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Basti News: पथरीली राह पर चलकर पूरी होगी साधु-संतों की 84 कोसी परिक्रमा
Thu, 11 Apr 2024 01:07 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Thu, 11 Apr 2024 01:07 AM IST
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विक्रमजोत क्षेत्र के 84 कोसी परिक्रमा मार्ग गड्ढे में तबदील।
जिले में प्रथम फेज की 36 किमी लंबाई में बनना था परिक्रमा मार्ग
दो साल से अधिग्रहण प्रक्रिया में ही उलझा है विभाग
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। 84 कोसी परिक्रमा शुरू होने में महज 13 दिन और हैं। मगर, जिले में प्रथम फेज का परिक्रमा मार्ग बनकर तैयार होने को कौन कहें अब तक जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है। हर वर्ष की भांति इस बार भी साधु-संतों का रेला पथरीली राह पर चलने के लिए विवश होना पड़ेगा। नई सड़क बनने के चक्कर में परिक्रमा मार्ग की मरम्मत भी नहीं कराई जा सकी है।
प्रभु श्रीराम की जन्मस्थली और सप्तपुरियों में एक अयोध्या की 84 कोसी परिक्रमा की प्राचीन परंपरा है। जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति पाने के उद्देश्य से श्रद्धालु इस परिक्रमा को अटूट श्रद्धा के साथ नंगे पांव पूरी करते हैं। परिक्रमा का शुभारंभ चक्रवर्ती सम्राट राजा दशरथ के पुत्र कामेष्टि यज्ञ स्थल मख धाम (मखौड़ा) से चैत्र मास की पूर्णिमा तिथि से होता है। इस बार इस तिथि में 24 अप्रैल की सुबह से परिक्रमा शुरू होने वाली है।
चिलचिलाती धूप में उबड़-खाबड़ राह पर चलना श्रद्धालुओं की विवशता होगी। हालांकि, शासन स्तर पर 84 कोसी परिक्रमा मार्ग को 250 किमी लंबाई में टू-लेन विद पिप्ड सोल्डर तैयार करने की योजना तीन साल पहले बन चुकी है। प्रथम फेज का निर्माण बस्ती जिले में मखौड़ा धाम से आंबेडकरनगर सीमा तक 36 किमी की लंबाई में होना है। इसके लिए दो साल पहले ही जमीन के चिह्नांकन की कार्रवाई पूरी कर ली गई थी। मगर, मूल्यांकन कार्य होने में लगभग दो साल का समय लग गया।
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सड़क के लिए अवार्ड प्रक्रिया पूरी कर ली गई है, लेकिन मुआवजे का वितरण नहीं हो सका है। इससे सड़क का निर्माण नहीं शुरू हो सका है। नई सड़क बनने की शोर में स्थानीय स्तर से परिक्रमा मार्ग की मरम्मत नहीं कराई जा सकी है।
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यहां उखड़ गई हैं सड़क की गिट्टियां
परिक्रमा मार्ग पर मखौड़ा धाम से कोहराए, रजवापुर, केनौना, रामगढ़ से रामरेखा आश्रम तक की सड़क जगह-जगह उखड़ गई है। करीब 10 किमी की लंबाई में इस सड़क पर चलने लायक नहीं है। सड़क के किनारे धूप के चलते घास भी सूख चुकी है। श्रद्धालुओं को यह दूरी तय करने के लिए कंकर-पत्थर पर ही पैर रखकर चलना पड़ेगा। परिक्रमा को देखते हुए इस सड़क की मरम्मत भी नहीं की गई है।
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53 गांवों से होकर बननी थी 36 किमी सड़क
