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चार गांवों के वजूद पर खतरा
ब्यूरो अमर उजाला/ बस्ती
Updated Mon, 01 Aug 2016 11:35 PM IST
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बाढ़
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घाघरा का जल स्तर सोमवार को खतरे के निशान 92.730 मीटर से 36 सेमी ऊपर 93.095 मीटर के स्तर पर पहुंच गया। बाढ़ का पानी घटने के बजाए बढ़ रहा है। सोमवार को कल्याणपुर, भरतापुर, सहजौरापाठक व कड़ौव गांव चारों तरफ से पानी से घिर गया। हालांकि बाढ़ का पानी अभी तक गांव में नहीं घुसा है लेकिन फसलें डूब गई है। जिससे ग्रामीण भयभीत नजर आ रहे हैं और मवेशियों के सामने चारे का संकट खड़ा हो गया है।
घाघरा की धारा को रोकने के लिए छह पुराने ठोकरों पर बोल्डर गिराने का कार्य जारी है। राजस्व की टीम कल्याणपुर गांव में कैंप किए हुए है। बाढ़ में फंसे लोगों को अभी तक राहत सामग्री उपलब्ध नहीं कराई गई। वहीं लोलपुर विक्रमजोत बांध पर नवनिर्मित एक नंबर ठोकर का नोज बह गया। इससे भदोही, मुंडेरी, केशवपुर औररानीपुर कटवनियां गांव पर कटान का संकट मंड़राने लगा है। जिससे विभाग और प्रशासन की नींद उड़ गई है।
रविवार को स्थिर घाघरा का जल स्तर सोमवार को अचानक बढ़ने से कई अन्य ठोकरों पर दबाव बढ़ गया। रविवार को लोलपुुर विक्रमजोत बांध के ठोकर नंबर एक पर जो कटान शुरू हो गया था वह सोमवार को धारा में बह गया। बाढ़ के चलते कई गांव की फसलें डूब गई है। गांव वालों ने इस बाढ़ के लिए सबसे अधिक दोष बालू माफियाओं को दिया। भदोही और केशवपुर गांव के राम लखन और बूजमोहन ने बताया कि प्रशासन की गलती और बालू माफियाओं का खामियाजा गांव वालों को भुगतना पड़ रहा है।
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घाघरा की धारा को रोकने के लिए छह पुराने ठोकरों पर बोल्डर गिराने का कार्य जारी है। राजस्व की टीम कल्याणपुर गांव में कैंप किए हुए है। बाढ़ में फंसे लोगों को अभी तक राहत सामग्री उपलब्ध नहीं कराई गई। वहीं लोलपुर विक्रमजोत बांध पर नवनिर्मित एक नंबर ठोकर का नोज बह गया। इससे भदोही, मुंडेरी, केशवपुर औररानीपुर कटवनियां गांव पर कटान का संकट मंड़राने लगा है। जिससे विभाग और प्रशासन की नींद उड़ गई है।
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रविवार को स्थिर घाघरा का जल स्तर सोमवार को अचानक बढ़ने से कई अन्य ठोकरों पर दबाव बढ़ गया। रविवार को लोलपुुर विक्रमजोत बांध के ठोकर नंबर एक पर जो कटान शुरू हो गया था वह सोमवार को धारा में बह गया। बाढ़ के चलते कई गांव की फसलें डूब गई है। गांव वालों ने इस बाढ़ के लिए सबसे अधिक दोष बालू माफियाओं को दिया। भदोही और केशवपुर गांव के राम लखन और बूजमोहन ने बताया कि प्रशासन की गलती और बालू माफियाओं का खामियाजा गांव वालों को भुगतना पड़ रहा है।
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