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Basti News: अबकी बार नवरात्र में हाथी पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा
Wed, 11 Oct 2023 12:47 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Wed, 11 Oct 2023 12:47 AM IST
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23 अक्तूबर को कन्याओं का पूजन और हवन
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। शारदीय नवरात्र की शुरुआत 15 अक्तूबर से हो रही है। जबकि समापन 23 अक्तूबर को होगा। कलश स्थापना के साथ श्रद्धालु नौ दिनों तक व्रत और पूजा-अर्चना से माता को प्रसन्न करेंगे। मान्यता के अनुसार, यदि नवरात्र सोमवार या रविवार से शुरू हो तो मां दुर्गा का वाहन हाथी होता है। इस बार माता का आगमन हाथी पर हो रहा है ये अधिक वर्षा का संकेत देता है। इसे समृद्धि का सूचक माना जाता है। वहीं, माता का गमन मुर्गा पर होगा, जो रोग की वृद्धि करने वाला होगा।
पं. भरथाचार्य पाठक के अनुसार, 15 अक्तूबर को अश्विन मास प्रतिपदा तिथि का मान संपूर्ण दिन और रात 11:52 बजे तक है। चित्रा नक्षत्र 6:43 बजे तक, वैधृति योग भी दिन में 11:55 बजे तक है। कलश स्थापना के लिए अभिजित मुहूर्त सर्वोत्तम रहेगा। इस दिन अभिजित मुहूर्त सुबह 11:38 से 12:23 बजे तक है। इसके अलावा सुबह 6:16 से शाम 5:44 बजे के बीच कभी भी किया जा सकता है।
नवरात्र में प्रारंभ के दिन के अलावा सप्तमी, अष्टमी और नवमी का भी विशेष महत्व है। सप्तमी की रात्रि में अष्टमी का योग होने से इसी दिन महानिशा पूजा किया जाएगा। महाष्टमी तिथि को देवी के निमित्त व्रत और सविधि पूजन किया जाता है। महानवमी के दिन पूजन और व्रत की परिपूर्ति के लिए हवन इत्यादि कर समापन किया जाता है।
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21 को महानिशा पूजा, 23 को होगा कन्या पूजन
शारदीय नवरात्र की सप्तमी तिथि 21 अक्तूबर को है। इस दिन सप्तमी तिथि का मान शाम 7:27 बजे तक है। इसके बाद अष्टमी लग जाएगी। अर्धरात्रि में अष्टमी होने से महानिशा पूजन और देवी के निमित्त बलिदानादिक क्रिया इसी दिन संपन्न होगी। महा अष्टमी 22 अक्तूबर को है। इस दिन अष्टमी तिथि का मान शाम 5:25 बजे तक है इसके बाद नवमी तिथि है, जो श्रद्धालु अंतिम दिन व्रत और पूजन करते हैं, वह इसी दिन व्रत करेंगे। महानवमी 23 अक्तूबर को है। इस दिन नवमी तिथि का मान दोपहर 3:10 बजे तक है। इस दिन कन्याओं का पूजन व हवन किया जाएगा, जो व्यक्ति पूरे नवरात्र में उपवास और व्रत नहीं कर पाते हैं, वह नवरात्र के आदि में अथवा अंतिम दिन व्रत करते हैं। नौ दिन व्रत रखने वाले 22 अक्तूबर को व्रत का पारण करेंगे। दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन भी इसी दिन होगा।
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शारदीय नवरात्र का कार्यक्रम
15 अक्तूबर- मां शैलपुत्री पूजा व घट स्थापना
16 अक्तूबर- मां ब्रह्मचारिणी पूजा
17 अक्तूबर- मां चंद्रघंटा पूजा
18 अक्तूबर- मां कुष्मांडा पूजा
19 अक्तूबर- मां स्कंदमाता पूजा
20 अक्तूबर- मां कात्यायनी पूजा
