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Basti News: लक इंडिया लाटरी..लाइव
Wed, 24 May 2023 12:25 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Wed, 24 May 2023 12:25 AM IST
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बस्ती। साहब! वो नीले पर्दा वाला मकान...चल रही लक इंडिया लाॅटरी। जाइए पर्दा हटाइए, अंदर बैठे होंगे कुछ लती लोग। स्मार्ट फोन और काॅपी के साथ जुआरियों में चर्चित वो युवा एजेंट भी होगा और साथ में उसके एक-दो चमचे भी। जो आए दिन अच्छे-खासे घरों के शोहदों को ऑनलाइन लाॅटरी खेलने का आदी बना रहे हैं। ... कदम बढ़ते ही पर्दे के पीछे चल रही हलचल की आहट साफ सुनाई देती है। कुछ देर ठहराव के बाद शक की गुंजाइश खत्म और सबकुछ सच प्रतीत होने लगता है। पर्दे वाले घर में कोई दाखिल हो रहा है तो कोई निकल रहा है। मजदूर तबका और युवा वर्ग की आवाजाही ज्यादा रहती है। स्थल पुरानी बस्ती थाना से बमुश्किल 300 मीटर दूर है। बिल्कुल घनी आबादी वाले क्षेत्र में। मोहल्ला रानी पोखरा न्यू कालोनी के नाम से जाना जाता है। रास्ता ऐसा कि करुआ बाबा चौक पर स्थित मंदिर के ठीक सामने से पैदल ही प्रवेश करिए और दूसरी तरफ से निकलकर फिर उसी चौक पर आ जाइए।
वैसे तो अपने शहर में इस गोरखधंधे के कई अड्डे हैं, लेकिन मंगलवार को टीम लक इंडिया लाॅटरी के लिए मशहूर इस एक अड्डे के बिल्कुल समीप तक पहुंची। दूर खड़े एक शरीफजादे ने मंशा जानते ही उस मकान का तुरंत तस्दीक कर दिया जहां यह धंधा चल रहा था। उनका दर्द भी छलका। बोले... आगे बढि़ए अभी सब पता चल जाएगा। इस अड्डे की वजह से मोहल्ले का माहौल खराब हो गया है साहब। हमें अपने बच्चों की रखवाली करनी पड़ रही है, कहीं वह भी इनके फेर में न फंस जाएं। टीम उनकी निशानदेही पर पर्दे की आड़ में संचालित लाॅटरी वाले इस अड्डे के ठीक सामने पहुंच गई। भीतर की हलचल बाहर सुनाई पड़ रही थी। ‘पहिले राउंडवा में काव मारिस...नहला (यानी 9 नंबर) ओह तब गय’...जीरो रहा हमार। यानी हार गए। लेयो अबकी लगाओ पंजा पर (यानी लाॅटरी का पांच नंबर)... केतना? पांच टिकट यार...। लाओ पइसा देयो..जाओ। इसी तरह के शोर-शराबे के बीच कोई अकेले पर्दे वाले कमरे में दाखिल हो रहा था और कोई निकल रहा था। आने-जाने वालों में मजदूर और युवा वर्ग के लोग ज्यादा नजर आए। मोहल्ले के ही एक जानकार ने बताया कि अच्छे घरों के शोहदे बार-बार खुद न आकर किसी को भेजते रहते हैं। दिन भर के लकी ड्रा का हिसाब वह शाम को स्वयं आकर करते हैं। ताकि उन्हें कोई इस लत का शिकार होते देख न पाए। जानकार ने बताया कि इस धंधे का खुलकर कोई विरोध नहीं कर पाता है। क्योंकि इसके एजेंट और उनके चमचे सभी स्थानीय होते हैं। इसलिए कोई दुश्मनी नहीं लेना चाहता। हां! गोपनीय शिकायत पुलिस से होती है लेकिन कार्रवाई होने के बजाय उलटे एजेंट को ही शिकायतकर्ता का नाम पता चल जाता है। इसलिए अब कोई शिकायत भी नहीं करता है। स्पष्ट है कि लाॅटरी के इस अवैध कारोबारियों की साठगांठ पुलिस से निरंतर बनी रहती है।
यह तो बनगी मात्र है शहर के अन्य हिस्सों में भी लाॅटरी का अवैध धंधा बदस्तूर जारी है। गांवगोड़िया, बड़ेवन, रौतापार चौराहा, भटोलवा, बरदहिया आदि जगहों पर लाॅटरी एजेंट फिक्स अड्डा नहीं बनाए हैं। अलबत्ता दो से तीन सौ मीटर के रेंज में वे मोबाइल फोन और काॅपी के साथ घूमकर इस धंधे को संचालित कर रहे हैं। पुलिस इन्हें भलीभांति जानती है लेकिन इन पर हाथ नहीं डालती है।
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जानिए कैसे लती बन गए शोहदे
केस नंबर- एक
रंजीत कालोनी के रहने वाले एक व्यक्ति इस लाटरी के धंधे से खुद पीड़ित हैं। बताया कि उनका बेटा कम उम्र में ही लक इंडिया लाॅटरी खेलने का आदी बन गया। जीत-हार के चक्कर में वह दिन भर घर से गायब रहता है। अनुशासित रखने पर घर में मौन रहता है। सहूलियत मिलते ही लाॅटरी के अड्डे पर पहुंच जाता है।
केस नंबर- दो
