60 लाख लीटर प्रतिदिन था, जो इस साल घटकर 1.50 लाख लीटर प्रतिदिन पर आ गया है। जिले में 3 बड़ी कामधेनु, 8 मिनी कामधेनु और 12 माइक्रो कामधेनु डेयरी संचालित हैं। ये डेरियां अपना दूध दुग्ध उत्पादक सहकारी समिति पराग को बेचती है। पराग फूल फैट वाला दूध 34 रुपया लीटर खरीदता है। फैट कम होने से कामधेनु डेयरी का दूध 20 से 22 रुपए लीटर पड़ता है। इतना कम रेट मिलने से संचालकों को नुकासान उठाना पड़ रहा है। पैसे की कमी के चलते संचालक अपने पशुओं को ठीक से खिला नहीं पा रहे हैं। जिससे दुग्ध उत्पादन प्रभावित हो गया है। सभी संचालंकों ने बैंकों से मोटा कर्ज लिए हैं, जिसे चुकाने में उन्हें भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। चारे की महंगाई, पशुओं का इलाज, कर्ज अदायगी से कामधेनु संचालक परेशान हो गए हैं। परेशान संचालक ऋण माफी की मांग कर रहे हैं। इसी तरह अन्य पशुपालक भी दूध का उचित रेट न मिलने से परेशान हैं। पशुओं का पालन-पोषण ठीक से नहीं कर पा रहे हैं, जिससे दूध उत्पादन प्रभावित हो रहा है। गांवों में दूध 40 रुपया लीटर बिक रहा है, मगर पराग 20-22 रुपया लीटर ही दूध खरीद रही है। कामधेनु संचालक नागेंद्र बहादुर सिंह ने कहा कि पूर्व की सरकार ने कामधेनु योजना संचालित कर डेयरी संचालकों के साथ धोखा किया है। योजना तो संचालित कर दी, मगर उचित रेट में दूध बेचने की व्यवस्था नहीं की। अर्थ एवं संख्या अधिकारी आरएन यादव ने कहा कि जिले में डेढ़ लाख लीटर दूध का उत्पादन है। पूर्व के वर्षों से अब उसमें गिरावट आई है।
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