फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Basti News ›   tender taken by duplicate certificate

अभिलेखों में खेल कर ले लिया 24 करोड़ का काम

Sat, 30 Nov 2019 11:18 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 30 Nov 2019 11:18 PM IST
विज्ञापन
tender taken by duplicate certificate
फर्जी दस्तावेज से 24 करोड़ का टेंडर लिया
विज्ञापन

जांच में फर्जी मिला जीडीए का प्रमाण पत्र, छह दिन में देना होगा स्पष्टीकरण
ब्लैक लिस्ट करने के साथ ही दर्ज होगा मुकदमा
अरुण/राज प्रकाश
बस्ती। जल निगम में एक कार्यदायी संस्था की कारगुजारी महकमे में खलबली है। फर्जी दस्तावेज से ही गोरखपुर की संस्था को निगम से 24 करोड़ रुपये का टेंडर जारी हो गया है। संस्था का खेल उजागर होने पर अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए हैं। फिलहाल, कार्यदायी संस्था से छह दिन में स्पष्टीकरण मांगा गया है।
अमृत योजना के तहत नगर पालिका क्षेत्र में 24 करोड़ रुपये की लागत से लगभग छह हजार घरों में वाटर सप्लाई का कनेक्शन दिया जाना था। इसी के साथ ही आठ ओवरहेड टैंक और नौ ट्यूबवेल स्थापित होने थे। इसके लिए 77 किलोमीटर तक पाइपलाइन भी बिछाई जानी थी। कार्य के लिए जल निगम की ओर से फरवरी 2019 में टेंडर निकाला गया था। टेंडर प्रक्रिया में मेसर्स विंध्यवासिनी, भगवान ट्रेडर्स, मल्टी अरबन इंफ्राइंस्ट्रक्चर, मेसर्स विद्युत कुमार जैन नामक चार फार्मों ने हिस्सा लिया। टेंडर खुलने के बाद सबसे कम रेट पर काम कराने के लिए तैयार मेसर्स विंध्यवासिनी को चुन लिया गया। इसी बीच एक शिकायत से महकमे में खलबली मच गई। दरअसल, मेसर्स विंध्यवासिनी ने काम लेने के लिए गोरखपुर विकास प्राधिकरण का अनुभव प्रमाण पत्र लगाया था। निगम से की गई शिकायत में यह बताया गया कि मेसर्स विंध्यवासिनी ने जो अनुभव प्रमाण पत्र लगाया है, वह फर्जी है। इसकी जांच कराई गई तो गोरखपुर विकास प्राधिकरण ने कहा कि उनके यहां से इस संस्था को कोई अनुभव प्रमाण पत्र नहीं जारी किया गया। इसके बाद मेसर्स विंध्यवासिनी की पोल खुल गई। हालांकि, निगम की ओर से इस संस्था को 26 नवंबर को नोटिस जारी कर छह दिन के अंदर स्पष्टीकरण मांगा गया है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह कि बगैर जांच-पड़ताल के ही फर्जी दस्तावेज पर 24 करोड़ का काम दे दिया गया।
विज्ञापन

एसएलटी की ओर से होगी कार्रवाई : एक्सईएन
जल निगम के अधिशासी अभियंता विश्वेश्वर प्रसाद कहते हैं कि जांच में उक्त संस्था का अनुभव प्रमाण पत्र फर्जी पाया गया। 26 नवंबर को संस्था को नोटिस देकर छह दिन के अंदर स्पष्टीकरण मांगा गया है। इसके बाद एसएलटी (स्टेट लेबल टेक्निकल टीम) की ओर से कार्रवाई की जाएगी। दोष सिद्ध होने पर संस्था को ब्लैक लिस्ट किया जाएगा। इसी के साथ ही मुकदमा भी दर्ज कराया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

डीएम के जाते ही ठंडे बस्ते में गई तालाबों की जांच
जांच टीम में एडीएम, एसडीएम सदर और ईओ थे शामिल
