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Basti News: रखिए सेहत का ख्याल... बाजार में ढाई सौ टन मिलावटी मिठाई
Wed, 30 Oct 2024 10:35 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Wed, 30 Oct 2024 10:35 PM IST
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मिठाइयोें के निर्माण में खपाया गया है 10 करोड़ से अधिक रिफाइंड ऑयल एवं वनस्पति घी
देसी घी के नाम पर बिक रहा 1500 से 2000 रुपये किलो मिठाई, मिलावट इसमें भी
संवाद न्यूद एजेंसी
बस्ती। टेस्ट बढि़या है। सुगंध भी देसी घी जैसी है। मगर, इतने पर भरोसा न करिए। दिवाली के बहार में बाजार में बिक रही इस तरह की मिठाइयां मिलावटी है। पॉम आयल, रिफाइन एवं वनस्पति घी के प्रयोग से मेवा जड़ित नक्काशी दार मिठाइयां बल्क में तैयार की गई हैं। अच्छी मिठाइयों के बीच मिलावटखोरों ने बाजार में करीब ढाई सौ टन मिलावटी मिठाइयां भी खपा दी है।
मिलावटी मिठाइयों की बिक्री भी तेजी से हो रही है। दिवाली से छठ पर्व तक अधिकतर घरों में यही मिठाइयां खाई और खिलाई जाएंगी। ऐसे में अपनी सेहत का खुद ध्यान रखने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है।
मिलावटी घी, खोआ और छेना से बनी इन मिठाइयों को आकर्षक बनाने के लिए रंग, एल्युमिनियम वर्क और खुशबू के लिए एसेंस का इस्तेमाल किया गया है। इसे खाने से गैस्ट्रो एंट्राइटिस, फूड पॉइजनिंग होना सामान्य बात है। अधिक गंभीर होने पर लीवर और किडनी पर भी असर हो सकता है, इसलिए त्योहार में मिठाई खाते समय सावधानी जरूर बरतें, अन्यथा बीमार होकर अस्पताल पहुंच जाएंगे तो खुद के साथ परिवार के अन्य लोगों की खुशियों पर भी ग्रहण लग जाएगा।
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मिठाई के धंधेबाजों ने दिवाली के लिए महीने भर पहले सितंबर में ही करीब 10 करोड़ का मैदा, सूजी, बेसन, रिफाइंड ऑयल, घी, वनस्पति, शकरकंद का आटा समेत खोआ और मिठाई बनाने की सामग्री एकत्र कर ली थी। बाजार के जानकारों का अनुमान है कि करीब ढाई सौ टन मिलावटी मिठाई बाजार में लाई गई है। इसमें जिम्मेदारों की भी मिलीभगत बताई जा रही है। यही वजह है कि जिले में दुकानों से नमूने लेने के अलावा कारखानों में कभी छापा आदि की कार्रवाई नहीं की गई।
शहर समेत विभिन्न कस्बों में मिलाकर सौ से अधिक मिठई के कारखाने संचालित हो रहे हैं। यहां बड़े पैमाने पर वनस्पति घी, रिफाइंड, कलर, विशेष किस्म के सेंट आदि के प्रयोग से मिठाई तैयार की जा रही है। खाद्य सुरक्षा विभाग ने इन कारखानों में बनाई जा रही मिलावटी मिठाइयों का भंडाफोड़ अब तक नहीं कर सका है। जबकि नामचीन एवं साधारण मिठाई की दुकानों के नमूने कई बार असुरक्षित एवं अधोमानक पाए गए हैं।
