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मोबाइल फोन ने बेटियों के जीवन को बना दिया नर्क : आचार्य धीरज
Mon, 23 Oct 2023 12:26 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Mon, 23 Oct 2023 12:26 AM IST
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बेटियों को वही सीख दें जो सुनैना ने जानकी को दी थी
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। काशी के व्याकरणाचार्य आचार्य धीरज भाई ने बहादुरपुर ब्लाॅक के प्रतापपुर में चल रही श्रीराम कथा के आठवें दिन रविवार को श्रीराम कोहबर, माता सीता की जनकपुर से विदाई, केवट प्रसंग का मार्मिक वर्णन किया। माता सीता विदाई के समय माता सुनैना की दी हुई सीख का उदाहरण देते हुए आचार्य ने कहा कि अगर बेटी का सुख चाहती हो तो वही शिक्षा दो जो सुनैना ने मां जानकी को दी थी। आचार्य ने कहा कि आजकल मोबाइल फोन ने बेटियों के जीवन को नर्क बना दिया है।
पंडाल में उपस्थित माताओं को प्रेरित किया कि उन्हें भी वैसी ही सीख देकर अपनी बेटी को विदा करना चाहिए। कहा कि बेटियों की ससुराल में कम से कम दखल होनी चाहिए। बेटियों को भी चाहिए कि ससुराल की छोटी-छोटी बात की मायके में चर्चा न करें। मुख्य यजमान अजीत सिंह, प्रधान पिंकी सिंह, उपाध्यक्ष नरेंद्र पांडेय एडवोकेट, कोषाध्यक्ष इंद्रजीत सिंह आदि ने व्यासपीठ का पूजन किया।
इससे पहले आचार्य ने शनिवार के कथा प्रसंग से जोड़ते हुए सीता-राम विवाह की कथा का स्पर्श किया। कहा कि जब मंडप में श्रीराम और सियाजी का विवाह होने लगा तो सबने विचार किया कि राजा जनक की तीन बेटियां और दशरथ के तीन और बेटों का भी विवाह कर दिया जाए। सबकी सहमति बनी और फिर चारों भइयों और चारों बहनों का विवाह हुआ।
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बस्ती। काशी के व्याकरणाचार्य आचार्य धीरज भाई ने बहादुरपुर ब्लाॅक के प्रतापपुर में चल रही श्रीराम कथा के आठवें दिन रविवार को श्रीराम कोहबर, माता सीता की जनकपुर से विदाई, केवट प्रसंग का मार्मिक वर्णन किया। माता सीता विदाई के समय माता सुनैना की दी हुई सीख का उदाहरण देते हुए आचार्य ने कहा कि अगर बेटी का सुख चाहती हो तो वही शिक्षा दो जो सुनैना ने मां जानकी को दी थी। आचार्य ने कहा कि आजकल मोबाइल फोन ने बेटियों के जीवन को नर्क बना दिया है।
पंडाल में उपस्थित माताओं को प्रेरित किया कि उन्हें भी वैसी ही सीख देकर अपनी बेटी को विदा करना चाहिए। कहा कि बेटियों की ससुराल में कम से कम दखल होनी चाहिए। बेटियों को भी चाहिए कि ससुराल की छोटी-छोटी बात की मायके में चर्चा न करें। मुख्य यजमान अजीत सिंह, प्रधान पिंकी सिंह, उपाध्यक्ष नरेंद्र पांडेय एडवोकेट, कोषाध्यक्ष इंद्रजीत सिंह आदि ने व्यासपीठ का पूजन किया।
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इससे पहले आचार्य ने शनिवार के कथा प्रसंग से जोड़ते हुए सीता-राम विवाह की कथा का स्पर्श किया। कहा कि जब मंडप में श्रीराम और सियाजी का विवाह होने लगा तो सबने विचार किया कि राजा जनक की तीन बेटियां और दशरथ के तीन और बेटों का भी विवाह कर दिया जाए। सबकी सहमति बनी और फिर चारों भइयों और चारों बहनों का विवाह हुआ।
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