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Basti News: पैड़ा आश्रम में दूसरे दिन भी पसरा रहा सन्नाटा, बाबा की हालत में सुधार
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पैंडा वाले बाबा का आश्रम व मेडिकल कालेज में भर्ती बाबा
- फोटो : संस्था
मानिकचंद। वाल्टरगंज थाना क्षेत्र के पैड़ा गांव स्थित आश्रम में विषाक्त पदार्थ खाने वाले गोविंद दास उर्फ पैड़ा वाले बाबा की हालत में सुधार है। मेडिकल कॉलेज के आईसीयू में उनका उपचार चल रहा है। उधर, घटना के दूसरे दिन सोमवार को आश्रम में सन्नाटा पसरा रहा। बाबा के परिजन अस्पताल में उनके साथ हैं।
जानकारी के अनुसार, गोविंद दास ने रविवार सुबह आश्रम के पूजा कक्ष में जाकर दरवाजा बंद कर लिया था। उन्होंने किसी को अंदर आने से मना कर दिया था। इसके बाद मोबाइल से लाइव प्रसारण करते हुए विषाक्त पदार्थ खा लिया। जानकारी मिलने पर उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार चल रहा है। हालांकि, उन्होंने यह कदम क्यों उठाया, इसकी वजह अब तक स्पष्ट नहीं हो सकी है।
परिजनों के अनुसार, आश्रम में प्रत्येक रविवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। घटना वाले दिन भी सुबह से लोगों की भीड़ जुटी थी। इसके बावजूद गोविंद दास ने ऐसा कदम क्यों उठाया, यह परिजन भी नहीं समझ पा रहे हैं। उनकी इच्छा आश्रम में बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की कथा आयोजित कराने की भी थी।
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बचपन से पूजा-पाठ में लगता था मन
गोविंद दास तीन भाइयों में सबसे छोटे हैं और अविवाहित हैं। उनके बड़े भाई अरविंद कुमार और दूसरे भाई रविंद्र कुमार विवाहित हैं। पिता गिरधारी लाल और मां ज्ञानमती ने बताया कि गोविंद का बचपन से ही पूजा-पाठ में मन लगता था। उन्होंने घर के पीछे हनुमानजी का मंदिर बनवाया था, जहां नियमित रूप से पूजा करते थे। बाद में उन्होंने आश्रम बनाकर झाड़-फूंक के माध्यम से लोगों की सेवा शुरू की।
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चिकित्सकों की निगरानी में उपचार
मेडिकल कॉलेज के उप प्रधानाचार्य डॉ. अनिल कुमार यादव ने बताया कि गोविंद दास की हालत में सुधार है। आईसीयू में चिकित्सकों की निगरानी में उपचार किया जा रहा है। स्वास्थ्य में सुधार जारी रहने पर उन्हें जल्द अस्पताल से छुट्टी दी जा सकती है।
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जानकारी के अनुसार, गोविंद दास ने रविवार सुबह आश्रम के पूजा कक्ष में जाकर दरवाजा बंद कर लिया था। उन्होंने किसी को अंदर आने से मना कर दिया था। इसके बाद मोबाइल से लाइव प्रसारण करते हुए विषाक्त पदार्थ खा लिया। जानकारी मिलने पर उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार चल रहा है। हालांकि, उन्होंने यह कदम क्यों उठाया, इसकी वजह अब तक स्पष्ट नहीं हो सकी है।
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परिजनों के अनुसार, आश्रम में प्रत्येक रविवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। घटना वाले दिन भी सुबह से लोगों की भीड़ जुटी थी। इसके बावजूद गोविंद दास ने ऐसा कदम क्यों उठाया, यह परिजन भी नहीं समझ पा रहे हैं। उनकी इच्छा आश्रम में बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की कथा आयोजित कराने की भी थी।
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बचपन से पूजा-पाठ में लगता था मन
गोविंद दास तीन भाइयों में सबसे छोटे हैं और अविवाहित हैं। उनके बड़े भाई अरविंद कुमार और दूसरे भाई रविंद्र कुमार विवाहित हैं। पिता गिरधारी लाल और मां ज्ञानमती ने बताया कि गोविंद का बचपन से ही पूजा-पाठ में मन लगता था। उन्होंने घर के पीछे हनुमानजी का मंदिर बनवाया था, जहां नियमित रूप से पूजा करते थे। बाद में उन्होंने आश्रम बनाकर झाड़-फूंक के माध्यम से लोगों की सेवा शुरू की।
चिकित्सकों की निगरानी में उपचार
मेडिकल कॉलेज के उप प्रधानाचार्य डॉ. अनिल कुमार यादव ने बताया कि गोविंद दास की हालत में सुधार है। आईसीयू में चिकित्सकों की निगरानी में उपचार किया जा रहा है। स्वास्थ्य में सुधार जारी रहने पर उन्हें जल्द अस्पताल से छुट्टी दी जा सकती है।