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ऑनलाइन पढ़ाई: सावधानी और जागरुकता से नहीं पड़ेगा विपरीत असर

Wed, 19 Jan 2022 11:54 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 19 Jan 2022 11:54 PM IST
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online Study- carefully and awareness  nesesary
ऑनलाइन पढ़ाई : सावधानी और जागरुकता से नहीं पड़ेगा विपरीत असर
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बस्ती। कोरोना की तीसरी लहर की दस्तक से एक बार फिर बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई शुरू हो गई है। क्लास रूम के बजाय घर पर मोबाइल फोन, कंप्यूटर या लैपटॉप पर बच्चों को शिक्षा दी जा रही है। इसके प्रतिकूल असर भी हैं। इस वजह से बच्चों के साथ-साथ शिक्षकों और माता-पिता की आंखों पर कंप्यूटर स्क्रीन की लाइट का बुरा असर पड़ रहा है।
ऑनलाइन क्लास की वजह से ज्यादा देर तक मोबाइल फोन, लैपटॉप के इस्तेमाल से बच्चों के कई अभिभावक चिंतित भी हैं। जिला अस्पताल के नेत्र सर्जन डॉ. शमीम ने कहा कि मोबाइल और कंप्यूटर की स्क्रीन से निकलने वाली रोशनी आंखों के लिए नुकसानदायक होती है। जैसे नजर का कम होना, दूर का धुंधला दिखाई देना और पास का भी धुंधला दिखाई देना और आंखों में से पानी आना आदि रोशनी कम होने लगती। इसके बचने के लिए जिस कमरे में बच्चे टीवी, कंप्यूटर या फोन चला रहे हैं। वहां पर अच्छी रोशनी होनी चाहिए ताकि आंखों पर दबाव न पड़े। मॉनीटर या स्क्रीन की ब्राइटनेस को मध्यम रखें। अगर आप कम रोशनी में स्क्रीन पर देखते हैं तो इससे आंखों पर ज्यादा बुरा असर पड़ता है और इससे रेटिना के डैमेज होने का खतरा रहता है। बच्चे को 33 सेंटीमीटर के स्मार्टफोन की बजाय 50 सेंटीमीटर की स्क्रीन वाला लैपटॉप या टैबलेट दें। कई बार बच्चे आंखों को स्क्रीन पर गड़ाकर रखते हैं और पलकें झपकाना भूल जाते हैं। इसकी वजह से आंखों से पानी आने, पलके झपकाने का पैटर्न खराब होने और आंखों को मसलने जैसी कुछ समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए कंप्यूटर या स्क्रीन पर देखते समय बच्चों को बीच-बीच में पलकें झपकाना सिखाएं। इससे आंखों पर कम दबाव पड़ता है। थोड़ी-थोड़ी देर में ब्रेक लेते रहें। ये आंखें ही नहीं बल्कि शरीर के लिए भी अच्छा होता है। बच्चों को संतुलित आहार दें। आहार में मौजूद कुछ पोषक तत्व जैसे कि विटामिन ए, विटामिन सी, विटामिन ई, ल्यूटिन, जिएंथिन और ओमेगा फैटी एसिड शरीर के साथ-साथ आंखों के लिए भी बहुत फायदेमंद होते हैं।
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पिकौरा दत्तूराय के विवेक श्रीवास्तव ने बताया कि छोटे बच्चों के लिए ऑनलाइन क्लास होनी ही नहीं चाहिए। बच्चों के अभिभावकों को सिलेबस देना चाहिए और इसे पूरा कराने की जिम्मेदारी भी उनको सौंपी जानी चाहिए। पांचवीं कक्षा तक के बच्चों के लिए ऑनलाइन क्लास नहीं होनी चाहिए। यह केवल दिखावा है जिससे स्कूल अभिभावकों से फीस वसूल सके।
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मड़वानगर के रहने वाले उमेश श्रीवास्तव का कहना है कि उनके दो बच्चे 9वीं और 10वीं कक्षा में हैं। बड़े बच्चों के लिए 30 से 45 मिनट का जो समय तय किया गया है। अगर एक साथ 40 बच्चे क्लास ले रहे हैं तो इतने समय में बच्चे तो केवल अपने प्रश्न ही कर सकते हैं। पढ़ाई का उन्हें कम समय मिलेगा। यहां ऑफलाइन की शिक्षा पद्धति है। जिससे बच्चे हमेश शिक्षक के निगाह में बने रहते है और बच्चों को जल्दी समझ में आता है।

सिविल लाइन के डॉ. कमलेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि ऑनलाइन क्लासेज को लेकर सरकार ने कोई प्रावधान नहीं बनाया। मोबाइल फोन पर पढ़ने से बच्चों की आंखें कमजोर हो रही हैं। स्वभाव में परिवर्तन आ रहा है। अगर कोई छात्र मोबाइल या इंटरनेट की सुविधा नहीं होने के कारण ऑनलाइन क्लास नहीं ले पा रहा है तो उसे परीक्षा में नहीं बैठने दिया जाता।
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