84 कोसी परिक्रमा मार्ग के प्रथम फेज का निर्माण मखौड़ा धाम से लेकर जिले के 56 गांवों में होना था। यह सड़क टू-लेन विद पेप्ड सोल्डर यानी 10 मीटर चौड़ी बननी है। 36 किमी लंबी इस सड़क पर 900 करोड़ रुपये खर्च होने हैं। इसमें सड़क के साथ आंबेडकरनगर जनपद में प्रवेश करने के लिए सरयू नदी पुल का निर्माण होना प्रस्तावित है। मगर, निर्माण न शुरू होने से श्रद्धालुओं को जर्जर सड़क पर पैदल चलने के साथ ही नाव के सहारे नदी भी पार करनी होगी।
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27 दिन में पूरी होती है 84 कोसी परिक्रमा
मखौड़ा धाम से शुरू 84 कोसी परिक्रमा 27 दिन में पूरी होती है। जिले में इसके दो पड़ाव रामरेखा और हनुमानबाग चकोही है। 23 अप्रैल की शाम तक विभिन्न तीर्थ स्थलों के साधु-संतों का समागम होगा। 24 अप्रैल की भोर से परिक्राम प्रारंभ होगी। सुबह 10.30 बजे रामगढ़ में श्रद्धालु विश्राम करेंगे और 3.30 बजे से फिर पदयात्रा कर रामरेखा पहुंचेंगे यहां रात्रि विश्राम करेंगे। अगले 25 अप्रैल को सुबह 5.30 बजे से फिर श्रद्धालु चलना शुरू करेंगे और 10.30 बजे समौड़ा गांव में विश्राम करेंगे, यहां 3.30 बजे चलना शुरू करेंगे और शाम ढलने के बाद हनुमानबाग चकोही में डेरा जमेगा। यहां रात्रि विश्राम के बाद अगले दिन 26 अप्रैल को सरयू नदी के तट की ओर प्रस्थान करेंगे और नांव के सहारे नदी पार कर आंबेडकर जनपद में परिक्रमा प्रवेश करेगी। 27 दिन बाद वैशाख मास की जानकी नवमी तिथि को मखौड़ा धाम में ही आकर परिक्रमा पूर्ण होगी।
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कोट
84 कोसी परिक्रमा मार्ग के लिए अवार्ड प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। मुआवजे के लिए डिमांड भेज दी गई है। शीघ्र ही मुआवजा वितरण शुरू हो जाएगा। इसी के साथ निर्माण कार्य भी शुरू करा दिया जाएगा।
-आरके वर्मा, एक्सईएन, एनएच, पीडब्ल्यूडी
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दो साल से अधिग्रहण प्रक्रिया में ही उलझा है विभाग
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। 84 कोसी परिक्रमा शुरू होने में महज 13 दिन और हैं। मगर, जिले में प्रथम फेज का परिक्रमा मार्ग बनकर तैयार होने को कौन कहें अब तक जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है। हर वर्ष की भांति इस बार भी साधु-संतों का रेला पथरीली राह पर चलने के लिए विवश होना पड़ेगा। नई सड़क बनने के चक्कर में परिक्रमा मार्ग की मरम्मत भी नहीं कराई जा सकी है।
प्रभु श्रीराम की जन्मस्थली और सप्तपुरियों में एक अयोध्या की 84 कोसी परिक्रमा की प्राचीन परंपरा है। जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति पाने के उद्देश्य से श्रद्धालु इस परिक्रमा को अटूट श्रद्धा के साथ नंगे पांव पूरी करते हैं। परिक्रमा का शुभारंभ चक्रवर्ती सम्राट राजा दशरथ के पुत्र कामेष्टि यज्ञ स्थल मख धाम (मखौड़ा) से चैत्र मास की पूर्णिमा तिथि से होता है। इस बार इस तिथि में 24 अप्रैल की सुबह से परिक्रमा शुरू होने वाली है।
