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Basti News: बिलों में भरा पानी, बाहर निकले विषधर, देखभाल कर रखिए पांव

Tue, 09 Jul 2024 02:17 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती Updated Tue, 09 Jul 2024 02:17 AM IST
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Water filled in the holes, poison has come out, take care of your feet
असाढ़-सावन में होती है सांपों की ब्रीडिंग, होते हैं ज्यादा हमलावर
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रविवार को सांप डसने से दो लोगों की हुई थी मौत
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। देर-सबेर अंधेरे में निकलना हो तो सतर्क रहिएगा। क्योंकि बारिश का पानी बिलों में भर जाने के बाद विषधर इन दिनों गुस्से में हैं। असाढ़-सावन उनकी ब्रीडिंग का समय होता है। ऐसे में उनके बिलों में पानी भरने से वे और भी आक्रामक हो जाते हैं। इंसान या जानवर का संपर्क होते ही वे डसने से गुरेज नहीं करते। रविवार कोदो घटनाएं सामने आईं। कलवारी क्षेत्र में पांच वर्षीय मासूम और गौर क्षेत्र में युवक की सर्पदंश से मृत्यु हो गई। एक सप्ताह में नौ लोग सर्पदंश का शिकार बन चुके हैं। इनमें तीन की मौत भी हो चुकी है। बरसात का मौसम शुरू होने के साथ ही सर्पदंश की घटनाओं की बाढ़ आ गई है। रोजाना तीन-चार लोग सांप डसने के बाद अस्पताल पहुंच रहे हैं।

सांप काटने पर लगाया जाने वाला बहुप्रचारित इंजेक्शन एएसबी (एंटी स्नेक वेनम) की कमी अक्सर पीड़ित पर भारी पड़ जाती है। मगर, इस बार स्वास्थ्य विभाग पहले से सतर्क है। जिला अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डाॅ. वीके यादव के मुताबिक एएसबी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। दुबौलिया सीएचसी प्रभारी डाॅ. सुशील कुमार, गौर के प्रभारी अधीक्षक जेपी कुशवाहा, बहादुरपुर के प्रभारी चिकित्साधिकााी डॉ पवन वर्मा, भानपुर से प्रभारी ने भी बताया कि उनके यहां एएसवी या एंटी स्नेक वेनम इंजेक्शन उपलब्ध है।
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सांप काटने के स्थान के पास चीरा लगाने की प्रक्रिया काफी पहले से आजमाई जाती रही है, मगर इधर कुछ डाॅक्टर इसे खतरनाक बताते हैं। शल्य चिकित्सक डाॅ. विकास के मुताबिक चीरा लगाने से घाव बढ़ जाता है। इससे और तेजी से जहरीला रक्त शरीर में फैलने का खतरा रहता है।
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कुछ सापों के काटने के स्थान पर निशान काफी हल्के होते हैं। देखने से पता नहीं चलता कि सांप ने डसा है अथवा नहीं। ऐसे में लक्षण देखकर इसका पता लगाया जाता है। दंश स्थान पर तीव्र जलन, तंद्रा, अवसाद, मिचली, वमन, अनैच्छिक मल-मूत्र-त्याग, अंगघात, पलकों का गिरना, किसी वस्तु का एक स्थान पर दो दिखाई देना,तथा पुतलियों का विस्फारित होना प्रमुख लक्षण हैं। अंतिम अवस्था में बेहोशी तथा मांसपेशियों में ऐंठन शुरू हो जाती है।

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विषैले सांपों की खास प्रजातियां
- यहां पाए जाने वाले विषैले सापों में नाग (कोब्रा), काला नाग, नागराज (किंग कोबरा), करैत आदि प्रमुख हैं। कुछ सांपों की प्रजातियां और भी हैं जो विषैली नहीं है।
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सांप डसे तो यह करें उपाय
- सर्पदंश वाले स्थान के कुछ ऊपर और नीचे रस्सी, रबर या कपड़े से कसकर बांध देना चाहिए । ताकि जहर प्रभावित रक्त बाकी शरीर में न फैलने पाए।
- लाल गरम चाकू से दंशस्थान को 1/2 इंच लंबा और 1/4 इंच चौड़ा चीरकर वहां का रक्त निकाल देना चाहिए।
- दंश वाले स्थान को साबुन या नमक के पानी, एक प्रतिशत पोटाश परमैंगनेट के घोल से धोना चाहिए।
- प्रथम उपचार के बाद व्यक्ति को शीघ्र निकटतम अस्पताल या चिकित्सक के पास ले जाना चाहिए।

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ऐसे करें बचाव



- अंधेरे में कतई कदम न रखें न हाथ डालें।



- नंगे पैर झाड़ी या घास में न जाएं।



- काफी दिनों से रखी बोरी, लकड़ी आदि को हटाते समय सजग रहें।



- खेत में जाने से पहले जूते पहनें और रात में टार्च लेकर निकलें।



- घर में कुछ ढूंढते समय नजर केंद्रित रखें।



- बरसात में जमीन पर न सोएं।
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