बड़ेवन निवासी एक महिला ने बताया कि उनके पति नहीं है। बेटे पर ही घर की जिम्मेदारी है। वह मजदूरी करता है। पहले सबकुछ ठीक था। इधर, दो साल से उनका कमाऊ पूत लाॅटरी खेलने का आदी हो गया है। वह अपनी कमाई का पैसा लाकर लाॅटरी एजेंट को दे देता है। अक्सर वह गेम हार जाता है। पुलिस से भी कई बार खुद जाकर शिकायत की, लेकिन लाॅटरी का धंधा बंद नहीं कराया गया। अब बेटे की गलत आदत के चलते घर का खर्च चलना मुश्किल हो गया है।
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ऑनलाइन लाॅटरी हो या जुआ का खेल, यह सभी प्रतिबंधित है। वैसे पुलिस को इस तरह की कोई सूचना नहीं है। यदि कहीं कोई जानकारी मिलती है तो तत्काल विधिक कार्रवाई की जाएगी। -आलोक प्रसाद, सीओ सिटी, बस्ती।
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वैसे तो अपने शहर में इस गोरखधंधे के कई अड्डे हैं, लेकिन मंगलवार को टीम लक इंडिया लाॅटरी के लिए मशहूर इस एक अड्डे के बिल्कुल समीप तक पहुंची। दूर खड़े एक शरीफजादे ने मंशा जानते ही उस मकान का तुरंत तस्दीक कर दिया जहां यह धंधा चल रहा था। उनका दर्द भी छलका। बोले... आगे बढि़ए अभी सब पता चल जाएगा। इस अड्डे की वजह से मोहल्ले का माहौल खराब हो गया है साहब। हमें अपने बच्चों की रखवाली करनी पड़ रही है, कहीं वह भी इनके फेर में न फंस जाएं। टीम उनकी निशानदेही पर पर्दे की आड़ में संचालित लाॅटरी वाले इस अड्डे के ठीक सामने पहुंच गई। भीतर की हलचल बाहर सुनाई पड़ रही थी। ‘पहिले राउंडवा में काव मारिस...नहला (यानी 9 नंबर) ओह तब गय’...जीरो रहा हमार। यानी हार गए। लेयो अबकी लगाओ पंजा पर (यानी लाॅटरी का पांच नंबर)... केतना? पांच टिकट यार...। लाओ पइसा देयो..जाओ। इसी तरह के शोर-शराबे के बीच कोई अकेले पर्दे वाले कमरे में दाखिल हो रहा था और कोई निकल रहा था। आने-जाने वालों में मजदूर और युवा वर्ग के लोग ज्यादा नजर आए। मोहल्ले के ही एक जानकार ने बताया कि अच्छे घरों के शोहदे बार-बार खुद न आकर किसी को भेजते रहते हैं। दिन भर के लकी ड्रा का हिसाब वह शाम को स्वयं आकर करते हैं। ताकि उन्हें कोई इस लत का शिकार होते देख न पाए। जानकार ने बताया कि इस धंधे का खुलकर कोई विरोध नहीं कर पाता है। क्योंकि इसके एजेंट और उनके चमचे सभी स्थानीय होते हैं। इसलिए कोई दुश्मनी नहीं लेना चाहता। हां! गोपनीय शिकायत पुलिस से होती है लेकिन कार्रवाई होने के बजाय उलटे एजेंट को ही शिकायतकर्ता का नाम पता चल जाता है। इसलिए अब कोई शिकायत भी नहीं करता है। स्पष्ट है कि लाॅटरी के इस अवैध कारोबारियों की साठगांठ पुलिस से निरंतर बनी रहती है।
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यह तो बनगी मात्र है शहर के अन्य हिस्सों में भी लाॅटरी का अवैध धंधा बदस्तूर जारी है। गांवगोड़िया, बड़ेवन, रौतापार चौराहा, भटोलवा, बरदहिया आदि जगहों पर लाॅटरी एजेंट फिक्स अड्डा नहीं बनाए हैं। अलबत्ता दो से तीन सौ मीटर के रेंज में वे मोबाइल फोन और काॅपी के साथ घूमकर इस धंधे को संचालित कर रहे हैं। पुलिस इन्हें भलीभांति जानती है लेकिन इन पर हाथ नहीं डालती है।
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केस नंबर- एक
रंजीत कालोनी के रहने वाले एक व्यक्ति इस लाटरी के धंधे से खुद पीड़ित हैं। बताया कि उनका बेटा कम उम्र में ही लक इंडिया लाॅटरी खेलने का आदी बन गया। जीत-हार के चक्कर में वह दिन भर घर से गायब रहता है। अनुशासित रखने पर घर में मौन रहता है। सहूलियत मिलते ही लाॅटरी के अड्डे पर पहुंच जाता है।
केस नंबर- दो
बड़ेवन निवासी एक महिला ने बताया कि उनके पति नहीं है। बेटे पर ही घर की जिम्मेदारी है। वह मजदूरी करता है। पहले सबकुछ ठीक था। इधर, दो साल से उनका कमाऊ पूत लाॅटरी खेलने का आदी हो गया है। वह अपनी कमाई का पैसा लाकर लाॅटरी एजेंट को दे देता है। अक्सर वह गेम हार जाता है। पुलिस से भी कई बार खुद जाकर शिकायत की, लेकिन लाॅटरी का धंधा बंद नहीं कराया गया। अब बेटे की गलत आदत के चलते घर का खर्च चलना मुश्किल हो गया है।
ऑनलाइन लाॅटरी हो या जुआ का खेल, यह सभी प्रतिबंधित है। वैसे पुलिस को इस तरह की कोई सूचना नहीं है। यदि कहीं कोई जानकारी मिलती है तो तत्काल विधिक कार्रवाई की जाएगी। -आलोक प्रसाद, सीओ सिटी, बस्ती।