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Basti News: भारतीय सरसों चला नेपाल, प्रति क्विंटल 2000 का मुनाफा
Wed, 10 Apr 2024 01:22 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Wed, 10 Apr 2024 01:22 AM IST
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-अब नेपाली तेल कंपनियों ने तिलहन का स्टॉक किया शुरू, बढ़ी तस्करी
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। तस्करों ने अब सरसों को नेपाल पहुंचाना शुरू कर दिया है। प्रति क्विंटल करीब 2000 से 3000 रुपये का मुनाफा होता है। नेपाल के तराई इलाके में ओलावृष्टि से तिलहन की फसल प्रभावित हुई है। तस्कर इसका फायदा उठा रहे हैं।
सूत्र बताते हैं कि भारत-नेपाल सीमा पर तस्कर समय के अनुसार समान सरहद पार करते हैं। इधर फसली सीजन शुरू होते ही नेपाली तेल कंपनियों ने तिलहन का स्टॉक करना शुरू कर दिया है। इसको लेकर सीमावर्ती गांव के लोग सरसों नेपाल पहुंचाने में जुट गए हैं। कस्टम शुल्क समेत जीएसटी की चोरी कर तस्कर मालामाल हो रहे हैं। सोमवार को सुरक्षा एजेंसियों की टीम ने मुखबिर की सूचना पर दो अलग-अलग जगहों से भारत से नेपाल भेजी जा रही सरसों के साथ ही एक बाइक बरामद की थी, जबकि तस्कर मौके से भाग गए थे।
टीम ने बरामद सामान को निचलौल कस्टम के सुपुर्द कर दिया है। लैब टेस्ट और अधिक कस्टम एवं भंसार शुल्क के कारण सरसों को पगडंडियों के रास्ते नेपाल भेजा जा रहा है। सीमावर्ती गांव में स्टोर कर नेपाल में बड़े पैमाने पर तस्करी हो रही है। पगडंडियों के रास्ते बड़े वाहन ले जाना मुश्किल है। इसके कारण एक दर्जन से अधिक बाइक चालक रोजाना दो बोरी कर समान नेपाल पहुंचा रहे हैं।
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नेपाल के तेल रिफाइनरी तक भेज दिया जाता सरसों
जनपद के सोनौली थाना क्षेत्र के खनुवा, भगवानपुर चौकी के समीप मदरी एवं निचलौल के गांव में तस्करी के सामान डंप किए जाते हैं। फिर बाइक और साइकिल से दो बोरी में कर समान को नेपाल के सीमावर्ती गांव में डंप किया जाता है। मौका मिलते ही सरसों को नेपाल के तेल रिफाइनरी तक भेज दिया जाता है। कम समय, कम रिस्क और छोटी पूंजी से अधिक मुनाफा के चलते मदरी और खनुवा, निचलौल, ठूठीबारी, बरगदवा, कोल्हुई गांव के रास्ते सीमा तक दर्जनों कैरियर ऐसे समान ढोने के काम में लगे हैं। जिस समय सीमा पर सुरक्षा एजेंसी नहीं होती हैं। उसी समय सबसे अधिक तस्करी होती है। हालांकि, जानबूझकर अंजान बने हुए या तस्कर मौके का फायदा उठा रहा है, यह जांच का विषय है, लेकिन सीमा पर नेपाल सशस्त्र जवानों के सामने से तस्करी होती है। वह किसी तस्करों को नहीं रोकते हैं। दो हजार रुपये के अंतर के कारण काफी लंबे समय से इसकी तस्करी होती रही है।
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खुली सीमा का उठा रहे लाभ
नेपाल सीमा से लगने वाली जिले की 84 किलोमीटर जनपद की सीमा पूरी तरह से खुली हुई है। यहां बिना रोक-टोक के दोनों देश के लोग आते-जाते हैं। लेकिन देश विरोधी तत्व दोनों देशों में बिकने वाली वस्तु की जब भी मांग बढ़ती है, तो उसकी तस्करी शुरू कर देते हैं। चाहे वह चरस कबाड़ और अन्य सामान हो या फिर अनाज या तिलहन हो, जिसमें मुनाफा औैर मांग बढ़ी, उसे इस पार से उस पार ले जाने का काम शुरू हो जाता है। सीमा पर सुरक्षा एजेंसियों के अलावा सीमावर्ती थानों की पुलिस तैनात रही है। लेकिन, सीमा खुली होने के कारण तस्कर पगडंडियों का भी सहारा लेते हैं। भारत नेपाल सीमा संवेदनशील होने के साथ ही भारत से नेपाल आने जाने के वालों के द्वारा एक गंभीर समस्या है। सरहद की 84 किलोमीटर खुली सीमा में करीब 104 पगडंडियां हैं।