21 अक्तूबर- मां कालरात्रि पूजा
22 अक्तूबर- मां महागौरी पूजा
23 अक्तूबर- मां सिद्धिदात्री पूजा
24 अक्तूबर- विजय दशमी
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संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। शारदीय नवरात्र की शुरुआत 15 अक्तूबर से हो रही है। जबकि समापन 23 अक्तूबर को होगा। कलश स्थापना के साथ श्रद्धालु नौ दिनों तक व्रत और पूजा-अर्चना से माता को प्रसन्न करेंगे। मान्यता के अनुसार, यदि नवरात्र सोमवार या रविवार से शुरू हो तो मां दुर्गा का वाहन हाथी होता है। इस बार माता का आगमन हाथी पर हो रहा है ये अधिक वर्षा का संकेत देता है। इसे समृद्धि का सूचक माना जाता है। वहीं, माता का गमन मुर्गा पर होगा, जो रोग की वृद्धि करने वाला होगा।
पं. भरथाचार्य पाठक के अनुसार, 15 अक्तूबर को अश्विन मास प्रतिपदा तिथि का मान संपूर्ण दिन और रात 11:52 बजे तक है। चित्रा नक्षत्र 6:43 बजे तक, वैधृति योग भी दिन में 11:55 बजे तक है। कलश स्थापना के लिए अभिजित मुहूर्त सर्वोत्तम रहेगा। इस दिन अभिजित मुहूर्त सुबह 11:38 से 12:23 बजे तक है। इसके अलावा सुबह 6:16 से शाम 5:44 बजे के बीच कभी भी किया जा सकता है।
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नवरात्र में प्रारंभ के दिन के अलावा सप्तमी, अष्टमी और नवमी का भी विशेष महत्व है। सप्तमी की रात्रि में अष्टमी का योग होने से इसी दिन महानिशा पूजा किया जाएगा। महाष्टमी तिथि को देवी के निमित्त व्रत और सविधि पूजन किया जाता है। महानवमी के दिन पूजन और व्रत की परिपूर्ति के लिए हवन इत्यादि कर समापन किया जाता है।
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21 को महानिशा पूजा, 23 को होगा कन्या पूजन
शारदीय नवरात्र की सप्तमी तिथि 21 अक्तूबर को है। इस दिन सप्तमी तिथि का मान शाम 7:27 बजे तक है। इसके बाद अष्टमी लग जाएगी। अर्धरात्रि में अष्टमी होने से महानिशा पूजन और देवी के निमित्त बलिदानादिक क्रिया इसी दिन संपन्न होगी। महा अष्टमी 22 अक्तूबर को है। इस दिन अष्टमी तिथि का मान शाम 5:25 बजे तक है इसके बाद नवमी तिथि है, जो श्रद्धालु अंतिम दिन व्रत और पूजन करते हैं, वह इसी दिन व्रत करेंगे। महानवमी 23 अक्तूबर को है। इस दिन नवमी तिथि का मान दोपहर 3:10 बजे तक है। इस दिन कन्याओं का पूजन व हवन किया जाएगा, जो व्यक्ति पूरे नवरात्र में उपवास और व्रत नहीं कर पाते हैं, वह नवरात्र के आदि में अथवा अंतिम दिन व्रत करते हैं। नौ दिन व्रत रखने वाले 22 अक्तूबर को व्रत का पारण करेंगे। दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन भी इसी दिन होगा।
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शारदीय नवरात्र का कार्यक्रम
15 अक्तूबर- मां शैलपुत्री पूजा व घट स्थापना
16 अक्तूबर- मां ब्रह्मचारिणी पूजा
17 अक्तूबर- मां चंद्रघंटा पूजा
18 अक्तूबर- मां कुष्मांडा पूजा
19 अक्तूबर- मां स्कंदमाता पूजा
20 अक्तूबर- मां कात्यायनी पूजा
21 अक्तूबर- मां कालरात्रि पूजा
22 अक्तूबर- मां महागौरी पूजा
23 अक्तूबर- मां सिद्धिदात्री पूजा
24 अक्तूबर- विजय दशमी