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Basti News: भूमिगत जल का अंधाधुंध दोहन, प्रतिवर्ष घट रहा एक फीट जलस्तर

Wed, 28 Feb 2024 01:20 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती Updated Wed, 28 Feb 2024 01:20 AM IST
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Indiscriminate exploitation of underground water, water level decreasing by one foot every year
- कागजी कोरम पूरा करने के लिए तैयार किया गया है जलदूत और भू-जल सेना संगठन
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- आरओ प्लांट, पंपिंग सेट और गाड़ी धुलाई सेंटरों पर हो रहा भूमिगत जल का दोहन
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। भूमिगत जल के अंधाधुंध व अनियंत्रित दोहन के चलते जिले में भूजल पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। सतही जल की कमी के कारण भूमिगत जल पर निर्भरता बढ़ रही है। वर्तमान में ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल का 90 प्रतिशत भाग व सिंचाई का 40 प्रतिशत भाग भूजल से ही प्राप्त हो रहा है। केंद्रीय ग्राउंड वाटर बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक जिले में गिरता भूजल चिंता का विषय है। इस बार गर्मी में जलस्तर घटने के आसार बढ़ गए हैं।
वर्ष 2022 में जिले का भूजल स्तर 6.02 एमबीजीएल (मीटर बिलो ग्राउंड वाटर लेबल) था। यह घटकर और नीचे खिसक गया है। इस वर्ष भूजल स्तर 6.32 एमबीजीएल पर पहुंच गया है। प्रतिवर्ष लगभग 30 सेंटीमीटर यानी 1 फीट भूजल स्तर में गिरावट दर्ज की जा रही है। भूगर्भ जल विभाग इससे बेखबर बना हुआ है। महज कागजी औपचारिकताएं पूरी कर कर्तव्यों की इतिश्री की जा रही है। इसका खामियाजा आने वाले समय में आमजन को भुगतना पड़ सकता है। जागरूकता के नाम पर महज कागजों में ही भूजल सेना और जलदूत सक्रिय हैं। इसके अलावा जिला भूगर्भ जल प्रबंधन परिषद भी लगभग फाइलों में कैद है।
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भू-जल सेना क्या है

उत्तर प्रदेश भूगर्भ जल (प्रबंधन और विनियमन) अधिनियम, 2019 के अंतर्गत ऐसे गठित व्यक्तियों का समूह है जिसमें विविध क्षेत्रों के कम से कम 50 सदस्य शामिल होते हैं। जिनका दायित्व होता है कि अतिशय भूगर्भ जल निष्कर्ष और जल प्रदूषण को कम करने के उद्देश्य से पदयात्रा, रैलियों, लघु गोष्ठ, संवाद के माध्यम से स्कूल, कॉलेज, पंचायत, आवासीय कालोनियों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों में भूजल चेतना जागृत करें। भूजल सेवा के कार्यकलापों के संचालन हेतु प्रचार-प्रसार व अन्य व्यवस्था खंडीय अधिकारी से आवंटित बजट के माध्यम से की जाती है।
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करोड़ों खर्च के बाद भी परिणाम सकारात्मक नहीं
विगत 5 वर्षों में भूजल स्तर के सुधार के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर दिए गए, फिर भी परिणाम सकारात्मक नहीं आए। जिले की भूजल सेना और जलदूत पूरी तरह से निष्क्रिय रहे हैं। यह संगठन महज कागजी कोरम पूरा करने के लिए हैं। जिले में लगातार अवैध रूप से वाटर आरो प्लांट चलाए जा रहे हैं। जिनकी न तो पानी की गुणवत्ता की जांच विभाग से की जाती है और न ही इनके संचालन पर किसी प्रकार की कोई कार्रवाई की जाती है। इसके अलावा जिले में सैकड़ों गाड़ी धुलाई केंद्र संचालित हो रहे हैं जिससे लाखों घन मीटर भूजल का दोहन हो रहा है। अवैध रूप गांवों में जहां जिसका मन आया वहां ड्रिल करके पंपिंग सेट लगवा लिया। विभाग की ओर से कोई एनओसी नहीं जारी की गई।

