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कार्यों की अधिकता को लेकर लेखपालों ने किया विरोध
basti
Updated Tue, 09 Jan 2018 11:52 PM IST
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ज्ञपन सौंपते लेखपाल।
- फोटो : amar ujala
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कार्यों की अधिकता और अधिकारियों के उत्पीड़न के विरोध में उत्तर-प्रदेश लेखपाल संघ की ओर से मंगलवार को सदर तहसील परिसर में तहसील अध्यक्ष अशोक कुमार तिवारी की अध्यक्षता में बैठक हुई। संचालन तहसील मंत्री धमेंद्र कुमार ने किया।
पूर्व मंडलीय मंत्री नरेंद्र बहादुर उपाध्याय ने कहा कि वर्तमान में लेखपालों पर कार्य का भारी बोझ है, शासन और राजस्व परिषद की ओ से एंटी-भूमाफिया, सीमाद्योतक चिह्न की कोडिंग, किसान ऋण मोचन, वरासत अभियान एवं खतौनियों में अंश निर्धारण सहित अन्य कार्यक्रम एक साथ चलाए जा रहे हैं। सभी के लिए समय निर्धारित है। कहा कि एक साथ इतनी सारी योजनाओं में अगर किसी कारण कोई कमी रह जाती है तो अधिकारी लेखपालों का उत्पीड़न करते हैं। इतना ही जो कार्य राजस्व अधिकारियों का है उसे भी लेखपालों पर करने के लिए दबाव बनाया जाता है, इनमें अवैध कब्जा हटाने का प्रमुख कार्य है, जिसके अधिकारी दबवा बनाते हैं, जबकि यह कार्य अफसरों के जिम्मे है। इसके चलते कई बार लेखपाल के साथ मारपीट तक की घटना हो चुकी है। चंदौली में इसे लेकर एक लेखपाल की हत्या तक हो चुकी है। तहसील अध्यक्ष अशोक कुमार तिवारी ने कहा कि शासन और परिषद की ओर से जो एक साथ कई कार्य कराए जा रहे हैं, उससे लेखपालों में भय व्याप्त है। तहसील मंत्री धर्मेंद्र ने कहा कि सरकार लेखपालों की मंागों को लेकर चुप्पी साधे हुए है। अन्य विभागों के कार्य भी लेखपालों से कराए जा रहे हैं।
बैठक के बाद सीएम के नाम एसडीएम हरिश्चंद्र सिंह को दस सूत्री मांग-पत्र भी दिया गया। इस मौके पर सुखबीर सिंह, कमलभान पांडेय, हिमांशु सिंह, सुशील चौबे, विकास पाल, जियालाल, धीरेंद्र सिंह, दीपक सिंह, जुगुल किशोर वर्मा, विनोद गुप्त, राजेश सिंह, गंगा प्रसाद श्रीवास्तव, अजय कुुमार वर्मा, राजकुमार कन्नौजिया, शंकर, रमेश चंद्र श्रीवास्तव, अरुण कपूर, वरुणेंद्र शुक्ल सहित अन्य लेखपाल मौजूद रहे।
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कार्यों की अधिकता और अधिकारियों के उत्पीड़न के विरोध में उत्तर-प्रदेश लेखपाल संघ की ओर से मंगलवार को सदर तहसील परिसर में तहसील अध्यक्ष अशोक कुमार तिवारी की अध्यक्षता में बैठक हुई। संचालन तहसील मंत्री धमेंद्र कुमार ने किया।
पूर्व मंडलीय मंत्री नरेंद्र बहादुर उपाध्याय ने कहा कि वर्तमान में लेखपालों पर कार्य का भारी बोझ है, शासन और राजस्व परिषद की ओ से एंटी-भूमाफिया, सीमाद्योतक चिह्न की कोडिंग, किसान ऋण मोचन, वरासत अभियान एवं खतौनियों में अंश निर्धारण सहित अन्य कार्यक्रम एक साथ चलाए जा रहे हैं। सभी के लिए समय निर्धारित है। कहा कि एक साथ इतनी सारी योजनाओं में अगर किसी कारण कोई कमी रह जाती है तो अधिकारी लेखपालों का उत्पीड़न करते हैं। इतना ही जो कार्य राजस्व अधिकारियों का है उसे भी लेखपालों पर करने के लिए दबाव बनाया जाता है, इनमें अवैध कब्जा हटाने का प्रमुख कार्य है, जिसके अधिकारी दबवा बनाते हैं, जबकि यह कार्य अफसरों के जिम्मे है। इसके चलते कई बार लेखपाल के साथ मारपीट तक की घटना हो चुकी है। चंदौली में इसे लेकर एक लेखपाल की हत्या तक हो चुकी है। तहसील अध्यक्ष अशोक कुमार तिवारी ने कहा कि शासन और परिषद की ओर से जो एक साथ कई कार्य कराए जा रहे हैं, उससे लेखपालों में भय व्याप्त है। तहसील मंत्री धर्मेंद्र ने कहा कि सरकार लेखपालों की मंागों को लेकर चुप्पी साधे हुए है। अन्य विभागों के कार्य भी लेखपालों से कराए जा रहे हैं।
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बैठक के बाद सीएम के नाम एसडीएम हरिश्चंद्र सिंह को दस सूत्री मांग-पत्र भी दिया गया। इस मौके पर सुखबीर सिंह, कमलभान पांडेय, हिमांशु सिंह, सुशील चौबे, विकास पाल, जियालाल, धीरेंद्र सिंह, दीपक सिंह, जुगुल किशोर वर्मा, विनोद गुप्त, राजेश सिंह, गंगा प्रसाद श्रीवास्तव, अजय कुुमार वर्मा, राजकुमार कन्नौजिया, शंकर, रमेश चंद्र श्रीवास्तव, अरुण कपूर, वरुणेंद्र शुक्ल सहित अन्य लेखपाल मौजूद रहे।
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