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छह फीसदी मजदूरों को 100 दिन काम की गारंटी

Thu, 02 May 2019 12:31 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 02 May 2019 12:31 AM IST
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छह फीसदी मजदूरों को 100 दिन काम की गारंटी
ज्ञानपुर। महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना भी जिले में फलीभूत नहीं हो पा रही है। 49 हजार 726 सक्रिय मजदूरों में मात्र तीन हजार को 100 दिन काम मिल सका। पूर्व के वर्षों की तरह बुधवार को भी विश्व मजदूर दिवस से अनभिज्ञ श्रमिक पसीना बहाते रहे, हालांकि श्रम विभाग का दावा है कि सरकार की 20 से अधिक योजनाओं से श्रमिकों की तस्वीर बदली जा रही है।
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इस मजदूर दिवस भी मेहनतकशों के साथ वही चुनौती दिखी। मजदूरों के पलायन को रोकने के लिए कांग्रेस सरकार की मनरेगा 2008 से जिले में प्रभावी हुई। शुरुआती दौर में तालाबों के सुंदरीकरण से लेकर अन्य कामों में तेजी से काम हुआ लेकिन समय गुजरने के साथ ही योजना भी अपने ट्रैक से भटक गई। स्थिति यह हो गई है कि जिले में छह फीसदी मजदूरों को ही 100 दिन काम नसीब हो सका। 561 ग्रामसभाओं में पंजीकृत एक लाख 19 हजार जाबकार्ड धारकों में 49 हजार 726 सक्रिय हैं। सक्रिय मजदूरों में किसी को 10 दिन, किसी को 40 दिन और किसी को 50 दिन ही काम मिल सका। 100 दिन काम पाने वाले में मात्र तीन हजार मनरेगा मजदूर शामिल रहे। वहीं दूसरी ओर श्रम विभाग के आंकड़ों पर गौर किया जाए तो यहां करीब पांच हजार श्रमिक पंजीकृत हैं। श्रम प्रवर्तन अधिकारी राम निवास ने दावा किया कि भवन एवं सन्निर्माण कर्मकार अधिनियम के तहत चलाई जा रही योजनाओं से श्रमिकों की तस्वीर बदली जा रही है। इसमें 20 से अधिक योजनाएं शामिल हैं। बेटियों को पढ़ाने, चिकित्सा समेत अन्य शामिल हैं। श्रमायुक्त मनरेगा सुनील तिवारी ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना में काम करने वाले मजदूरों को 100 दिन काम मिला। पंचायतों की ओर से काम में रुचि न दिखाने से ऐसी स्थिति हो रही है। उधर दिन विशेष से अनजान मजदूर कमरतोड़ महंगाई के बीच दो वक्त की रोटी की तलाश में बुधवार को भी कड़ी धूप में पसीना बहाते रहे। न तो उन्हें मजदूर दिवस से कुछ लेना था, न ही दिन विशेष के प्रति कोई उत्साह। जिला मुख्यालय पर निर्माणाधीन न्यायालय से लेकर अन्य परियोजनाओं पर काम कर रहे मजदूर रोज की भांति मजदूर अपने काम में मस्त रहे। विडंबना यह है कि कार्यदायी संस्थाओं अथवा भवन स्वामियों ने मजदूरों को उनके दिन विशेष के उपलक्ष्य में मुंह मीठा कराना भी मुनासिब नहीं समझा।
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जिला मुख्यालय पर एक कार्यदायी संस्था के लिए काम कर रहे मजदूरों वंशराज, भगत, रामू, पुनवासी से जब विश्व मजदूर दिवस के बारे में पूछा गया तो वे हैरान रह गए। सवाल दागते हुए पूछा, का होला मजदूर दिवस, हम का जानी भइया। मन की पीड़ा बयान करते हुए कहा कि हमनीं के तो रोज कुआं खोद के पानी पियैके बा। हमनीं के मजदूर दिवस से का लेना देना हौ।
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ज्ञानपुर। सभी के हाथों में काम देने के लिए सरकार भले ही कटिबद्ध है, लेकिन बेरोजगारी का आलम यह है कि प्रतिदिन सुबह भदोही के अजिमुल्लाह चौराहा, ज्ञानपुर के दुर्गागंज और गोपीगंज के मेन चौराहे पर मजदूर काम के इंतजार में खड़े रहते हैं। कंपनी और संस्थाएं अपने हिसाब से मजदूरों को दिहाड़ी मजदूरी के लिए लेकर जाती हैं।
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