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जिले में डायरिया का प्रकोप
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 04 Jun 2016 12:20 AM IST
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इलाज कराने के लिए लगी भीड़।
- फोटो : रमेश मिश्र
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बस्ती। मासूम बच्चों की मुस्कान पर डायरिया कहर बरपा रही है। उल्टी-दस्त से बेहाल डेढ़ सौ बच्चे अकेले जिला अस्पताल में भर्ती हैं। इससे बड़ी तादाद में बच्चे निजी अस्पताल-नर्सिंग होम और बेबी केयर सेंटरों में इलाज करा रहे हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि बदलते मौसम में बीमारियों के वायरस ज्यादा तेजी से फैल रहे हैं। ऐसे में जरा भी लापरवाही बच्चे को बीमार बना रही है।
गोविंदपारा निवासी स्नेहा, जीवापुर निवासी सक्षम, नेवारी लालगंज निवासी अवनीश, के अलावा डुमरियागंज की इलमा, बैड़ा बाजार डुमरियागंज की अनीता, कलवारी के शनी, जरीना, आशी त्रिपाठी, कलवारी के हिमांशु, मूड़ाडीहा की नाजिया जैसे सौ से अधिक बच्चे जिला अस्पताल के चिल्ड्रेन वार्ड में भर्ती हैं। इनमें सबसे ज्यादा संख्या डायरिया यानी उल्टी-दस्त के मरीजों की है। इनके परिवार वाले बताते हैं कि अचानक उल्टी-दस्त शुरू हो गई। घरेलू इलाज के जब फायदा नहीं हुआ तो अस्पताल ले गए।
वार्ड के राउंड पर निकले बाल रोग विशेषज्ञ डा. पीके चौधरी ने बताया कि यह सभी बच्चे मौसमी बीमारियों से ग्रसित हैं। बताए कि रोजाना 50-60 नए बच्चे भर्ती हो रहे हैं, और इतने ही स्वस्थ होकर डिस्चार्ज भी किए जा रहे हैं।
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बच्चों के वार्ड में बड़ों का दम घुट रहा
क्टर सलाह देते हैं कि बच्चों को खुले और हवादार कमरे में रखना चाहिए, मगर यह सलाह देने वाले ही इसे हवा में उड़ा रहा है। चिल्ड्रेन वार्ड में ऐसा ही माहौल रहता है कि वहां बच्चे तो दूर बड़ों का दम घुट जाए। शुक्रवार को जिला अस्पताल के चिल्ड्रेन वार्ड की हकीकत देखने पहुंची तो हाल से लेकर सभी वार्ड मरीज व तीमारदारों से भरे थे। पूरे चिल्ड्रेन वार्ड का कैंपस आईसीयू और फोटो थेरेपी यूनिट समेत कुल 60 मरीजों के बेड पर डेढ़ सौ मरीज भर्ती मिले। एक बेड पर कहीं दो तो कहीं तीन बच्चे भर्ती हैं।
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गोविंदपारा निवासी स्नेहा, जीवापुर निवासी सक्षम, नेवारी लालगंज निवासी अवनीश, के अलावा डुमरियागंज की इलमा, बैड़ा बाजार डुमरियागंज की अनीता, कलवारी के शनी, जरीना, आशी त्रिपाठी, कलवारी के हिमांशु, मूड़ाडीहा की नाजिया जैसे सौ से अधिक बच्चे जिला अस्पताल के चिल्ड्रेन वार्ड में भर्ती हैं। इनमें सबसे ज्यादा संख्या डायरिया यानी उल्टी-दस्त के मरीजों की है। इनके परिवार वाले बताते हैं कि अचानक उल्टी-दस्त शुरू हो गई। घरेलू इलाज के जब फायदा नहीं हुआ तो अस्पताल ले गए।
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वार्ड के राउंड पर निकले बाल रोग विशेषज्ञ डा. पीके चौधरी ने बताया कि यह सभी बच्चे मौसमी बीमारियों से ग्रसित हैं। बताए कि रोजाना 50-60 नए बच्चे भर्ती हो रहे हैं, और इतने ही स्वस्थ होकर डिस्चार्ज भी किए जा रहे हैं।
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बच्चों के वार्ड में बड़ों का दम घुट रहा
क्टर सलाह देते हैं कि बच्चों को खुले और हवादार कमरे में रखना चाहिए, मगर यह सलाह देने वाले ही इसे हवा में उड़ा रहा है। चिल्ड्रेन वार्ड में ऐसा ही माहौल रहता है कि वहां बच्चे तो दूर बड़ों का दम घुट जाए। शुक्रवार को जिला अस्पताल के चिल्ड्रेन वार्ड की हकीकत देखने पहुंची तो हाल से लेकर सभी वार्ड मरीज व तीमारदारों से भरे थे। पूरे चिल्ड्रेन वार्ड का कैंपस आईसीयू और फोटो थेरेपी यूनिट समेत कुल 60 मरीजों के बेड पर डेढ़ सौ मरीज भर्ती मिले। एक बेड पर कहीं दो तो कहीं तीन बच्चे भर्ती हैं।