बेरोकटोक लग रहा सबमर्सिबल
नई कालोनियों और नए आबादी वाले क्षेत्र में तेजी के साथ सबमर्सिबल लगवाए जा रहे हैं। ढाई सौ से तीन फीट गहराई तक चार इंच परिधि की बोरिंग करके बड़े पैमाने पर जल निकाले जा रहे हैं। विभाग इस पर रोकथाम के लिए कोई पहल नहीं कर रहा है। बेरोकटोक नई कालोनियों में सबमर्सिबल कराया जा रहा है। जिससे जलदोहन का ग्राफ बढ़ता जा रहा है।

भूजल दोहन के क्या हैं नियम
उत्तर प्रदेश भूगर्भ जल (प्रबंधन और विनियमन) अधिनियम, 2019 के अधीन यदि कोई वाणिज्यिक, औद्योगिक या सामूहिक भूगर्भ जल उपभोक्ता बगैर रजिस्ट्रीकरण के भूगर्भ जल निकालते पाया जाता है तो उसे दंडित किया जाएगा। कोई भी व्यक्ति नियत सीमा का उल्लंघन करके भूगर्भ जल नहीं निकाल सकता है। धारा 17 (1) के अनुसार कोई व्यक्ति बगैर भूगर्भ जल प्रबंधन परिषद के रजिस्ट्रीकरण और आदेश के बिना भूगर्भ जल निकालने हेतु भूमि का न भेदन करेगा ना ही जल निष्क्रमण करेगा। इस पर दंड का भी प्रावधान है।



भूगर्भ जल विभाग के क्या हैं दायित्व
भूगर्भ जल प्रबंधन परिषद के माध्यम से समुचित निकाय नगरीय क्षेत्रों और ग्रामीण क्षेत्र हेतु भूगर्भ जल प्रबंधन समिति के साथ समन्वय स्थापित करके क्रियाविधि विकसित करेगा। पिछले पांच वर्षों में जिस भी एरिया में प्रतिवर्ष 20 सेंटीमीटर भूजल ह्रास हुआ है वहां भूगर्भ जल के समग्र प्रबंधन का कार्य निर्धारित करेगा। भूगर्भ जल सूचना आंकड़ों को संग्रह करेगा। भूजल सेना और जलदूतों के साथ समन्वय स्थापित करके अतिशय भूगर्भ जल निष्कर्षण और भूगर्भ जल दोहन को कम करने में सहयोग प्रदान करेगा।

बारिश के जल को संचित करने के लिए लोगों को जागरूक करने की जरूरत
भूगर्भ जल विशेषज्ञ डॉ. रोहित सिंह के मुताबिक भूजल संकट की त्रासदी बारिश के जल के पूर्ण संरक्षण व संचित उपयोग नहीं होने की वजह से बढ़ती जा रही है। इसके लिए सार्वजनिक स्तर पर जनजागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता प्रतीत होती है। भूमिगत जल के अत्यधिक दोहन से भूजल में हानिकारक व विषैले तत्वों और फ्लोराइड नाइट्रेट आर्सेनिक वाले तत्वों की मात्रा स्वीकार सीमा से अधिक होने पर इस जल की पेयता पर प्रश्न खड़ा कर रहा है। मानव व पशुओं की प्यास बुझाने व उनकी जल की आवश्यकता को पूर्ण करने में बावली, झीलों जैसे जल स्रोतों का योगदान सराहनीय रहा है। इन्हें संरक्षित किए जाने की आवश्यकता है।


समरसेबल के लिए पंजीकरण कराया जा सकता है। लेकिन इसका कोई शुल्क नहीं है। दस हजार लीटर तक जल उपयोग करने वाली संस्थाओं के लिए पंजीकरण अनिवार्य है और इससे अधिक जल उपयोग के लिए एनओसी लेना अनिवार्य है। विभाग जल दोहन करने वालों के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रहा है।
- शिप्रा चौबे, अभियंता, भूगर्भ जल
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