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नियम दरकिनार कर 28 को बना दिया संविदाकर्मी
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शिकायत के बाद जांच के लिए डीएम ने मांगे अभिलेख
पहले आउटसोर्सिंग में थे, 2017 का है मामला
नीरज श्रीवास्तव
बस्ती। पांच करोड़ के दवा घोटाले से चर्चाओं में आए जिले के पूर्व सीएमओ डा. जेएलएम कुशवाहा का नाम फिर चर्चा में है। इस बार उनके कार्यकाल के दौरान नियमों से हटकर आउटसोर्सिंग के 28 कर्मियों को संविदा कर्मी बनाए जाने का है। शिकायत मिलने के बाद डीएम आशुतोष निरंजन ने जांच के निर्देश दिए हैं। इसी क्रम में उन्होंने इससे जुड़ी फाइलें मांगी हैं।
दरअसल, वर्ष 2012 में तैनात आउट सोर्सिंग के 28 कर्मियों को 2017 में संविदा कर्मी बना दिया गया। इसके लिए नियमों का पालन भी नहीं किया गया। शासन का निर्देश है कि संविदा पर कर्मियों की तैनाती के लिए अखबारों में विज्ञापन निकाला जाएगा। इसमें आउट सोर्सिंग के तैनात कर्मियों को वरीयता के आधार पर मौका दिया जाए। इसी निर्देश की आड़ में तत्कालीन सीएमओ व जिम्मेदार अधिकारी ने गुपचुप ढंग से शासनादेशों को ताक पर रखकर 14 ब्लाक प्रोग्राम मैनेजर व 14 आपरेटरों को बिना किसी विज्ञापन के ही संविदा पर तैनाती दे दी। वर्ष 2017 में हुई इस तैनाती से तब पर्दा उठा जब किसी ने इसकी शिकायत डीएम आशुतोष निरंजन को की। सीएमओ डा. जेपी त्रिपाठी ने कहा कि आउट सोर्सिंग कर्मियों को संविदा में तैनात किए जाने के प्रकरण में डीएम ने अभिलेख तलब किए हैं। अभिलेखों को एकत्रित कराया जा रहा है। शीघ्र ही इसे जांच के लिए उपलब्ध करा दिया जाएगा।
दवा घोटाले की जांच अभी है लंबित
पूर्व सीएमओ पर दवा घोटाले की जांच अभी चल रही है। घोटाला सामने आने के बाद शासन ने तत्कालीन सीएमओ डा. जेएलएम कुशवाहा को गोंडा में वरिष्ठ परामर्शदाता पद पर तैैनात कर दिया था। जांच वित्त नियंत्रक के पास लंबित है।
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पहले आउटसोर्सिंग में थे, 2017 का है मामला
नीरज श्रीवास्तव
बस्ती। पांच करोड़ के दवा घोटाले से चर्चाओं में आए जिले के पूर्व सीएमओ डा. जेएलएम कुशवाहा का नाम फिर चर्चा में है। इस बार उनके कार्यकाल के दौरान नियमों से हटकर आउटसोर्सिंग के 28 कर्मियों को संविदा कर्मी बनाए जाने का है। शिकायत मिलने के बाद डीएम आशुतोष निरंजन ने जांच के निर्देश दिए हैं। इसी क्रम में उन्होंने इससे जुड़ी फाइलें मांगी हैं।
दरअसल, वर्ष 2012 में तैनात आउट सोर्सिंग के 28 कर्मियों को 2017 में संविदा कर्मी बना दिया गया। इसके लिए नियमों का पालन भी नहीं किया गया। शासन का निर्देश है कि संविदा पर कर्मियों की तैनाती के लिए अखबारों में विज्ञापन निकाला जाएगा। इसमें आउट सोर्सिंग के तैनात कर्मियों को वरीयता के आधार पर मौका दिया जाए। इसी निर्देश की आड़ में तत्कालीन सीएमओ व जिम्मेदार अधिकारी ने गुपचुप ढंग से शासनादेशों को ताक पर रखकर 14 ब्लाक प्रोग्राम मैनेजर व 14 आपरेटरों को बिना किसी विज्ञापन के ही संविदा पर तैनाती दे दी। वर्ष 2017 में हुई इस तैनाती से तब पर्दा उठा जब किसी ने इसकी शिकायत डीएम आशुतोष निरंजन को की। सीएमओ डा. जेपी त्रिपाठी ने कहा कि आउट सोर्सिंग कर्मियों को संविदा में तैनात किए जाने के प्रकरण में डीएम ने अभिलेख तलब किए हैं। अभिलेखों को एकत्रित कराया जा रहा है। शीघ्र ही इसे जांच के लिए उपलब्ध करा दिया जाएगा।
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दवा घोटाले की जांच अभी है लंबित
पूर्व सीएमओ पर दवा घोटाले की जांच अभी चल रही है। घोटाला सामने आने के बाद शासन ने तत्कालीन सीएमओ डा. जेएलएम कुशवाहा को गोंडा में वरिष्ठ परामर्शदाता पद पर तैैनात कर दिया था। जांच वित्त नियंत्रक के पास लंबित है।
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