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यूपी में पौधरोपण की चुनौती, जल बचाएंगे तो जंगल पनपते जाएंगे : डॉ. जोशी
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साइकिल यात्रा लेकर बस्ती पहुंचे पद्मभूषण डॉ. ओम प्रकाश जोशी। संवाद
- फोटो : स्वयं
बस्ती। पद्मभूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी की प्रकृति संरक्षण साइकिल यात्रा सोमवार की शाम बस्ती पहुंची। जनकपुर से शुरू होकर मेरठ में समाप्त होने वाली इस यात्रा में डॉ. जोशी जनसंवाद के माध्यम से जल, जंगल और जमीन बचाने का संदेश दे रहे हैं।
संवाद न्यूज एजेंसी से खास बातचीत में उन्होंने यूपी में पौधरोपण की चुनौतियां बताईं, कहा कि जल संरक्षण करें तो जंगल पनप जाएंगे।
डॉ. जोशी के साथ 12 प्रकृति प्रेमी साइकिल यात्रा में शामिल हैं। चार अन्य सदस्य यात्रा में सहयोग कर रहे हैं। डॉ. जोशी कहते हैं कि प्रकृति के प्रति हमारी समझ सीमित है। प्रकृति ही हमारा जीवन है। वैश्विक स्तर पर हवा, पानी और मिट्टी संकट में हैं। मिट्टी जहरीली हो रही है, हवा दूषित है। जल भी प्रदूषित हो रहा है।
नदियों और सरोवरों का क्षरण हो रहा है। इसका दुष्प्रभाव सभी को झेलना पड़ेगा, इसलिए सचेत होना आवश्यक है। जल, जंगल और जमीन बचाने की मुहिम में सभी को शामिल होना होगा।
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डॉ. जोशी ने नदियों की स्थिति को पर्यावरण के क्षेत्र में सर्वाधिक चिंताजनक बताया। उन्होंने कहा कि नदियां या तो सूख रही हैं या फिर बाढ़ के रूप में तबाही मचा रही हैं। कहा कि यात्रा में बिहार में हरियाली देखकर सुखद अनुभूति हुई, जहां हरित क्षेत्र बढ़ने के संकेत मिले हैं। उत्तर प्रदेश में प्रवेश के बाद साफ-सफाई अच्छी लगी।
प्रधानमंत्री भी हरियाली बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। जैविक खेती का उद्देश्य मिट्टी को रसायनों के दुष्प्रभाव से बचाना है। सरकारें पर्यावरण के प्रति जागरूक हुई हैं और उत्तर प्रदेश में अमृत सरोवर बनाए जा रहे हैं। यात्रा के दौरान कई तालाब संरक्षित स्थिति में भी दिखाई दिए।
विकास कार्यों के साथ पर्यावरण संरक्षण के उपाय भी हों : डॉ. जोशी ने जलवायु के असामान्य होने को अंतरराष्ट्रीय स्तर का विषय बताया। कहा कि दुनिया के कई देशों ने ऊर्जा का अत्यधिक दोहन किया है, जिससे ग्लोबल वार्मिंग हो रही है। इसके कारण जलवायु में बदलाव हो रहा है, हिमखंड पिघल और टूट रहे हैं। तिब्बत में हिमखंड टूटने से नेपाल में आई त्रासदी इसके खतरों की याद दिलाती है।
यह किसी एक देश का मुद्दा नहीं है, बल्कि इसे बचाने के लिए वैश्विक स्तर पर पहल होनी चाहिए। उन्होंने विकास से पर्यावरण को होने वाले नुकसान पर भी चिंता जताई। कहा कि हर सरकार के पास विकास के साथ हरियाली बढ़ाने की योजना होनी चाहिए। यदि विकास से जल, जंगल और जमीन को नुकसान हो तो संरक्षण के उपाय साथ-साथ किए जाने चाहिए।ो
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संवाद न्यूज एजेंसी से खास बातचीत में उन्होंने यूपी में पौधरोपण की चुनौतियां बताईं, कहा कि जल संरक्षण करें तो जंगल पनप जाएंगे।
डॉ. जोशी के साथ 12 प्रकृति प्रेमी साइकिल यात्रा में शामिल हैं। चार अन्य सदस्य यात्रा में सहयोग कर रहे हैं। डॉ. जोशी कहते हैं कि प्रकृति के प्रति हमारी समझ सीमित है। प्रकृति ही हमारा जीवन है। वैश्विक स्तर पर हवा, पानी और मिट्टी संकट में हैं। मिट्टी जहरीली हो रही है, हवा दूषित है। जल भी प्रदूषित हो रहा है।
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नदियों और सरोवरों का क्षरण हो रहा है। इसका दुष्प्रभाव सभी को झेलना पड़ेगा, इसलिए सचेत होना आवश्यक है। जल, जंगल और जमीन बचाने की मुहिम में सभी को शामिल होना होगा।
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डॉ. जोशी ने नदियों की स्थिति को पर्यावरण के क्षेत्र में सर्वाधिक चिंताजनक बताया। उन्होंने कहा कि नदियां या तो सूख रही हैं या फिर बाढ़ के रूप में तबाही मचा रही हैं। कहा कि यात्रा में बिहार में हरियाली देखकर सुखद अनुभूति हुई, जहां हरित क्षेत्र बढ़ने के संकेत मिले हैं। उत्तर प्रदेश में प्रवेश के बाद साफ-सफाई अच्छी लगी।
प्रधानमंत्री भी हरियाली बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। जैविक खेती का उद्देश्य मिट्टी को रसायनों के दुष्प्रभाव से बचाना है। सरकारें पर्यावरण के प्रति जागरूक हुई हैं और उत्तर प्रदेश में अमृत सरोवर बनाए जा रहे हैं। यात्रा के दौरान कई तालाब संरक्षित स्थिति में भी दिखाई दिए।
विकास कार्यों के साथ पर्यावरण संरक्षण के उपाय भी हों : डॉ. जोशी ने जलवायु के असामान्य होने को अंतरराष्ट्रीय स्तर का विषय बताया। कहा कि दुनिया के कई देशों ने ऊर्जा का अत्यधिक दोहन किया है, जिससे ग्लोबल वार्मिंग हो रही है। इसके कारण जलवायु में बदलाव हो रहा है, हिमखंड पिघल और टूट रहे हैं। तिब्बत में हिमखंड टूटने से नेपाल में आई त्रासदी इसके खतरों की याद दिलाती है।
यह किसी एक देश का मुद्दा नहीं है, बल्कि इसे बचाने के लिए वैश्विक स्तर पर पहल होनी चाहिए। उन्होंने विकास से पर्यावरण को होने वाले नुकसान पर भी चिंता जताई। कहा कि हर सरकार के पास विकास के साथ हरियाली बढ़ाने की योजना होनी चाहिए। यदि विकास से जल, जंगल और जमीन को नुकसान हो तो संरक्षण के उपाय साथ-साथ किए जाने चाहिए।ो