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Basti News: मातृ-शिशु मृत्यु दर में लाएं कमी...संस्थागत प्रसव पर जोर
Fri, 22 Aug 2025 01:26 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Fri, 22 Aug 2025 01:26 AM IST
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बस्ती। सरकारी अस्पतालों में संस्थागत प्रसव बढ़ाए जाने के लिए स्टाफ नर्स, सीएचओ और एएनएम को ट्रेनिंग दी जा रही है। जिला महिला अस्पताल में 21 दिवसीय एसबीए ट्रेनिंग का समापन बृहस्पतिवार को हुआ।
सीएमएस डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि गर्भवतियों और बच्चों की मृत्युदर घटाने के लिए सभी स्टाफ नर्सों सहित फीमेल हेल्थ वर्करों को स्किल बर्थ अटेंडेंट का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। सीएचसी-पीएचसी और सब सेंटरों पर तैनात स्टाफ नर्स, सीएचओ व एएनएम को प्रशिक्षित किया गया। उन्होंने बेहतर प्रसव करा मातृ-शिशु मृत्यु दर कम करने के तरीके बताए। संस्थागत प्रसव पर जोर दिया। स्किल बर्थ अटेंडेंट (एसबीए) प्रशिक्षण के दौरान सभी को नेशनल रूरल हेल्थ मिशन के मुख्य उद्देश्य और बच्चों की मृत्यु दर को कैसे कम करना है के तरीके बताए। उन्होंने बताया कि अतिकुपोषित गर्भवती की पहचान उसकी हालत देखकर भी आसनी से की जा सकती है। आंख, हाथ-पैर के नाखून में पीलापन, त्वचा व जीभ के रंग से भी कमजोरी का पता लगाया जा सकता है। डीपीएम राकेश पांडेय ने कहा कि यहां अधिकतर महिलाएं एनीमिया का शिकार होती हैं। ऐसी महिलाओं की पहचान आसानी से किया जा सकता है। स्टाफ को चाहिए कि वे गर्भावस्था पूर्व देखभाल के दौरान ही प्रत्येक गर्भवती को पंचरंगी आहार लेने के लिए प्रेरित करें। लाल रंग आहार में टमाटर, चुकंदर, पीले में संतरा, पपीता, सफेद में दूध व अंडा, हरे में मटर समेत हरी सब्जियां, काले में जामुन व खजूर का सेवन किया जाए तो कोई भी गर्भवती कुपोषण का शिकार नहीं होगी। प्रशिक्षण पूरा होने पर नीलम, शीला, अनीता अन्य को प्रमाण पत्र दिया गया। इस दौरान मातृत्व स्वास्थ्य सलाहकार राज कुमार, राकेश पांडेय, दुर्गेश मल्ल, शैलेंद्र राय, यूपीटीएसयू से यशपाल आदि मौजूद रहे।
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सीएमएस डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि गर्भवतियों और बच्चों की मृत्युदर घटाने के लिए सभी स्टाफ नर्सों सहित फीमेल हेल्थ वर्करों को स्किल बर्थ अटेंडेंट का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। सीएचसी-पीएचसी और सब सेंटरों पर तैनात स्टाफ नर्स, सीएचओ व एएनएम को प्रशिक्षित किया गया। उन्होंने बेहतर प्रसव करा मातृ-शिशु मृत्यु दर कम करने के तरीके बताए। संस्थागत प्रसव पर जोर दिया। स्किल बर्थ अटेंडेंट (एसबीए) प्रशिक्षण के दौरान सभी को नेशनल रूरल हेल्थ मिशन के मुख्य उद्देश्य और बच्चों की मृत्यु दर को कैसे कम करना है के तरीके बताए। उन्होंने बताया कि अतिकुपोषित गर्भवती की पहचान उसकी हालत देखकर भी आसनी से की जा सकती है। आंख, हाथ-पैर के नाखून में पीलापन, त्वचा व जीभ के रंग से भी कमजोरी का पता लगाया जा सकता है। डीपीएम राकेश पांडेय ने कहा कि यहां अधिकतर महिलाएं एनीमिया का शिकार होती हैं। ऐसी महिलाओं की पहचान आसानी से किया जा सकता है। स्टाफ को चाहिए कि वे गर्भावस्था पूर्व देखभाल के दौरान ही प्रत्येक गर्भवती को पंचरंगी आहार लेने के लिए प्रेरित करें। लाल रंग आहार में टमाटर, चुकंदर, पीले में संतरा, पपीता, सफेद में दूध व अंडा, हरे में मटर समेत हरी सब्जियां, काले में जामुन व खजूर का सेवन किया जाए तो कोई भी गर्भवती कुपोषण का शिकार नहीं होगी। प्रशिक्षण पूरा होने पर नीलम, शीला, अनीता अन्य को प्रमाण पत्र दिया गया। इस दौरान मातृत्व स्वास्थ्य सलाहकार राज कुमार, राकेश पांडेय, दुर्गेश मल्ल, शैलेंद्र राय, यूपीटीएसयू से यशपाल आदि मौजूद रहे।
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