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चिलचिलाती धूप में उबड़-खाबड़ राह पर चलना श्रद्धालुओं की विवशता होगी। हालांकि, शासन स्तर पर 84 कोसी परिक्रमा मार्ग को 250 किमी लंबाई में टू-लेन विद पिप्ड सोल्डर तैयार करने की योजना तीन साल पहले बन चुकी है। प्रथम फेज का निर्माण बस्ती जिले में मखौड़ा धाम से आंबेडकरनगर सीमा तक 36 किमी की लंबाई में होना है। इसके लिए दो साल पहले ही जमीन के चिह्नांकन की कार्रवाई पूरी कर ली गई थी। मगर, मूल्यांकन कार्य होने में लगभग दो साल का समय लग गया।
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सड़क के लिए अवार्ड प्रक्रिया पूरी कर ली गई है, लेकिन मुआवजे का वितरण नहीं हो सका है। इससे सड़क का निर्माण नहीं शुरू हो सका है। नई सड़क बनने की शोर में स्थानीय स्तर से परिक्रमा मार्ग की मरम्मत नहीं कराई जा सकी है।
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यहां उखड़ गई हैं सड़क की गिट्टियां
परिक्रमा मार्ग पर मखौड़ा धाम से कोहराए, रजवापुर, केनौना, रामगढ़ से रामरेखा आश्रम तक की सड़क जगह-जगह उखड़ गई है। करीब 10 किमी की लंबाई में इस सड़क पर चलने लायक नहीं है। सड़क के किनारे धूप के चलते घास भी सूख चुकी है। श्रद्धालुओं को यह दूरी तय करने के लिए कंकर-पत्थर पर ही पैर रखकर चलना पड़ेगा। परिक्रमा को देखते हुए इस सड़क की मरम्मत भी नहीं की गई है।
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53 गांवों से होकर बननी थी 36 किमी सड़क
84 कोसी परिक्रमा मार्ग के प्रथम फेज का निर्माण मखौड़ा धाम से लेकर जिले के 56 गांवों में होना था। यह सड़क टू-लेन विद पेप्ड सोल्डर यानी 10 मीटर चौड़ी बननी है। 36 किमी लंबी इस सड़क पर 900 करोड़ रुपये खर्च होने हैं। इसमें सड़क के साथ आंबेडकरनगर जनपद में प्रवेश करने के लिए सरयू नदी पुल का निर्माण होना प्रस्तावित है। मगर, निर्माण न शुरू होने से श्रद्धालुओं को जर्जर सड़क पर पैदल चलने के साथ ही नाव के सहारे नदी भी पार करनी होगी।
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27 दिन में पूरी होती है 84 कोसी परिक्रमा
मखौड़ा धाम से शुरू 84 कोसी परिक्रमा 27 दिन में पूरी होती है। जिले में इसके दो पड़ाव रामरेखा और हनुमानबाग चकोही है। 23 अप्रैल की शाम तक विभिन्न तीर्थ स्थलों के साधु-संतों का समागम होगा। 24 अप्रैल की भोर से परिक्राम प्रारंभ होगी। सुबह 10.30 बजे रामगढ़ में श्रद्धालु विश्राम करेंगे और 3.30 बजे से फिर पदयात्रा कर रामरेखा पहुंचेंगे यहां रात्रि विश्राम करेंगे। अगले 25 अप्रैल को सुबह 5.30 बजे से फिर श्रद्धालु चलना शुरू करेंगे और 10.30 बजे समौड़ा गांव में विश्राम करेंगे, यहां 3.30 बजे चलना शुरू करेंगे और शाम ढलने के बाद हनुमानबाग चकोही में डेरा जमेगा। यहां रात्रि विश्राम के बाद अगले दिन 26 अप्रैल को सरयू नदी के तट की ओर प्रस्थान करेंगे और नांव के सहारे नदी पार कर आंबेडकर जनपद में परिक्रमा प्रवेश करेगी। 27 दिन बाद वैशाख मास की जानकी नवमी तिथि को मखौड़ा धाम में ही आकर परिक्रमा पूर्ण होगी।
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84 कोसी परिक्रमा मार्ग के लिए अवार्ड प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। मुआवजे के लिए डिमांड भेज दी गई है। शीघ्र ही मुआवजा वितरण शुरू हो जाएगा। इसी के साथ निर्माण कार्य भी शुरू करा दिया जाएगा।
-आरके वर्मा, एक्सईएन, एनएच, पीडब्ल्यूडी