मिठाइयों को रंगीन बनाने के लिए लाल व पीले रंग के केमिकल वाले पाउडर का प्रयोग किया जा रहा है। मिठाइयों को आकर्षक बनाने के लिए लगाया गया चांदी का वर्क भी सेहत को नुकसान पहुंचाता है। अब तो चांदी की जगह एल्युमिनियम का वर्क लगाया जा रहा है। दुकानदार जगदीश ने बताया कि लड्डू, रसगुल्ला आदि को बनाते के बाद पहले ऊपर से केवड़ा जल डाल दिया जाता है। इससे हल्की खुशबू आती थी। लेकिन, तीसरे दिन मिठाई खराब होने लगती थी। अब इसकी जगह एसेंस की पुड़िया आती है। 20 ग्राम की पुड़िया 50 किलोग्राम लड्डू के लिए पर्याप्त होती है। इसमें अलग-अलग खुशबू वाला विकल्प होता है। वैसे इलाइची वाला सबसे अच्छा माना जाता है। क्योंकि इसके प्रयोग से मिठाई सात से आठ दिन तक ताजा जैसी दिखती है।
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मिठाइयों के रंग-सुगंध पर न जाइए वरना बढ़ेगी लीवर की तकलीफ
लड्डू को लाल करने के लिए आमतौर पर फूड ग्रेड रेड कलर मिलाया जाता है। लेकिन, धंधेबाजों ने इससे आगे बढ़ते हुए मिठाई में खुशबू बढ़ाने और लंबे समय तक ताजा जैसा दिखाने के लिए उसमें इलाइची वाला एसेंस मिला रखा है। विशेषज्ञों की राय है कि ऐसी मिठाइयां सेहत के लिए बेहद हानिकारक हैं। इनसे गंभीर लीवर इंफेक्शन और फूड पॉइजनिंग तक हो सकता है।
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अस्पताल में पहुंचने लगे पेट दर्द, डायरिया के मरीज
जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. रामजी सोनी का कहना है कि हर साल त्योहार बाद डायरिया और फूड पॉइजनिंग के मामले बढ़ जाते हैं। लेकिन, इस बार तो त्योहार से पहले ही लोग अस्पताल आने लगे हैं। हर दिन पांच-छह लोग डायरिया की चपेट में आ रहे हैं। ये वही होते हैं, जिन्होंने बाजार का मिलावटी सामान खाया है। ठेलों पर या सड़क के किनारे स्टॉल लगाकर जो मिठाइयां बेची जा रही हैं, उनकी गुणवत्ता पूरी तरह से संदिग्ध है। जिन दुकानों पर नियमित मिठाई बनती व बिकती है, वहीं से ही खरीदें।
अधिक रंगीन और अधिक खुशबूदार या चमकदार मिठाई दिख रही है तो उसकी गुणवत्ता जरूर चेक करें। मिलावटी मिठाई खाने पर चार से पांच दिन बाद इसका असर दिखेगा। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सरफराज कहते हैं कि मिलावटी सामान एकाध बार खाने से शरीर पर जो कुप्रभाव पड़ते हैं, उसका तो शरीर स्वयं ही उपचार कर लेता है। लेकिन जब बार-बार वही अखाद्य शरीर में पहुंचता है तो उसमें मौजूद केमिकल अंगों को नुकसान पहुंचाते हैं। दिवाली और होली जैसे त्योहार में सप्ताह भर तक खाने-खिलाने का दौर चलता है। ऐसे में विशेष सावधानी रखनी चाहिए। कोशिश करें कि खाना शुद्ध और पौष्टिक हो।
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कोट
त्योहार में घर की प्रसन्नता के लिए मिठाई खरीद कर लोग लाते हैं और मिलावट के चलते अगर सेहत खराब हो तो यह बेहद चिंतनीय है। खतरनाक केमिकल शरीर के किस आंतरिक हिस्से को प्रभावित कर दे यह पता नहीं है। खाद्य पदार्थ में मिलावट करने वालों को कठोर दंड मिलना चाहिए। ऐसे लोगों का सामाजिक बहिष्कार जरूरी है। उनके प्रतिष्ठान का भी बहिष्कार करें ताकि धंधेबाजों पर अंकुश लग सके। यह जिम्मेदारी भी समाज
के लोगों की है।
-डॉ. रघुवर पांडेय, समाजशास्त्री
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मिलावटी मिठाई एवं अन्य मिलावटी खाद्य पदार्थों की बिक्री पर रोकथाम के लिए लगातार चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। इस महीने 50 से अधिक नमूने लिए जा चुके हैं। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद कार्रवाई निर्धारित होगी।
