{"_id":"6797dd567beb570568035efa","slug":"life-imprisonment-to-dismissed-constable-in-priest-murder-case-22-years-ago-basti-news-c-207-1-sgkp1006-131115-2025-01-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"Basti News: 22 वर्ष पूर्व पुजारी हत्याकांड में बर्खास्त सिपाही को उम्रकैद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Basti News: 22 वर्ष पूर्व पुजारी हत्याकांड में बर्खास्त सिपाही को उम्रकैद
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी एक्ट कमलेश कुमार की अदालत ने रविदास मंदिर के पुजारी की हत्या के 22 साल पुराने मामले में एफआईआर कराने वाले बर्खास्त सिपाही को ही अपराधी मानते हुए आजीवन कारावास व 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड न अदा करने पर तीन माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी पड़ेगी।
संतकबीरनगर जनपद के मेंहदावल थाना क्षेत्र के सुनिहवा गांव रविदास मंदिर के बुजुर्ग पुजारी संत तुलसीदास इसी गांव के रहने वाले थे। वह रविदास मंदिर बनवाकर वहां पूजा अर्चना करने लगे। 27-28 फरवरी 2003 को उनकी कुटी पर चाकू से गोदकर हत्या कर दी गई।
इसी गांव के उदय राज ने यह कहते हुए थाने में केस दर्ज कराया। तहरीर में कहा कि कुबेरनाथ मंदिर मेंहदावल के पुजारी नागा बाबा से तुलसीदास की दुश्मनी थी। उन्होंने ही तुलसीदास की हत्या की है। पुलिस ने जब विवेचना शुरू की तो पूरी कहानी ही बदल गई।
विज्ञापन
असल में संत तुलसीदास के पास कुछ जमीन थी, जिसे बेचकर वह रविदास मंदिर में ही लगाना चाहते थे। उनके पट्टीदार उदय राज चेला बनकर मुफ्त में तुलसीदास की जमीन लेना चाहता था।
यहां तक कि उन्हें धमका कर मंदिर से भी कुछ रुपया ले लिया करता था, और जमीन की लालच में ही अपने साथी राम कृपाल के साथ संत तुलसीदास की हत्या कर दी।
केस को उलझाने के लिए नागा बाबा को आरोपित करते हुए खुद वादी बनकर मुकदमा लिखा दिया। विवेचना से उसकी संलिप्तता जाहिर हो गई और पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किया। मुकदमा के दौरान उदय राज के साथी राम कृपाल की मृत्यु हो गई। दोनों पक्ष की बहस सुनने के बाद अदालत ने संत की हत्या के लिए बर्खास्त सिपाही उदय राज को दोषी मानते हुए सजा सुनाई है।न
विज्ञापन
बस्ती। विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी एक्ट कमलेश कुमार की अदालत ने रविदास मंदिर के पुजारी की हत्या के 22 साल पुराने मामले में एफआईआर कराने वाले बर्खास्त सिपाही को ही अपराधी मानते हुए आजीवन कारावास व 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड न अदा करने पर तीन माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी पड़ेगी।
संतकबीरनगर जनपद के मेंहदावल थाना क्षेत्र के सुनिहवा गांव रविदास मंदिर के बुजुर्ग पुजारी संत तुलसीदास इसी गांव के रहने वाले थे। वह रविदास मंदिर बनवाकर वहां पूजा अर्चना करने लगे। 27-28 फरवरी 2003 को उनकी कुटी पर चाकू से गोदकर हत्या कर दी गई।
विज्ञापन
इसी गांव के उदय राज ने यह कहते हुए थाने में केस दर्ज कराया। तहरीर में कहा कि कुबेरनाथ मंदिर मेंहदावल के पुजारी नागा बाबा से तुलसीदास की दुश्मनी थी। उन्होंने ही तुलसीदास की हत्या की है। पुलिस ने जब विवेचना शुरू की तो पूरी कहानी ही बदल गई।
विज्ञापन
असल में संत तुलसीदास के पास कुछ जमीन थी, जिसे बेचकर वह रविदास मंदिर में ही लगाना चाहते थे। उनके पट्टीदार उदय राज चेला बनकर मुफ्त में तुलसीदास की जमीन लेना चाहता था।
यहां तक कि उन्हें धमका कर मंदिर से भी कुछ रुपया ले लिया करता था, और जमीन की लालच में ही अपने साथी राम कृपाल के साथ संत तुलसीदास की हत्या कर दी।
केस को उलझाने के लिए नागा बाबा को आरोपित करते हुए खुद वादी बनकर मुकदमा लिखा दिया। विवेचना से उसकी संलिप्तता जाहिर हो गई और पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किया। मुकदमा के दौरान उदय राज के साथी राम कृपाल की मृत्यु हो गई। दोनों पक्ष की बहस सुनने के बाद अदालत ने संत की हत्या के लिए बर्खास्त सिपाही उदय राज को दोषी मानते हुए सजा सुनाई है।न