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Basti News: पूरी रात कब्रिस्तान में की इबादत, गुनाह की मांगी माफी
Mon, 26 Feb 2024 01:08 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Mon, 26 Feb 2024 01:08 AM IST
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नगर बाजार में शब ए बारात पर सजाई गयी मस्जिद
मुस्लिम समुदाय ने मनाया शब-ए-बरात
संवाद न्यूज़ एजेंसी
नगर बाजार (बस्ती)। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में शब-ए-बरात पर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने पूरी रात जागकर अल्लाह की इबादत की और अपने गुनाहों की माफी मांगी। लोगों ने हलवा समेत विभिन्न व्यंजन बनाए और गरीबों में बांटा। इस रात लोग पूर्वजों की कब्र पर गए और उनके लिए दुआ की।
हाफिज शमशुद्दीन निजामी ने कहा कि शब-ए-बरात इबादत, तिलावत और सखावत की रात है। इस दिन अल्लाह की सच्चे मन से इबादत की जाती है। इसके साथ ही, कुरान की आयतें पढ़ीं या सुनी जाती हैं और सखावत यानी दान-पुण्य भी किया जाता है। शब-ए-बरात मुसलमानों के लिए मुकद्दस महीना है। इस दिन मस्जिदों और कब्रिस्तानों को खास तौर पर सजाया जाता है। लोग देर रात तक कब्रिस्तानों में पूर्वजों के लि दुआएं पढ़ते हैं और गुनाहों की माफी मांगते हैं।
इस्लाम में शब-ए-बरात का खास महत्व है। शब-ए-बरात में शब का अर्थ है रात और बरात का अर्थ है बरी होना. यानी रात में गुनाहों से बरी होना। शब-ए-बरात के दिन धरती से रुखसत हो चुके पूर्वजों के लिए परिजन उनकी कब्रों पर जाते हैं और उनके लिए वहां रोशनी करते हैं और कब्र पर गुलाब के फूल चढ़ाते हैं। अगरबत्ती व मोमबत्ती आदि जलाते हैं। फिर दुआएं पढ़ते हैं। मान्यता है कि इस पवित्र रात को अल्लाह अपने चाहने वालों का हिसाब-किताब करते हैं। इसलिए जो भी सच्चे मन से अल्लाह की इबादत करते हैं उनके गुनाहों को माफ कर उनके लिए जन्नत के दरवाजे खोल देते हैं।
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संवाद न्यूज़ एजेंसी
नगर बाजार (बस्ती)। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में शब-ए-बरात पर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने पूरी रात जागकर अल्लाह की इबादत की और अपने गुनाहों की माफी मांगी। लोगों ने हलवा समेत विभिन्न व्यंजन बनाए और गरीबों में बांटा। इस रात लोग पूर्वजों की कब्र पर गए और उनके लिए दुआ की।
हाफिज शमशुद्दीन निजामी ने कहा कि शब-ए-बरात इबादत, तिलावत और सखावत की रात है। इस दिन अल्लाह की सच्चे मन से इबादत की जाती है। इसके साथ ही, कुरान की आयतें पढ़ीं या सुनी जाती हैं और सखावत यानी दान-पुण्य भी किया जाता है। शब-ए-बरात मुसलमानों के लिए मुकद्दस महीना है। इस दिन मस्जिदों और कब्रिस्तानों को खास तौर पर सजाया जाता है। लोग देर रात तक कब्रिस्तानों में पूर्वजों के लि दुआएं पढ़ते हैं और गुनाहों की माफी मांगते हैं।
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इस्लाम में शब-ए-बरात का खास महत्व है। शब-ए-बरात में शब का अर्थ है रात और बरात का अर्थ है बरी होना. यानी रात में गुनाहों से बरी होना। शब-ए-बरात के दिन धरती से रुखसत हो चुके पूर्वजों के लिए परिजन उनकी कब्रों पर जाते हैं और उनके लिए वहां रोशनी करते हैं और कब्र पर गुलाब के फूल चढ़ाते हैं। अगरबत्ती व मोमबत्ती आदि जलाते हैं। फिर दुआएं पढ़ते हैं। मान्यता है कि इस पवित्र रात को अल्लाह अपने चाहने वालों का हिसाब-किताब करते हैं। इसलिए जो भी सच्चे मन से अल्लाह की इबादत करते हैं उनके गुनाहों को माफ कर उनके लिए जन्नत के दरवाजे खोल देते हैं।
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