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Basti News: तेवर दिखा रहा मौसम, पछुआ सोख रही खेत की नमी
Sun, 02 Mar 2025 09:53 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Sun, 02 Mar 2025 09:53 PM IST
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गेहूं की फसल पर सबसे ज्यादा खतरा, किसानों के समक्ष फसल बचाने की चुनौती
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। मौसम का रुख दिन-ब-दिन तल्ख होता जा रहा है। अधिकतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंचने के बाद फसलें मुरझााने लगी थीं, अब पछुआ हवा भी परेशान करने लगी है। रविवार से शुरू हुई तेज पछुआ हवा मिट्टी और पौधों की नमी सोखने लगी है।
आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कुमारगंज अयोध्या के मौसम विज्ञानी डाॅ. अमरनाथ मिश्र ने बताया कि पश्चिमी विक्षोभ की वजह से कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि व बूंदाबांदी हुई है। इससे तापमान में एक से दो डिग्री की गिरावट दर्ज की गई है। सोमवार को भी अगर पछुआ चली तो इसमें एक डिग्री की और गिरावट हो सकती है। इस बार 15 फरवरी के बाद से ही तापमान आंखें दिखाने लगा। इसमें लगातार इजाफा होते रहने का नतीजा यह है कि मार्च के पहले दिन अधिकतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस के पार चला गया। जबकि इसे अधिक से अधिक 27 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए था। यही हाल न्यूनतम तापमान का भी है। रविवार को न्यूनतम तापमान 16 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
कृषि विशेषज्ञ प्रेमशंकर बताते हैं कि 20 दिसंबर के बाद की गेहूं की फसल पर सबसे ज्यादा खतरा है। उसकी बालियों में अभी दाने बनने की प्रक्रिया चल रही है। तापमान ज्यादा होने से उसके दाने पुष्ट होने से पहले सूख जाएंगे। हालांकि, नवंबर के अंतिम सप्ताह से दिसंबर के दूसरे सप्ताह तक की बोई फसल पर ज्यादा असर नहीं पड़ने वाला है।
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इस बीच किसानों को खेत में नमी कायम रखने में काफी चुनौती पेश आने लगी है। सबसे बड़ी दिक्कत सिंचाई को लेकर होने लगी है। किसान यदि खेत की ज्यादा सिंचाई कर देगा तो गेहूं की फसल के गिरने का खतरा बढ़ जाएगा। न सिंचाई करें तो फसल पकने से पहले पौधों के सूखने का डर है। मौसम वैज्ञानिक बताते हैं कि इस समय फसल को सुरक्षित कर पाना किसानों के लिए बड़ी चुनौती है। थोड़ी सी चूक सारे किए कराए पर पानी फेर सकती है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। मौसम का रुख दिन-ब-दिन तल्ख होता जा रहा है। अधिकतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंचने के बाद फसलें मुरझााने लगी थीं, अब पछुआ हवा भी परेशान करने लगी है। रविवार से शुरू हुई तेज पछुआ हवा मिट्टी और पौधों की नमी सोखने लगी है।
आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कुमारगंज अयोध्या के मौसम विज्ञानी डाॅ. अमरनाथ मिश्र ने बताया कि पश्चिमी विक्षोभ की वजह से कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि व बूंदाबांदी हुई है। इससे तापमान में एक से दो डिग्री की गिरावट दर्ज की गई है। सोमवार को भी अगर पछुआ चली तो इसमें एक डिग्री की और गिरावट हो सकती है। इस बार 15 फरवरी के बाद से ही तापमान आंखें दिखाने लगा। इसमें लगातार इजाफा होते रहने का नतीजा यह है कि मार्च के पहले दिन अधिकतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस के पार चला गया। जबकि इसे अधिक से अधिक 27 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए था। यही हाल न्यूनतम तापमान का भी है। रविवार को न्यूनतम तापमान 16 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
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कृषि विशेषज्ञ प्रेमशंकर बताते हैं कि 20 दिसंबर के बाद की गेहूं की फसल पर सबसे ज्यादा खतरा है। उसकी बालियों में अभी दाने बनने की प्रक्रिया चल रही है। तापमान ज्यादा होने से उसके दाने पुष्ट होने से पहले सूख जाएंगे। हालांकि, नवंबर के अंतिम सप्ताह से दिसंबर के दूसरे सप्ताह तक की बोई फसल पर ज्यादा असर नहीं पड़ने वाला है।
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इस बीच किसानों को खेत में नमी कायम रखने में काफी चुनौती पेश आने लगी है। सबसे बड़ी दिक्कत सिंचाई को लेकर होने लगी है। किसान यदि खेत की ज्यादा सिंचाई कर देगा तो गेहूं की फसल के गिरने का खतरा बढ़ जाएगा। न सिंचाई करें तो फसल पकने से पहले पौधों के सूखने का डर है। मौसम वैज्ञानिक बताते हैं कि इस समय फसल को सुरक्षित कर पाना किसानों के लिए बड़ी चुनौती है। थोड़ी सी चूक सारे किए कराए पर पानी फेर सकती है।