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Basti News: ब्रांडेड की आड़ में जेनेरिक दवा खपाने का धंधा... चार गुना का मुनाफा

Sat, 04 Jan 2025 11:42 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती Updated Sat, 04 Jan 2025 11:42 PM IST
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The business of selling generic medicines under the guise of branded medicines...four times profit
पीएम जन औषधि केंद्र पर जेनेरिक के साथ बेची जा रही ब्रांडेड दवाएं, ग्राहक हो रहे गुमराह
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खुले बाजार में भी ब्रांडेड बताकर खपा रहे जेनेरिक दवा, कस्बों की दुकानों पर हो रहा ज्यादा खेल
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। ब्रांडेड के नाम पर जेनेरिक दवाओं में धंधेबाज खूब खेल कर रहे हैं। कुछ रैपर बदलकर चार गुना मुनाफा कमा रहे हैं तो कुछ जेनेरिक को ब्रांडेड दवा बताकर बेच दे रहे हैं। इसके बाद भी जिम्मेदार सो रहे हैं। अब प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र पर भी ब्रांडेट दवाओं को रखकर इसके आड़ में जेनेरिक दवाओं की अच्छी कीमत वसूल की जा रही है।
जानकारों के अनुसार, दवा के धंधेबाजों ने ज्यादा मुनाफा के लिए जाल बिछा रखा है। इसमें सीधे-साधे या अनभिज्ञ ग्राहक आसानी से फंस जाते हैं। सरकार ने सस्ते दाम पर दवाएं उपलब्ध कराने की पहल की तो इसमें भी खेल होने लगा। जेनेरिक दवाएं सस्ती होती हैं और ब्रांडेड महंगी। एक ही दवा के रेट में काफी अंतर होता है। सूत्रों की मानें तो धंधेबाज, जेनेरिक को ही ब्रांडेड बताकर मरीजों को ऊंचे दाम पर बेच दे रहे हैं। मिलते-जुलते नाम और निगरानी नहीं होने से धंधेबाज चांदी काट रहे हैं तो मरीज ठगे जा रहे हैं।
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कंपनियों ने अपने ब्रांड नाम से मिलती-जुलती सस्ती जेनेरिक दवाएं बाजार में उतारीं तो मकसद था मरीजों को सस्ता बेचना। मगर, इनकी आकर्षक पैकिंग और उस पर लिखे एमआरपी से धंधेबाजों को फायदा हो रहा है।
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ग्राहकों को 25 से 30 प्रतिशत छूट का लाभ देकर इस तरह की बड़ी कंपनियों ने अपने ब्रांड के नाम से मिलती-जुलती सस्ती जेनेरिक दवाएं बाजार में उतारी हैं। यह इसलिए हुआ कि मरीजों को फायदा हो। इसमें धंधेबाजों ने कमाई का जरिया खोज लिया है। ग्रामीण बाजार में यह धंधा ज्यादा चल रहा है। बाजार में नामी दवा कंपनियों ने भी अपनी ब्रांडेड के अलावा जेनेरिक दवाएं बाजार में उपलब्ध कराई हैं। इनकी पहचान सामान्य तौर पर ग्राहक नहीं कर सकते हैं। क्योंकि इन कंपनियों की जेनेरिक दवाइयों की पैकेजिंग भी ब्रांडेड जैसी ही होती है।
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रेट के अंतर से हो रहा अधिक मुनाफा

बुखार के सबसे आम दवा पैरासिटामॉल को नामी कंपनी ने पैरामिप के नाम से उतारा है। इसी प्रकार एलर्जी की सबसे चर्चित दवा सिट्रीजीन का विकल्प एलर्जीन है। कैल्शियम, विटामिन और डी-3 को मिलाकर बने टेबलेट एमकॉल का विकल्प जेनरिक में जिरकॉल के नाम से है। एक ही ब्रांड की इन दवाइयों की कीमत में जमीन-आसमान का अंतर है। जोड़ों में दर्द से संबंधित एक कंपनी की ब्रांड बाली दवा की 10 टैबलेट का पत्ता जहां 347 रुपये की है, वहीं उसकी जेनेरिक दवा का पत्ता 84 रुपये का है। इसलिए दुकानदार अक्सर ही ब्रांडेड का विकल्प बताकर जेनेरिक दवा ही पकड़ा देते हैं। बड़ा खेल यह है कि जेनेरिक दवाइयों पर जो एमआरपी दर्ज है, उस पर 40 प्रतिशत से अधिक कमीशन है। इसीलिए दुकानदार ब्रांडेड के नाम पर जेनेरिक माल बेच देते हैं।


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जानिए, क्या हैं जेनेरिक दवा
जब कोई नई दवा इजाद की जाती है तो संबंधित कंपनी का 20 साल के लिए पेटेंट माना जाता है। इस अवधि में दवा के सॉल्ट का प्रयोग दूसरा कोई नहीं कर सकता है। जो कंपनी अपने नए साल्ट के आधार पर दवा का उत्पादन करती है, वह रिसर्च से लेकर दवा वितरण तक के खर्च को मूल्य में जोड़ देती है। इससे उस दवा की कीमत बहुत अधिक हो जाती है। 20 साल बाद जब पेटेंट खत्म हो जाता है तो वह साल्ट अन्य कंपनियों के लिए भी उपलब्ध होता है। उस साल्ट के आधार पर जो दवाइयां बनती हैं, उन्हें अलग-अलग नाम से बाजार में बेचा जाता है।
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