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अत्याधुनिक सुविधाओं पर उपेक्षा की मार
अमर उजाला ब्यूरो, बस्ती।
Updated Thu, 23 Feb 2017 11:35 PM IST
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बीएसएनएल की अत्याधुनिक सेवाएं उपेक्षा के कारण बदहाल साबित हो रही हैं। यह यूं ही नहीं कहा जा रहा है। जिले में संचार सुविधाओं की हालत पतली है। कभी मोबाइल का नेटवर्क फेल हो रहा है तो कभी इंटरनेट की लाइन में फाल्ट आ जाती है। इसे लेकर हर दिन व्यवसायिक और आम उपभोक्ता शिकायत दर्ज कराते हैं, मगर औपचारिकता निभाकर जिम्मेेदार चुप्पी साध जाते हैं।
मंडल में बीएसएनएल के पौने दो लाख मोबाइल फोन उपभोक्ता हैं। इसके सापेक्ष तीनों जनपदों में 198 बीटीएस स्थापित किए गए हैं। इनके माध्यम से जो सेवाएं दी जा रही हैं वह व्यवस्थित नहीं है। यह निगम के अधिकारी भी स्वीकारते हैं। कहते हैं कि जब तक क्षमता के मुताबिक बीटीएस स्थापित नहीं होंगे, तब तक नेटवर्क की दिक्कत रहेगी। इंटरनेट व ब्राडबैंड की हालत भी ऐसी है। मंडल में 1500 उपभोक्ता हैं। ब्राडबैंड से निगम के साइबर ढाबे भी संचालित होते हैं। यह सेवा शुरूआती दौर से ही धक्का खा रही है।
नेट का उपयोग करने वाले व्यवसायी परेशान
तहसील मार्ग पर साइबर कैफे चलाने वाले पिंटू कहते हैं कि बीएसएनएल के ब्राडबैंड के भरोसे तो व्यवसाय संभव नहीं हो पाएगा। क्योंकि कब तक यह चलेगा, इसका कोई भरोसा नहीं होता। ऐसे में निजी कंपनी की सेवा से भी जुड़े हैं। यह जरूर है कि निगम के मुकाबले अधिक मूल्य अदा करना पड़ता है, मगर बेहतर परिणाम मिलता है। कंप्यूटर विद्यालय संचालक राम बाबू श्रीवास्तव कहते हैं कि तीव्र गति व सबसे महंगी सेवा से जुड़े हैं, मगर हर दिन शिकायत करनी पड़ती है। इसका कोई असर भी नहीं है। ऐेसे में मजबूरी है कि निजी दूरसंचार सेवा से कनेक्शन लिया जाए।
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दूर की जा रहीं समस्याएं
बीएसएनएल के महाप्रबंधक आरके जायसवाल ने कहा कि कुछ तकनीकी कारणों से कभी कभार दिक्कत आती है। पिछले कुछ दिनों से गोरखपुर से आने वाली लाइन में कुछ तकनीकी परेशानी थी। उसे दूर कर दिया गया है। मोबाइल सेवा को बेहतर बनाने का भी प्रयास जारी है, मगर जब तक बीटीएस की संख्या नहीं बढ़ेगी तब तक नेटवर्क की दिक्कत आएगी। डिमांड भेजी गई है। जैसे ही बीटीएस मिल जाएंगे, उसे स्थापित कर समस्या दूर कर ली जाएगी।
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मंडल में बीएसएनएल के पौने दो लाख मोबाइल फोन उपभोक्ता हैं। इसके सापेक्ष तीनों जनपदों में 198 बीटीएस स्थापित किए गए हैं। इनके माध्यम से जो सेवाएं दी जा रही हैं वह व्यवस्थित नहीं है। यह निगम के अधिकारी भी स्वीकारते हैं। कहते हैं कि जब तक क्षमता के मुताबिक बीटीएस स्थापित नहीं होंगे, तब तक नेटवर्क की दिक्कत रहेगी। इंटरनेट व ब्राडबैंड की हालत भी ऐसी है। मंडल में 1500 उपभोक्ता हैं। ब्राडबैंड से निगम के साइबर ढाबे भी संचालित होते हैं। यह सेवा शुरूआती दौर से ही धक्का खा रही है।
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नेट का उपयोग करने वाले व्यवसायी परेशान
तहसील मार्ग पर साइबर कैफे चलाने वाले पिंटू कहते हैं कि बीएसएनएल के ब्राडबैंड के भरोसे तो व्यवसाय संभव नहीं हो पाएगा। क्योंकि कब तक यह चलेगा, इसका कोई भरोसा नहीं होता। ऐसे में निजी कंपनी की सेवा से भी जुड़े हैं। यह जरूर है कि निगम के मुकाबले अधिक मूल्य अदा करना पड़ता है, मगर बेहतर परिणाम मिलता है। कंप्यूटर विद्यालय संचालक राम बाबू श्रीवास्तव कहते हैं कि तीव्र गति व सबसे महंगी सेवा से जुड़े हैं, मगर हर दिन शिकायत करनी पड़ती है। इसका कोई असर भी नहीं है। ऐेसे में मजबूरी है कि निजी दूरसंचार सेवा से कनेक्शन लिया जाए।
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दूर की जा रहीं समस्याएं
बीएसएनएल के महाप्रबंधक आरके जायसवाल ने कहा कि कुछ तकनीकी कारणों से कभी कभार दिक्कत आती है। पिछले कुछ दिनों से गोरखपुर से आने वाली लाइन में कुछ तकनीकी परेशानी थी। उसे दूर कर दिया गया है। मोबाइल सेवा को बेहतर बनाने का भी प्रयास जारी है, मगर जब तक बीटीएस की संख्या नहीं बढ़ेगी तब तक नेटवर्क की दिक्कत आएगी। डिमांड भेजी गई है। जैसे ही बीटीएस मिल जाएंगे, उसे स्थापित कर समस्या दूर कर ली जाएगी।