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। भूमाफिया पर नकेल कसने में प्रशासन नाकाम हो रहा है। सरकारी भूमि के अलावा ताल और पोखरों पर माफिया कब्जा कर रहे हैं। इसके चलते तालाबों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। दूसरी तरफ सार्वजनिक रास्तों को भी नहीं छोड़ा जा रहा है।
तालाबों को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए लगभग दो माह पूर्व तत्कालीन डीएम माला श्रीवास्तव ने जांच के निर्देश भी दिए थे, इसके लिए उन्होंने तीन सदस्यीय टीम गठित की थी, जिसमें एडीएम, एसडीएम सदर और ईओ नगर पालिका शामिल थे। लेकिन उनके स्थानांतरण के बाद यह जांच ठंडे बस्ते में चली गई। नगर पालिका क्षेत्र में लगभग नौ तालाब हैं। इनमें ज्यादातर ऐसे तालाब हैं, जो नाम मात्र के ही रह गए हैं। बानगी के तौर पर शहर के बभनगांवा मोहल्ले का ही तालाब ले लीजिए। लगभग तीन दशक पूर्व यह तालाब स्वच्छ और निर्मल हुआ करता था। साइबेरियन पक्षी इस तालाब की शोभा बढ़ाते थे। पशु-पक्षियों के लिए यह तालाब जीवनदायिनी था। वर्तमान में इस तालाब पर अतिक्रमणकारियों की नजर लग गई। चारों तरफ से अतिक्रमण के चलते यह तालाब धीरे-धीरे विलुप्त होता जा रहा है। किसी ने मकान बना लिया है, तो कोई मिट्टी पाटकर कब्जा कर रहा है। महरीखांवा स्थित तालाब की भी यही दशा है। मरवटिया राजा स्थित तालाब भी अस्तित्व की बाट जोह रहा है। गांव गोड़िया व तुरकहिया स्थित तालाब पर भी भूमाफिया हावी हैं। इस संबंध में जिलाधिकारी आशुतोष निरंजन ने कहा कि जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
वरासत मामलों की रिपोर्ट तलब
बस्ती। जिलाधिकारी आशुतोष निरंजन ने अविवादित वरासत के सभी मामलों को निस्तारित करते हुए प्रत्येक सप्ताह तहसीलोें से रिपोर्ट तलब की है। निर्देश दिए है कि उप्र राजस्व संहिता के प्रावधानों के अनुसार इन प्रकरणों के निस्तारण के लिए कार्य योजना प्रस्तुत करें। समीक्षा में जिलाधिकारी ने पाया कि बस्ती सदर में 810, हर्रैया में 890, भानपुर में 406 तथा रुधौली में 114 गांवों में यह कार्य पूरा किए जाने का लक्ष्य था। इसमें सदर 775 गांव में अविवादित वरासत के 1076 मामले प्रकाश में आए हैं। इसी प्रकार हर्रैया के 890 गांवों में 485, भानपुर के 406 गांवों में 240, रुधौली के 114 में 108 प्रकरण प्रकाश में आए हैं। बस्ती सदर में 846, हर्रैया में 303, भानुपर में 240, रुधौली में सभी 108 प्रकरण निस्तारित किए गए हैं। डीएम ने निर्देश दिए हैं कि शेष सभी 412 प्रकरण एक सप्ताह में निस्तारित कर रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
सदर छोड़ सभी तहसीलों की प्रगति शून्य
डीएम ने एसडीएम को प्रत्येक सप्ताह रिपोर्ट से अवगत कराने को कहा
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। असंक्रमणीय से संक्रमणीय घोषित किए जाने की प्रगति की समीक्षा में शिथिलता पर डीएम आशुतोष ने असंतोष जताया है। सभी एसडीएम को निर्देशित किया है कि अभियान चलाकर प्रत्येक सप्ताह प्रगति से अवगत कराएं।
हर्रैया, भानपुर और रुधौली तहसीलों में एक भी प्रकरण निस्तारित नहीं किया गए जबकि सदर तहसील में 10 प्रकरण निपटाए गए हैं। बताया कि हर्रैया में 201, भानपुर में 238, सदर में 786, रुधौली में 38 असंक्रमणीय से संक्रमणीय प्रकरण लंबित हैं। निर्देश दिए कि राजस्व संहिता के प्रावधानों के अनुसार कार्य योजना तैयार कर प्रत्येक सप्ताह कार्य को पूरा करें। पिछली निर्धारित कार्य योजना में सदर में 810, हर्रैया में 890, भानपुर में 406 तथा रुधौली में 114 गांवों के सभी 1263 प्रकरणों को निस्तारित किया जाना था।
इनसेट
आज 16 गांवों में पहुंचेगी टीम
बस्ती। सहखातेदारों एवं संक्रमणीय भूमिधर के मध्य सहमति के आधार पर भूमि विवादों के निस्तारण के लिए रविवार को राजस्व एवं पुलिस की टीम जिले में 16 गांवों में पहुंचेगी। इस अभियान के तहत तहसील सदर में कठिनौली, भरवलिया, मूडाडीहा, हबेली खास, खडौहा, चौबाह, चोलखरी गांव में टीम पहुंचेगी। तहसील हर्रैया में असनहरा, बनियाजोत, विशुनपुरा, मसही, धरमूपुर, अमिलिया, रामगढखास गांव में टीम पहुंचेगी। तहसील भानपुर में जोगिया तथा तहसील रूधौली में बखरिया में विवाद निस्तारण टीम कराएगी।
बेरोजगारों को चूना लगा रहीं भर्ती कंपनियां
मेडिकल कॉलेज के बाद प्रोबेशन विभाग में भर्ती घोटाला
कंपनियों ने शहर से गांव तक खड़ा कर लिया है नेटवर्क
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। सरकार की मंशा आउटसोर्सिंग से पदों को भरकर कम खर्च में अधिक काम लिया जाना है। शासन की इस मंशा को आउटसोर्सिंग कंपनियां झटका दे रही हैं। जिले में इस योजना से भर्ती बेरोजगारों को आउटसोर्सिंग कंपनियां अब तक लाखों रुपये का चूना लगा चुकी हैं। हालांकि, भ्रष्टाचार खुलने के बाद भर्ती निरस्त कर दी गई।
आउटसोर्सिंग कंपनियों ने शहर से लेकर गांव तक नेटवर्क खड़ा कर दिया है। जिम्मेदारों से साठगांठ कर ये बेरोजगारों से धनउगाही कर उन्हें नौकरी दे रही हैं। इसका खुलासा एक बार मेडिकल कॉलेज में हुआ तो दूसरी बार डीएम आशुतोष निरंजन ने स्वयं पकड़ा। संबंधित के खिलाफ कार्रवाई के लिए संस्तुति देते हुए मुकदमा दर्ज करवा दिया। मेडिकल कॉलेज में भर्ती के नाम पर बेरोजगारों का पंजीकरण कराया गया। इसमें 590 रुपये प्रति अभ्यर्थी वसूला गया। करीब 95 लाख रुपये पंजीकरण के नाम पर वसूल लिए। इसके बाद भर्ती शुरू की तो आरोपो-प्रत्यारोपों का दौर शुरू हो गया। माननीयों ने हस्तक्षेप किया तो उन्हें भी बदनाम करने की साजिश कंपनी के दलालों ने की। इसके बाद मामला शासन तक पहुंचा, जहां आउटसोर्सिंग कंपनी की ओर से भर्ती किए गए 140 लोगों की नियुक्ति रद्द कर नए सिरे से आवेदन मांगने के निर्देश दिए गए। इतने बड़े मामले पर आउटसोर्सिंग कंपनी का कुछ नहीं बिगड़ा। मामला खुल जाने के बाद अधिकारियों व जन प्रतिनिधियों तो इसे काली सूची में डालने का दबाव बनाया, मगर रसूख के चलते शासन ने भी इसके सामने घुटने टेक दिया।
अब फिर से कंपनी के नेटवर्क के लोग गांव-गांव में भर्ती के नाम पर वसूली में जुटे हैं। नया मामला प्रोबेशन विभाग के आउटसोर्सिंग में भर्ती घोटाले का सामने आया है। इसे डीएम ने खुद पकड़ा और संबंधित लिपिक के खिलाफ कार्रवाई व मुकदमा दर्ज कराने के निर्देश दिए। यह तो महज बानगी है। विभिन्न विभागों में आउटसोर्सिंग भर्ती में उच्चाधिकारियों की नाक के नीचे खुलेआम वसूली की जा रही है। इसके लिए जिला पंचायत की दुकानों में भी कई दलाल बैठकर अपनी जेब भर रहे हैं। प्रधानाचार्य डॉ. नवनीत कुमार ने कहा कि मेडिकल कॉलेज में भर्ती में आउटसोर्सिंग कंपनी क्या कर रही है। इससे मेरा कोई सरोकार नहीं है, मगर यहां भर्ती के बाद भेजे गए अभ्यर्थियों का साक्षात्कार किया जाएगा। यदि वे योग्य होंगे तभी उन्हें नौकरी पर रखा जाएगा।
सात वर्ष बाद भी ओवरहेड टैंक नहीं, निर्माण के लिए जांच
पड़री में 2012-13 में तय हुआ था टैंक का निर्माण
पेयजल स्वच्छता समिति के खाते में आए थे एक लाख
अमर उजाला ब्यूरो
सोनहा। क्षेत्र पंचायत सल्टौवा गोपालपुर क्षेत्र की ग्राम पंचायत पड़री के ग्रामीणों को सात वर्ष बाद भी शुद्ध पानी के लिए तरसना पड़ रहा है। वर्ष 2012-13 में तत्कालीन प्रधान आशा के कार्यकाल में एक लाख रुपये पेयजल स्वच्छता समिति के खाते में आए थे, मगर उस पर कोई कार्य नहीं हुआ। इसे लेकर क्षेत्र के रमेश प्रताप मिश्र ने सीएम पोर्टल पर शिकायत की है। रमेश की शिकायत पर अधिकारियों ने जांच की है।
पीडी/बीडीओ आरपी सिंह ने बताया कि शिकायत पर जांच की गई है। ग्राम पंचायत पड़री में पानी का टंकी बनने के लिए जो धन आया था, उसको वापस करा लिया गया था। क्योंकि पड़री में ओवरहेड टैंक के निर्माण को जब नीव की खुदाई जा रही थी कि तो वह योजना को समाप्त कर उसको रोक दिया गया। इसके बाद प्रशासन ने योजना का धन वापस कर दिया। इस नाते ओवरहेड टैंक का निर्माण नहीं हो सका। ग्राम पंचायत सचिव व प्रधान को निर्देशित किया गया है कि वे पड़री में शुद्ध पेयजल की व्यवस्था कराएं। ग्राम पंचायत सचिव अखिलेश वर्मा ने बताया कि शुद्ध पेयजल की उपलब्धता के लिए ओवरहेड टैंक व ट्यूबवेल की जरूरत है। प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है। धन अवमुक्त होते ही कार्य कराकर व्यवस्था बना दी जाएगी।
दुर्व्यवस्था की भेंट चढ़ रही गोआश्रय स्थल योजना
गाय मरने की सूचना पर पहुंचे एडीओ, कहा-कार्रवाई होगी
अमर उजाला ब्यूरो
सिकंदरपुर। गो आश्रय स्थल दुर्व्यवस्था की भेंट चढ़ रहा है। पशुुओं के लिए जहां चारा नहीं है, वहीं, बदइंतजामी के चलते वे बीमार भी हो रहे हैं। इन पशुओं के देखरेख की जिम्मेदारी जिनके कंधों पर है वे महज खानापूरी कर रहे हैं। इसके चलते पशुओं की मौत भी हो रही है।