-धर्मराज मिश्र, अभिहित अधिकारी
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देसी घी के नाम पर बिक रहा 1500 से 2000 रुपये किलो मिठाई, मिलावट इसमें भी
संवाद न्यूद एजेंसी
बस्ती। टेस्ट बढि़या है। सुगंध भी देसी घी जैसी है। मगर, इतने पर भरोसा न करिए। दिवाली के बहार में बाजार में बिक रही इस तरह की मिठाइयां मिलावटी है। पॉम आयल, रिफाइन एवं वनस्पति घी के प्रयोग से मेवा जड़ित नक्काशी दार मिठाइयां बल्क में तैयार की गई हैं। अच्छी मिठाइयों के बीच मिलावटखोरों ने बाजार में करीब ढाई सौ टन मिलावटी मिठाइयां भी खपा दी है।
मिलावटी मिठाइयों की बिक्री भी तेजी से हो रही है। दिवाली से छठ पर्व तक अधिकतर घरों में यही मिठाइयां खाई और खिलाई जाएंगी। ऐसे में अपनी सेहत का खुद ध्यान रखने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है।
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मिलावटी घी, खोआ और छेना से बनी इन मिठाइयों को आकर्षक बनाने के लिए रंग, एल्युमिनियम वर्क और खुशबू के लिए एसेंस का इस्तेमाल किया गया है। इसे खाने से गैस्ट्रो एंट्राइटिस, फूड पॉइजनिंग होना सामान्य बात है। अधिक गंभीर होने पर लीवर और किडनी पर भी असर हो सकता है, इसलिए त्योहार में मिठाई खाते समय सावधानी जरूर बरतें, अन्यथा बीमार होकर अस्पताल पहुंच जाएंगे तो खुद के साथ परिवार के अन्य लोगों की खुशियों पर भी ग्रहण लग जाएगा।
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मिठाई के धंधेबाजों ने दिवाली के लिए महीने भर पहले सितंबर में ही करीब 10 करोड़ का मैदा, सूजी, बेसन, रिफाइंड ऑयल, घी, वनस्पति, शकरकंद का आटा समेत खोआ और मिठाई बनाने की सामग्री एकत्र कर ली थी। बाजार के जानकारों का अनुमान है कि करीब ढाई सौ टन मिलावटी मिठाई बाजार में लाई गई है। इसमें जिम्मेदारों की भी मिलीभगत बताई जा रही है। यही वजह है कि जिले में दुकानों से नमूने लेने के अलावा कारखानों में कभी छापा आदि की कार्रवाई नहीं की गई।
शहर समेत विभिन्न कस्बों में मिलाकर सौ से अधिक मिठई के कारखाने संचालित हो रहे हैं। यहां बड़े पैमाने पर वनस्पति घी, रिफाइंड, कलर, विशेष किस्म के सेंट आदि के प्रयोग से मिठाई तैयार की जा रही है। खाद्य सुरक्षा विभाग ने इन कारखानों में बनाई जा रही मिलावटी मिठाइयों का भंडाफोड़ अब तक नहीं कर सका है। जबकि नामचीन एवं साधारण मिठाई की दुकानों के नमूने कई बार असुरक्षित एवं अधोमानक पाए गए हैं।
मिठाइयों को रंगीन बनाने के लिए लाल व पीले रंग के केमिकल वाले पाउडर का प्रयोग किया जा रहा है। मिठाइयों को आकर्षक बनाने के लिए लगाया गया चांदी का वर्क भी सेहत को नुकसान पहुंचाता है। अब तो चांदी की जगह एल्युमिनियम का वर्क लगाया जा रहा है। दुकानदार जगदीश ने बताया कि लड्डू, रसगुल्ला आदि को बनाते के बाद पहले ऊपर से केवड़ा जल डाल दिया जाता है। इससे हल्की खुशबू आती थी। लेकिन, तीसरे दिन मिठाई खराब होने लगती थी। अब इसकी जगह एसेंस की पुड़िया आती है। 20 ग्राम की पुड़िया 50 किलोग्राम लड्डू के लिए पर्याप्त होती है। इसमें अलग-अलग खुशबू वाला विकल्प होता है। वैसे इलाइची वाला सबसे अच्छा माना जाता है। क्योंकि इसके प्रयोग से मिठाई सात से आठ दिन तक ताजा जैसी दिखती है।
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मिठाइयों के रंग-सुगंध पर न जाइए वरना बढ़ेगी लीवर की तकलीफ
लड्डू को लाल करने के लिए आमतौर पर फूड ग्रेड रेड कलर मिलाया जाता है। लेकिन, धंधेबाजों ने इससे आगे बढ़ते हुए मिठाई में खुशबू बढ़ाने और लंबे समय तक ताजा जैसा दिखाने के लिए उसमें इलाइची वाला एसेंस मिला रखा है। विशेषज्ञों की राय है कि ऐसी मिठाइयां सेहत के लिए बेहद हानिकारक हैं। इनसे गंभीर लीवर इंफेक्शन और फूड पॉइजनिंग तक हो सकता है।
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अस्पताल में पहुंचने लगे पेट दर्द, डायरिया के मरीज
जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. रामजी सोनी का कहना है कि हर साल त्योहार बाद डायरिया और फूड पॉइजनिंग के मामले बढ़ जाते हैं। लेकिन, इस बार तो त्योहार से पहले ही लोग अस्पताल आने लगे हैं। हर दिन पांच-छह लोग डायरिया की चपेट में आ रहे हैं। ये वही होते हैं, जिन्होंने बाजार का मिलावटी सामान खाया है। ठेलों पर या सड़क के किनारे स्टॉल लगाकर जो मिठाइयां बेची जा रही हैं, उनकी गुणवत्ता पूरी तरह से संदिग्ध है। जिन दुकानों पर नियमित मिठाई बनती व बिकती है, वहीं से ही खरीदें।
अधिक रंगीन और अधिक खुशबूदार या चमकदार मिठाई दिख रही है तो उसकी गुणवत्ता जरूर चेक करें। मिलावटी मिठाई खाने पर चार से पांच दिन बाद इसका असर दिखेगा। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सरफराज कहते हैं कि मिलावटी सामान एकाध बार खाने से शरीर पर जो कुप्रभाव पड़ते हैं, उसका तो शरीर स्वयं ही उपचार कर लेता है। लेकिन जब बार-बार वही अखाद्य शरीर में पहुंचता है तो उसमें मौजूद केमिकल अंगों को नुकसान पहुंचाते हैं। दिवाली और होली जैसे त्योहार में सप्ताह भर तक खाने-खिलाने का दौर चलता है। ऐसे में विशेष सावधानी रखनी चाहिए। कोशिश करें कि खाना शुद्ध और पौष्टिक हो।
...
कोट
त्योहार में घर की प्रसन्नता के लिए मिठाई खरीद कर लोग लाते हैं और मिलावट के चलते अगर सेहत खराब हो तो यह बेहद चिंतनीय है। खतरनाक केमिकल शरीर के किस आंतरिक हिस्से को प्रभावित कर दे यह पता नहीं है। खाद्य पदार्थ में मिलावट करने वालों को कठोर दंड मिलना चाहिए। ऐसे लोगों का सामाजिक बहिष्कार जरूरी है। उनके प्रतिष्ठान का भी बहिष्कार करें ताकि धंधेबाजों पर अंकुश लग सके। यह जिम्मेदारी भी समाज
के लोगों की है।
-डॉ. रघुवर पांडेय, समाजशास्त्री
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मिलावटी मिठाई एवं अन्य मिलावटी खाद्य पदार्थों की बिक्री पर रोकथाम के लिए लगातार चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। इस महीने 50 से अधिक नमूने लिए जा चुके हैं। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद कार्रवाई निर्धारित होगी।
-धर्मराज मिश्र, अभिहित अधिकारी