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Basti News: रिंग रोड निकला तो कौड़ियों की जमीन उगलने लगी सोना
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शहर के चारों तरफ 22 किलोमीटर फोरलेन सड़क बनाने की है योजना
- 35 गांवों के किसानों की बल्ले-बल्ले
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। जिले में रिंग रोड बनने की प्रक्रिया अभी शुरू हुई नहीं कि कौड़ियों के भाव वाली जमीन सोना उगलने लगी है। थ्री-डी यानी जमीनों के चिह्नांकन से 35 से ज्यादा गांव के काश्तकारों की लाॅटरी खुल गई है। डेढ़ से दो लाख बिस्वा या 10 से 15 लाख रुपये प्रति बीघे की दर से बिकने वाली जमीनों की कीमत अब चार गुना बढ़ गई है। पैसे वाले और जमीन के कारोबार से जुड़े लोग भू-स्वामियों के चक्कर लगा रहे हैं।
प्रस्तावित रिंग रोड शहर के चारों तरफ 42 किलोमीटर लंबी फोरलेन सड़क के रूप में बननी है। इसकी कुल लागत 1138.72 करोड़ रुपये है। प्रथम चरण में गोटवा बाजार से हड़िया तक 22.15 किलोमीटर सड़क के लिए एनएचएआई की ओर से अधिसूचना जारी कर दी गई है। इसके तहत सदर तहसील के 35 गांवों के 500 किसानों की कुल 90.8488 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की जानी है। इसके लिए चिह्नांकन कर लिया गया है। अभी जमीनों का मूल्यांकन होना बाकी है। अधिग्रहण प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद रिंग रोड के निर्माण का कार्य शुरू हो सकेगा। आर्थिक रूप से सक्षम लोग व्यवसाय एवं अन्य दृष्टिकोण से प्रस्तावित रिंग रोड के आसपास जमीन खरीदने की मंशा जाहिर कर रहे हैं, वहीं काश्तकारों ने जमीनों की कीमत बढ़ा दी है। 500 किसान, जिनकी जमीनें अधिग्रहित होंगी, उन्हें शासकीय दर से अच्छे मूल्य तो मिलेंगे ही, अन्य किसानों को भी जमीनों से अच्छा मुनाफा हासिल होगा। इसीलिए कुछ काश्तकार रिंग रोड बनने से पहले जमीनों को बेचने के लिए राजी नहीं हैं तो कुछ जमीनों का चार गुना कीमत लगाए हुए हैं।
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अब शहरी क्षेत्र में कहलाएंगे ये गांव
रिंग रोड बनने से बस्ती शहर के विस्तार का दायरा बढ़ जाएगा। प्रस्तावित अधिकांश गांवों में विकास प्राधिकरण भी प्रभावी रहेगा। अभी इन गांवों को शहर से दूर ग्रामीण इलाका माना जाता रहा है। मगर रिंग रोड बनने के बाद नगर पालिका और उसके बीच पड़ने वाले गांव शहरी क्षेत्र हो जाएंगे। इसलिए जमीनें रिंग रोड बनने से पहले ही महंगी हो गईं। रिंग रोड के लिए पहले फेज के प्रस्तावित गांव बकैनियाद्वीप, बक्सर, बल्लीपट्टी, बनकटा, बरवनियां, बायपोखर, बेलवाडाड़, भदेश्वरनाथ, भटहा, देवराव खास, देवरिया, डीघा, गोटवा, कड़रखास, कटया, खुटहन, कोपवा, कोपिया, मछिया, निविया, नौगढ़, ओठगनपुर कला, पचौरा, परसाजाफर, परसा डफाली, परसादपुर, पिपरा मेघउ, पोखरभिटवा, पुरैना, राजा चक, राजाजोत, रिठौली, सबदेइया कला, समसपुर व सेखुई एवं इनसे सटे लगभग 100 गांवों की जमीनों की कीमत में भारी उछाल आया है। जहां 10 से 15 लाख रुपये बीघे जमीन थी, वहां अब 4 से 6 लाख रुपये बिस्वा कीमत हो गई है।
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हाईवे एवं शहर से सटे गांवों में कीमत सबसे महंगी
हाईवे एवं शहर से सटे गांवों की कीमत पहले से ही बढ़ी हुई थी, अब रिंग रोड ने इनके दामों में और उछाल ला दिया है। शहर के नजदीक गांव पचौरा, बायपोखर, कड़र खास, रहठौली, मछिया, बनकटा से होकर रिंग रोड गुजरने के कारण यहां के संपर्क मार्ग या चकमार्ग किनारे की जमीनों की कीमत 4 से 5 लाख बिस्वा से बढ़कर 10 से 12 लाख रुपये प्रति बिस्वा हो गई है। जबकि अन्य गांव जो पहली बार फोरलेन सड़क से जुड़ रहे हैं, वहां एक से डेढ़ लाख प्रति बिस्वा बिकने वाली जमीनों की कीमत 4 से 5 लाख रुपये प्रति बिस्वा हो गई है।
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रिंग रोड बनने से काश्तकारों की जमीनों का अधिग्रहण भले हो रहा है, लेकिन इसका भविष्य में फायदा बहुत है। कई पीढि़यों से गांव में रहने का जो ठप्पा लगा था, वह दूर हो जाएगा।
सतीश सिंह, कटया
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जिन गांवों से रिंग रोड गुजरनी है, केवल वही नहीं आसपास के गांवों का भी विकास का द्वार खुल जाएगा। इसलिए जमीनों की कीमत में उछाल आया है। यह काश्तकारों के हित में है।
राजेश कुमार पांडेय, भटहा मंझरिया
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रिंग रोड बनने से विकास के नए आयाम खुलेंगे। बाजार और कस्बों में बढ़ोतरी होगी। एक साथ कई गांव शहरी क्षेत्र में शामिल होंगे। इसका फायदा सभी को मिलेगा। जगह के महत्व के हिसाब से जमीनों की कीमत बढ़ी हैं। ध्रुव कुमार पांडेय, कटरा भटहा
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रिंग रोड किनारे की जमीनों की कीमत केवल काश्तकार नहीं बढ़ा रहे हैं। सड़क बनने के बाद आसपास की जमीनों का सर्किल रेट सरकार खुद बढ़ाएगी। ऐसे में अगर किसान जमीन की कीमत बढ़ाकर मांग रहे हैं तो कोई गलत नहीं है।
वायुनंदन, बरवनिया
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रिंग रोड पर होंगी ये सुविधाएं
प्रस्तावित रिंग रोड के किनारे कॉमर्शियल कांप्लेक्स भी बनाए जाएंगे। इसके अलावा बड़े होटल बनेंगे। टोल प्लाजा भी बनाया जाएगा। इससे आसपास के क्षेत्रों को नई पहचान मिलेगी। विकास की पूरी गुंजाइश रहेगी। स्कूल, कालेज, हाॅस्पिटल, बाजार, शोरूम आदि खुलने की संभावनाएं बढ़ जाएंगी। इसीलिए जमीनों की कीमत में उछाल आ गया है।
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सड़कों का निर्माण जहां भी होगा वहां का महत्व बढ़ना स्वाभाविक है। शहर के चारों तरफ फोरलेन रिंग रोड बनने से विकास का एक नया तस्वीर सामने आएगा। इन जगहों पर लोग उद्योग, स्कूल, कॉलेज की दृष्टि से पूंजी निवेश करने के इच्छुक होते हैं। हर कोई विकासशील क्षेत्रों में रोजगार का अवसर तलाशता है।
सुरभि सिंह, आर्किटेक्ट
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- 35 गांवों के किसानों की बल्ले-बल्ले
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। जिले में रिंग रोड बनने की प्रक्रिया अभी शुरू हुई नहीं कि कौड़ियों के भाव वाली जमीन सोना उगलने लगी है। थ्री-डी यानी जमीनों के चिह्नांकन से 35 से ज्यादा गांव के काश्तकारों की लाॅटरी खुल गई है। डेढ़ से दो लाख बिस्वा या 10 से 15 लाख रुपये प्रति बीघे की दर से बिकने वाली जमीनों की कीमत अब चार गुना बढ़ गई है। पैसे वाले और जमीन के कारोबार से जुड़े लोग भू-स्वामियों के चक्कर लगा रहे हैं।
प्रस्तावित रिंग रोड शहर के चारों तरफ 42 किलोमीटर लंबी फोरलेन सड़क के रूप में बननी है। इसकी कुल लागत 1138.72 करोड़ रुपये है। प्रथम चरण में गोटवा बाजार से हड़िया तक 22.15 किलोमीटर सड़क के लिए एनएचएआई की ओर से अधिसूचना जारी कर दी गई है। इसके तहत सदर तहसील के 35 गांवों के 500 किसानों की कुल 90.8488 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की जानी है। इसके लिए चिह्नांकन कर लिया गया है। अभी जमीनों का मूल्यांकन होना बाकी है। अधिग्रहण प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद रिंग रोड के निर्माण का कार्य शुरू हो सकेगा। आर्थिक रूप से सक्षम लोग व्यवसाय एवं अन्य दृष्टिकोण से प्रस्तावित रिंग रोड के आसपास जमीन खरीदने की मंशा जाहिर कर रहे हैं, वहीं काश्तकारों ने जमीनों की कीमत बढ़ा दी है। 500 किसान, जिनकी जमीनें अधिग्रहित होंगी, उन्हें शासकीय दर से अच्छे मूल्य तो मिलेंगे ही, अन्य किसानों को भी जमीनों से अच्छा मुनाफा हासिल होगा। इसीलिए कुछ काश्तकार रिंग रोड बनने से पहले जमीनों को बेचने के लिए राजी नहीं हैं तो कुछ जमीनों का चार गुना कीमत लगाए हुए हैं।
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अब शहरी क्षेत्र में कहलाएंगे ये गांव
रिंग रोड बनने से बस्ती शहर के विस्तार का दायरा बढ़ जाएगा। प्रस्तावित अधिकांश गांवों में विकास प्राधिकरण भी प्रभावी रहेगा। अभी इन गांवों को शहर से दूर ग्रामीण इलाका माना जाता रहा है। मगर रिंग रोड बनने के बाद नगर पालिका और उसके बीच पड़ने वाले गांव शहरी क्षेत्र हो जाएंगे। इसलिए जमीनें रिंग रोड बनने से पहले ही महंगी हो गईं। रिंग रोड के लिए पहले फेज के प्रस्तावित गांव बकैनियाद्वीप, बक्सर, बल्लीपट्टी, बनकटा, बरवनियां, बायपोखर, बेलवाडाड़, भदेश्वरनाथ, भटहा, देवराव खास, देवरिया, डीघा, गोटवा, कड़रखास, कटया, खुटहन, कोपवा, कोपिया, मछिया, निविया, नौगढ़, ओठगनपुर कला, पचौरा, परसाजाफर, परसा डफाली, परसादपुर, पिपरा मेघउ, पोखरभिटवा, पुरैना, राजा चक, राजाजोत, रिठौली, सबदेइया कला, समसपुर व सेखुई एवं इनसे सटे लगभग 100 गांवों की जमीनों की कीमत में भारी उछाल आया है। जहां 10 से 15 लाख रुपये बीघे जमीन थी, वहां अब 4 से 6 लाख रुपये बिस्वा कीमत हो गई है।
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हाईवे एवं शहर से सटे गांवों में कीमत सबसे महंगी
हाईवे एवं शहर से सटे गांवों की कीमत पहले से ही बढ़ी हुई थी, अब रिंग रोड ने इनके दामों में और उछाल ला दिया है। शहर के नजदीक गांव पचौरा, बायपोखर, कड़र खास, रहठौली, मछिया, बनकटा से होकर रिंग रोड गुजरने के कारण यहां के संपर्क मार्ग या चकमार्ग किनारे की जमीनों की कीमत 4 से 5 लाख बिस्वा से बढ़कर 10 से 12 लाख रुपये प्रति बिस्वा हो गई है। जबकि अन्य गांव जो पहली बार फोरलेन सड़क से जुड़ रहे हैं, वहां एक से डेढ़ लाख प्रति बिस्वा बिकने वाली जमीनों की कीमत 4 से 5 लाख रुपये प्रति बिस्वा हो गई है।
रिंग रोड बनने से काश्तकारों की जमीनों का अधिग्रहण भले हो रहा है, लेकिन इसका भविष्य में फायदा बहुत है। कई पीढि़यों से गांव में रहने का जो ठप्पा लगा था, वह दूर हो जाएगा।
सतीश सिंह, कटया
जिन गांवों से रिंग रोड गुजरनी है, केवल वही नहीं आसपास के गांवों का भी विकास का द्वार खुल जाएगा। इसलिए जमीनों की कीमत में उछाल आया है। यह काश्तकारों के हित में है।
राजेश कुमार पांडेय, भटहा मंझरिया
रिंग रोड बनने से विकास के नए आयाम खुलेंगे। बाजार और कस्बों में बढ़ोतरी होगी। एक साथ कई गांव शहरी क्षेत्र में शामिल होंगे। इसका फायदा सभी को मिलेगा। जगह के महत्व के हिसाब से जमीनों की कीमत बढ़ी हैं। ध्रुव कुमार पांडेय, कटरा भटहा
रिंग रोड किनारे की जमीनों की कीमत केवल काश्तकार नहीं बढ़ा रहे हैं। सड़क बनने के बाद आसपास की जमीनों का सर्किल रेट सरकार खुद बढ़ाएगी। ऐसे में अगर किसान जमीन की कीमत बढ़ाकर मांग रहे हैं तो कोई गलत नहीं है।
वायुनंदन, बरवनिया
रिंग रोड पर होंगी ये सुविधाएं
प्रस्तावित रिंग रोड के किनारे कॉमर्शियल कांप्लेक्स भी बनाए जाएंगे। इसके अलावा बड़े होटल बनेंगे। टोल प्लाजा भी बनाया जाएगा। इससे आसपास के क्षेत्रों को नई पहचान मिलेगी। विकास की पूरी गुंजाइश रहेगी। स्कूल, कालेज, हाॅस्पिटल, बाजार, शोरूम आदि खुलने की संभावनाएं बढ़ जाएंगी। इसीलिए जमीनों की कीमत में उछाल आ गया है।
सड़कों का निर्माण जहां भी होगा वहां का महत्व बढ़ना स्वाभाविक है। शहर के चारों तरफ फोरलेन रिंग रोड बनने से विकास का एक नया तस्वीर सामने आएगा। इन जगहों पर लोग उद्योग, स्कूल, कॉलेज की दृष्टि से पूंजी निवेश करने के इच्छुक होते हैं। हर कोई विकासशील क्षेत्रों में रोजगार का अवसर तलाशता है।
सुरभि सिंह, आर्किटेक्ट