परशुरामपुर विकासखंड के गो आश्रय स्थल जमौलिया पाण्डेय में कुल 15 पशु बांधे गए थे, जिनका जियो टैग भी किया गया था। इन पशुओं की निगरानी के लिए चार सफाई कर्मी भीखीराम, राम सूरत, शिवपूजन मौर्य और राम उजागर मौर्य को नियुक्त किया गया है। एक हफ्ते पूर्व इस गो आश्रय स्थल से चार पशु रस्सी तोड़कर बाहर निकल गए। लेकिन यहां पर नियुक्त सफाई कर्मियों ने न तो उन्हें पकड़ना मुनासिब समझा और न ही संबंधित अधिकारियों को इसकी सूचना दी। आलम यह है कि इसी पशु आश्रय स्थल की एक गाय छह दिन पूर्व यहां से दो किलोमीटर की दूरी पर रायपुर गांव में पहुंच गई। रायपुर गांव के लोगों का कहना है कि इसकी सूचना उन्होंने पशु आश्रय स्थल पर मौजूद सफाई कर्मियों को दी। लेकिन सफाई कर्मियों ने इसकी अनदेखी कर दी। गाय पहले से ही बीमार थी और गांव के जुगनू प्रसाद के खेत में शुक्रवार की शाम से ही बीमार पड़ी थी। लोगों का कहना है कि रात में उसे किसी जानवर ने पीछे से बुरी तरह नोचा था। इसके चलते शनिवार की सुबह उसकी मौत हो गई। सूचना पर पहुंचे एडीओ पंचायत परमात्मा प्रसाद पांडेय ने सफाई कर्मियों को साथ लेकर मृत गाय को दफना दिया। इसी गो आश्रय स्थल से लापता एक और जियोटैग लगा पशु शनिवार दोपहर में रायपुर चौराहे पर दुर्घटना का शिकार होकर घायल हो गया। इस संबंध में एडीओ पंचायत परमात्मा प्रसाद पांडेय का कहना है कि एक हफ्ते पूर्व चार जानवर पशु आश्रय स्थल से निकल गए थे। तो वहां पर मौजूद सफाई कर्मियों को उन्हें पकड़ना चाहिए था और इसकी सूचना भी देनी चाहिए थी। कहा कि चारों सफाई कर्मियों पर कार्रवाई की जाएगी।
ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने दिए जांच के निर्देश
प्रधान प्रतिनिधि ने आरोपों को बेबुनियाद बताया
अमर उजाला ब्यूरो
विक्रमजोत। क्षेत्र के लखना ग्राम पंचायत के राजस्व गांव गोपालपुर में शौचालय और पंचायत भवन के नाम पर धांधली का मामला प्रकाश में आया है। ग्रामीणों की ओर से इसकी शिकायत उच्चाधिकारियों से की थी।

शुक्रवार को मामले में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट व प्रभारी खंड विकास अधिकारी प्रेम प्रकाश मीणा ने एक टीम बना कर जांच के निर्देश दिए। शिकायत में कहा गया है कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत वर्ष 2017-18 और 18-19 में 110 शौचालय का बिना निर्माण कराए फर्जी भुगतान कराया गया है। गोपालपुर गांव के अशोक सिंह ने शिकायत में बताया कि ग्राम पंचायत में 80 फीसदी शौचालय अधूरे हैं। कई शौचालय दरवाजा, सीट, छत और प्लास्टर विहीन हैं। वित्तीय वर्ष 2008-9 में अर्धनिर्मित पंचायत भवन के मरम्मत के नाम पर वर्तमान वर्ष 19-20 में फर्जी भुगतान की शिकायत विभागीय अधिकारियों के अलावा मुख्यमंत्री पोर्टल पर की गई थी। पंचायत भवन जो चार साल से खंडहर में तब्दील है उसके नाम पर भुगतान की शिकायत पहले बीडीओ और तहसील दिवस में की जा चुकी है। इस संबंध में एडीओ पंचायत अनिल कुमार सिंह ने कहा कि मजिस्ट्रेट साहब के निर्देश पर जल्द हि लखना ग्राम पंचायत में जांच टीम भेजकर कार्रवाई की जाएगी। ग्राम पंचायत के प्रधान प्रतिनिधि हरिहर सिंह ने बताया कि ग्रामीणों का आरोप बेबुनियाद है। पंचायत भवन का निर्माण सत्र 2008 में पूर्व ग्राम प्रधान की ओर से कराया गया था।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed