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Basti News: 40 किमी में दो टोल... हाईकोर्ट में सुनवाई आज
Tue, 13 Aug 2024 12:48 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Tue, 13 Aug 2024 12:48 AM IST
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सदन में परिवहन मंत्री कई बार बता चुके हैं ऐसे टोल को अवैध
एक वर्ष पहले हाईकोर्ट में दाखिल की गई थी याचिका
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। लखनऊ-गोरखपुर फोरलेन पर जिले में भूतल परिवहन विभाग के मानकों के विपरीत संचालित दो टोल प्लाजा पर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है। जबकि केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री सदन में कई बार सफाई दे चुके हैं कि 60 किमी के भीतर और एक जिले में दो टोल बंद किए जाएंगे। मगर, यहां 40 किमी के भीतर दो टोल प्लाजा चल रहे हैं। नगरीय क्षेत्र के दायरे से सटा हुआ बड़ेवन का टोल है। जबकि इसे दो किमी बाहर होना चाहिए। एक जिले में दो टोल प्लाजा न होने के मानक के सापेक्ष यहां तीन टोल प्लाजा पर पथकर की वसूली की जा रही है। इसे लेकर हाईकोर्ट में दाखिल याचिका पर मंगलवार को सुनवाई होगी।
हर्रैया के रहने वाले चंद्रमणि पांडेय उर्फ सुदामा ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से हाईकोर्ट प्रयागराज में जनहित याचिका दाखिल की है, जिसे संज्ञान में लेते हुए मुख्य न्यायाधीश ने वर्ष 2023 में ही सचिव भूतल परिवहन मंत्रालय भारत सरकार व राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण भारत सरकार तथा परियोजना निदेशक गोरखपुर के साथ जिलाधिकारी बस्ती को नोटिस जारी किया था। परियोजना निदेशक ने बचाव में कोर्ट में अपना पक्ष रखा था, जिसकी सुनवाई पूर्ण नहीं हो सकी। इस दौरान कभी विपक्षी अधिवक्ता ने मोहलत ले ली तो कभी किसी अन्य वजह से सुनवाई नहीं हो सकी। 24 अप्रैल 2024 के बाद से तो केस सुनवाई में ही नहीं लगा। मंगलवार 13 अगस्त को फिर सुनवाई है।
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तालाब की जमीन पर चौकड़ी टोल
हाईकोर्ट में दाखिल की गई याचिका में दो बिंदुओं पर सवाल उठाए गए हैं। पहला यह कि छावनी के चौकड़ी गांव में स्थित टोल और शहर के मड़वानगर में स्थित टोल की दूरी मात्र 40 किमी है। जबकि भूतल परिवहन मंत्रालय का मानक है कि एक ही रूट पर 60 किमी के भीतर दूसरा टोल नहीं होगा। दूसरा बिदु चौकड़ी टोल प्लाजा की जमीन की नवैयत को लेकर विवाद है। दावा किया गया है कि टोल का कार्यालय और एक तरफ की लेन चौकड़ी राजस्व गांव के गड्ढे की जमीन पर बना है।
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सहकारी बैंक के चेयरमैन ने हाईकोर्ट में दायर की थी याचिका
भाजपा नेता एवं जिला सहकारी बैंक के चेयरमैन राजेंद्र नाथ तिवारी ने केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय से लिखित सूचना प्राप्त की थी। इसमें स्पष्ट लिखा हुआ था कि दो टोल प्लाजा के बीच की दूरी कम से कम 60 किमी होनी चाहिए। मगर, मड़वानगर और चौकड़ी टोल प्लाजा की दूरी 40 किमी है। नगरीय क्षेत्र में भी टोल प्लाजा नहीं होना बताया गया है। जबकि मड़वानगर टोल प्लाजा शहरी क्षेत्र (बीडीए) के दायरे में है। इस मामले को लेकर राजेंद्र नाथ तिवारी हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में रिट दाखिल की थी। मगर, यह अपील हाईकोर्ट प्रयागराज में किए जाने के निर्देश दिए गए।
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प्रतिदिन हो रही 50 से 60 लाख की टोल वसूली
छावनी क्षेत्र के चौकड़ी टोल प्लाजा से 18 से 20 हजार वाहन प्रतिदिन गुजर रहे हैं। इनसे 28 से 30 लाख रुपये प्रतिदिन वसूली हो रही है। जबकि मड़वागनर टोल प्लाजा से प्रतिदिन 12 से 15 हजार वाहन निकल रहे हैं। इनसे 25 लाख रुपये टोल वसूली की जा रही है। लुंबिनी-दुद्धी मार्ग पर खड़ऊवा टोल प्लाजा से छह से सात हजार वाहन प्रतिदिन गुजर रहे हैं। इनसे छह से सात लाख रुपये की टोल वसूली हो रही है।
