फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Basti News ›   Now the police will tighten the noose on the patient mafia... their horoscopes are being scrutinized.

Basti News: मरीज माफिया पर अब पुलिस कसेगी नकेल...खंगाली जा रही कुंडली

Thu, 12 Mar 2026 01:31 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 12 Mar 2026 01:31 AM IST
विज्ञापन
Now the police will tighten the noose on the patient mafia... their horoscopes are being scrutinized.
बस्ती। अब जुगाड़ से निजी अस्पताल चलाना महंगा पड़ सकता है। ऐसे लोगों पर शिकंजा कसने के लिए पुलिस महकमा अलर्ट हो रहा है। बहुत जल्द पुलिस अपने नए प्लान के तहत मरीज माफियाओं पर नकेल कसने वाली है। बीएमएस, यूनानी चिकित्सक जैसी डिग्री या दूसरों की डिग्री लगाकर खुद सर्जिकल अस्पताल संचालित करने वाले संदिग्धों को रडार पर लेने के लिए स्वास्थ्य विभाग से समन्वय बनाकर पुलिस मैदान में उतरेगी।
विज्ञापन

यह प्लान कोई निचले स्तर पर नहीं तैयार हो रहा है। पुलिस महकमे के उच्च पदस्थ अधिकारियों को विश्वास में लेकर एमबीबीएस की डिग्रीधारक पुलिस कप्तान डॉ. यशवीर सिंह ने खुद यह पहल शुरू की है। मरीज माफियाओं को पूरी तरह खत्म करने के लिए एसपी ने विभाग में कार्यरत तेज पुलिस अफसरों की बाकायदा टीम गठित कर रहे हैं। पुलिस कार्यालय में पहुंचने वाली निजी अस्पतालों से संबंधित गलत ऑपरेशन, लापरवाही पूर्वक इलाज से मरीज के मौत की शिकायतों को संकलित किया जा रहा है।
विज्ञापन

एसपी के निर्देश पर संदिग्ध अस्पतालों की पूरी कुंडली पुलिस खंगालनी शुरू कर दी है। एक दर्जन से अधिक निजी अस्पताल पुलिस के रडार पर आ चुके हैं। स्वास्थ्य विभाग से समन्वय स्थापित कर पुलिस महकमा फर्जी अस्पताल संचालकों पर बहुत जल्द कार्रवाई के तैयारी में हैं। अक्सर निजी अस्पतालों में मरीजों की मौत के बाद लापरवाही से इलाज करने के आरोप में परिजन हंगामा करते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

तत्काल डायल 112 या लोकल थाने की पुलिस मौके पर पहुंचकर विवाद तो शांत करा देती हैं लेकिन, मामला स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा होने के कारण कार्रवाई से पीछे हट जाती है। जिससे बाद में मरीज माफिया स्वास्थ्य महकमे से साठगांठ कर मामला रफा-दफा कर लेते हैं। इससे पीड़ित पक्ष न्याय से वंचित रह जाता है और मरीज माफियाओं के हौसले भी बुलंद रहते हैं। अब पुलिस महकमा मरीज माफियाओं को चिह्नित कर उन्हें खुद कार्रवाई की जद में लाने का पहल करेगा तो धंधेबाजों का मनोबल टूट जाएगा।
------------
साधारण डिग्री पर शल्य चिकित्सा की सुविधा
शहर में कई ऐसे निजी अस्पताल संचालित किए जा रहे हैं जहां संचालकों के पास बीएमएस या साधारण परामर्शदाता की ही डिग्री हैं। इसकी आड़ में बड़े-बड़े नर्सिंग होम बनाकर मरीज भर्ती करने से लेकर शल्य चिकित्सा तक की व्यवस्था बनाई गई है। दिखावे के लिए आर्थो सर्जन, सर्जन, गायनी के नाम का बोर्ड लगाया गया है। ऑपरेशन के समय भाड़े पर चिकित्सक बुलाए जाते हैं। शेष दिन अपनी देखरेख में साधारण चिकित्सक सर्जरी के मरीजों का इलाज कर रहे हैं। शहर के ब्लॉक रोड पर स्वास्थ्य विभाग में तैनात एक साधारण परामर्शदाता की डिग्री लेने वाले चिकित्सक एक बड़े नर्सिंग होम का मालिक बनकर बैठे हैं। संबंधित अस्पताल की ओपीडी में आधा दर्जन चिकित्सकों के नाम के बोर्ड के साथ अलग- अलग कमरे बने हुए हैं। इसमें केवल एक कमरे में नर्सिंग होम के मालिक के रूप में चर्चित स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत संबंधित परामर्शदाता ही हर तरह के मरीज का देखते हुए नजर आते हैं। इसी तरह पचपेड़िया मार्ग, स्टेशन रोड, जिगिना, नारंग रोड समेत ग्रामीण कस्बों में 50 से अधिक जुगाड़ के निजी अस्पताल संचालित हो रहे हैं।
-----------
केस- एक
शहर के पचपेड़िया मार्ग पर संचालित एक निजी नर्सिंग होम में अभी पखवाड़े भर पहले एक महिला की मौत के बाद परिजनों ने जमकर हंगामा काटा। स्थिति नियंत्रित करने के लिए पुरानी बस्ती पुलिस को पहुंचना पड़ा। पुलिस ने आक्रोशित परिजनों को शांत करने के लिए सीएमओ से टीम भेजने की गुजारिश की। इसके बाद परिजन शांत हुए। हालांकि पुलिस के हटने के बाद अस्पताल संचालक की ओर से परिजन और विभाग दोनों को मैनेज कर लिया गया। जिससे चौबीस घंटे के अंदर ही मामले का पटाक्षेप हो गया।
---------
केस- दो
शहर के जिगिना चौराहे पर संचालित एक निजी अस्पताल में छह महीने पहले एक नवजात शिशु की मौत के बाद हंगामा हुआ था। परिजनों का कहना था कि बिना पंजीकरण और योग्य चिकित्सक के ही संबंधित अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में नवजात को भर्ती किया गया था। सप्ताह भर से अधिक समय तक भर्ती रखने के बाद लाखों रुपये बिल वसूला गया। इसके बाद हालत बिगड़ने पर नवजात को गोरखपुर ले जाने को कह दिया गया। रास्ते में नवजात की मौत होने पर परिजन उसका शव लेकर संबंधित अस्पताल पहुंच गए। घंटों हंगामा हुआ। बाद में विभाग और परिजनों से सांठगांठ कर संचालक ने मामले का पटाक्षेप करा लिया।

---------
कोट
फर्जी अस्पतालों से संबंधित शिकायतें लगातार प्राप्त हो रही है। मरीज माफियाओं की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई हैं। पता चल रहा है कि एक ही विषय के चिकित्सक सभी तरह के रोगियों का इलाज कर रहे हैं। इसी लापरवाही के चलते घटनाएं हो रही है। पुलिस स्वास्थ्य विभाग से तालमेल करके बहुत जल्द मरीज माफियाओं के खिलाफ अभियान चलाएगी। यहां तक कि सरकारी अस्पतालों से मरीजों बहलाकर फुसलाकर निजी अस्पताल पहुंचाने वाले एजेंटों को भी चिह्नित करके कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ. यशवीर सिंह, एसपी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed