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पिपरपाती पर खतरा टला
ब्यूरो अमर उजाला/ बस्ती
Updated Sun, 21 Aug 2016 10:53 PM IST
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विक्रमजोत क्षेत्र के कल्याणपुर में हो रही घाघरा से कटान।
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घाघरा का जलस्तर स्थिर है लेकिन कटान रुक रुक कर हो रही है। एक हफ्ते से विक्रमजोत-धुसवा बांध के पिपरपाती बंधे पर चल रहा संकट कुछ कम हुआ लेकिन विक्रमजोत में प्राथमिक विद्यालय कभी भी नदी की धारा में समा सकता है।
कुदरहा प्रतिनिधि के मुताबिक पिपरपाती के10 स्पर क्षतिग्रस्त हुए। बाढ़ खंड कार्य के इंजीनियर और मजदूरों ने अथक प्रयास से बांध को कटने से बचा लिया लेकिन घटती घाघरा से कटान का संकट खत्म नहीं हुआ है। वहीं विक्रमजोत-लोलपुर बांध के पास बसे कल्याणपुर, भरथापुर, सहजौरा पाठक में कटान की हालत यह है कि नदी कि मुख्य धारा गांवों से बिल्कुल सटकर बहने लगी है। बाग-बगीचे से कई पेड़ नदी की धारा में बह चुके हैं। अब गांव का प्राथमिक विद्यालय भवन भी धारा में ढहने के करीब है।
दो माह से नदी ग्रामीणों के दरवाजे के पास से बह रही है। अगर कटान ऐसे होती रही तो गांवों की तबाही आना तय है बाढ़ कार्य खंड के अधिकारी मात्र तीन पुराने ठोकरों को फौरी तौर पर मरम्मत कर तीन गांव को बचाने का दावा कर रहे है । मगर गांव वालों काम मानना है कि ऐसे कटान नही रूकने वाली है। अवर अभियंता ने बताया कि नदी का जलस्तर स्थिर है । जिसमें कटान किनारों पर तेज हो गई है।
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कुदरहा प्रतिनिधि के मुताबिक पिपरपाती के10 स्पर क्षतिग्रस्त हुए। बाढ़ खंड कार्य के इंजीनियर और मजदूरों ने अथक प्रयास से बांध को कटने से बचा लिया लेकिन घटती घाघरा से कटान का संकट खत्म नहीं हुआ है। वहीं विक्रमजोत-लोलपुर बांध के पास बसे कल्याणपुर, भरथापुर, सहजौरा पाठक में कटान की हालत यह है कि नदी कि मुख्य धारा गांवों से बिल्कुल सटकर बहने लगी है। बाग-बगीचे से कई पेड़ नदी की धारा में बह चुके हैं। अब गांव का प्राथमिक विद्यालय भवन भी धारा में ढहने के करीब है।
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दो माह से नदी ग्रामीणों के दरवाजे के पास से बह रही है। अगर कटान ऐसे होती रही तो गांवों की तबाही आना तय है बाढ़ कार्य खंड के अधिकारी मात्र तीन पुराने ठोकरों को फौरी तौर पर मरम्मत कर तीन गांव को बचाने का दावा कर रहे है । मगर गांव वालों काम मानना है कि ऐसे कटान नही रूकने वाली है। अवर अभियंता ने बताया कि नदी का जलस्तर स्थिर है । जिसमें कटान किनारों पर तेज हो गई है।
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