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एक वर्ष पहले हाईकोर्ट में दाखिल की गई थी याचिका
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। लखनऊ-गोरखपुर फोरलेन पर जिले में भूतल परिवहन विभाग के मानकों के विपरीत संचालित दो टोल प्लाजा पर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है। जबकि केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री सदन में कई बार सफाई दे चुके हैं कि 60 किमी के भीतर और एक जिले में दो टोल बंद किए जाएंगे। मगर, यहां 40 किमी के भीतर दो टोल प्लाजा चल रहे हैं। नगरीय क्षेत्र के दायरे से सटा हुआ बड़ेवन का टोल है। जबकि इसे दो किमी बाहर होना चाहिए। एक जिले में दो टोल प्लाजा न होने के मानक के सापेक्ष यहां तीन टोल प्लाजा पर पथकर की वसूली की जा रही है। इसे लेकर हाईकोर्ट में दाखिल याचिका पर मंगलवार को सुनवाई होगी।
हर्रैया के रहने वाले चंद्रमणि पांडेय उर्फ सुदामा ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से हाईकोर्ट प्रयागराज में जनहित याचिका दाखिल की है, जिसे संज्ञान में लेते हुए मुख्य न्यायाधीश ने वर्ष 2023 में ही सचिव भूतल परिवहन मंत्रालय भारत सरकार व राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण भारत सरकार तथा परियोजना निदेशक गोरखपुर के साथ जिलाधिकारी बस्ती को नोटिस जारी किया था। परियोजना निदेशक ने बचाव में कोर्ट में अपना पक्ष रखा था, जिसकी सुनवाई पूर्ण नहीं हो सकी। इस दौरान कभी विपक्षी अधिवक्ता ने मोहलत ले ली तो कभी किसी अन्य वजह से सुनवाई नहीं हो सकी। 24 अप्रैल 2024 के बाद से तो केस सुनवाई में ही नहीं लगा। मंगलवार 13 अगस्त को फिर सुनवाई है।
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तालाब की जमीन पर चौकड़ी टोल
हाईकोर्ट में दाखिल की गई याचिका में दो बिंदुओं पर सवाल उठाए गए हैं। पहला यह कि छावनी के चौकड़ी गांव में स्थित टोल और शहर के मड़वानगर में स्थित टोल की दूरी मात्र 40 किमी है। जबकि भूतल परिवहन मंत्रालय का मानक है कि एक ही रूट पर 60 किमी के भीतर दूसरा टोल नहीं होगा। दूसरा बिदु चौकड़ी टोल प्लाजा की जमीन की नवैयत को लेकर विवाद है। दावा किया गया है कि टोल का कार्यालय और एक तरफ की लेन चौकड़ी राजस्व गांव के गड्ढे की जमीन पर बना है।
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सहकारी बैंक के चेयरमैन ने हाईकोर्ट में दायर की थी याचिका
भाजपा नेता एवं जिला सहकारी बैंक के चेयरमैन राजेंद्र नाथ तिवारी ने केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय से लिखित सूचना प्राप्त की थी। इसमें स्पष्ट लिखा हुआ था कि दो टोल प्लाजा के बीच की दूरी कम से कम 60 किमी होनी चाहिए। मगर, मड़वानगर और चौकड़ी टोल प्लाजा की दूरी 40 किमी है। नगरीय क्षेत्र में भी टोल प्लाजा नहीं होना बताया गया है। जबकि मड़वानगर टोल प्लाजा शहरी क्षेत्र (बीडीए) के दायरे में है। इस मामले को लेकर राजेंद्र नाथ तिवारी हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में रिट दाखिल की थी। मगर, यह अपील हाईकोर्ट प्रयागराज में किए जाने के निर्देश दिए गए।
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प्रतिदिन हो रही 50 से 60 लाख की टोल वसूली
छावनी क्षेत्र के चौकड़ी टोल प्लाजा से 18 से 20 हजार वाहन प्रतिदिन गुजर रहे हैं। इनसे 28 से 30 लाख रुपये प्रतिदिन वसूली हो रही है। जबकि मड़वागनर टोल प्लाजा से प्रतिदिन 12 से 15 हजार वाहन निकल रहे हैं। इनसे 25 लाख रुपये टोल वसूली की जा रही है। लुंबिनी-दुद्धी मार्ग पर खड़ऊवा टोल प्लाजा से छह से सात हजार वाहन प्रतिदिन गुजर रहे हैं। इनसे छह से सात लाख रुपये की टोल वसूली हो रही है।