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जनपद से लगी नेपाल के नवलपरासी व महराजगंज की दूरी
मधुबनिया - कोल्हुई-पगडंडी 5 किमी
मर्चवार - कोल्हुई- पगडंडी मार्ग दो किमी
माया देवी-नौतनवां - पगडंडी आठ किमी
भैरहवा-सोनौली - अन्तराष्ट्रीय चार किमी
धकधई- भगवानपुर चौकी - पगडंडी तीन किमी
परासी - बरगदवा - पगडंडी 3 किमी
परासी-परसामलिक - पगडंडी 4 किमी
बेलाटारी-निचलौल - पगडंडी 6 किमी
बेलाटारी-ठूठीबारी - मुख्य मार्ग 6 किमी
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सीमावर्ती इलाकों में संयुक्त गश्त की जा रही है। रात्रि गश्त बढ़ा दी गई है। सख्ती के कारण ही समय-समय पर बरामदगी होती है। सभी थानों को सतर्क रहने का निर्देश है।
-आतिश कुमार सिंह, अपर पुलिस अधीक्षक
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। तस्करों ने अब सरसों को नेपाल पहुंचाना शुरू कर दिया है। प्रति क्विंटल करीब 2000 से 3000 रुपये का मुनाफा होता है। नेपाल के तराई इलाके में ओलावृष्टि से तिलहन की फसल प्रभावित हुई है। तस्कर इसका फायदा उठा रहे हैं।
सूत्र बताते हैं कि भारत-नेपाल सीमा पर तस्कर समय के अनुसार समान सरहद पार करते हैं। इधर फसली सीजन शुरू होते ही नेपाली तेल कंपनियों ने तिलहन का स्टॉक करना शुरू कर दिया है। इसको लेकर सीमावर्ती गांव के लोग सरसों नेपाल पहुंचाने में जुट गए हैं। कस्टम शुल्क समेत जीएसटी की चोरी कर तस्कर मालामाल हो रहे हैं। सोमवार को सुरक्षा एजेंसियों की टीम ने मुखबिर की सूचना पर दो अलग-अलग जगहों से भारत से नेपाल भेजी जा रही सरसों के साथ ही एक बाइक बरामद की थी, जबकि तस्कर मौके से भाग गए थे।
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टीम ने बरामद सामान को निचलौल कस्टम के सुपुर्द कर दिया है। लैब टेस्ट और अधिक कस्टम एवं भंसार शुल्क के कारण सरसों को पगडंडियों के रास्ते नेपाल भेजा जा रहा है। सीमावर्ती गांव में स्टोर कर नेपाल में बड़े पैमाने पर तस्करी हो रही है। पगडंडियों के रास्ते बड़े वाहन ले जाना मुश्किल है। इसके कारण एक दर्जन से अधिक बाइक चालक रोजाना दो बोरी कर समान नेपाल पहुंचा रहे हैं।
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नेपाल के तेल रिफाइनरी तक भेज दिया जाता सरसों
जनपद के सोनौली थाना क्षेत्र के खनुवा, भगवानपुर चौकी के समीप मदरी एवं निचलौल के गांव में तस्करी के सामान डंप किए जाते हैं। फिर बाइक और साइकिल से दो बोरी में कर समान को नेपाल के सीमावर्ती गांव में डंप किया जाता है। मौका मिलते ही सरसों को नेपाल के तेल रिफाइनरी तक भेज दिया जाता है। कम समय, कम रिस्क और छोटी पूंजी से अधिक मुनाफा के चलते मदरी और खनुवा, निचलौल, ठूठीबारी, बरगदवा, कोल्हुई गांव के रास्ते सीमा तक दर्जनों कैरियर ऐसे समान ढोने के काम में लगे हैं। जिस समय सीमा पर सुरक्षा एजेंसी नहीं होती हैं। उसी समय सबसे अधिक तस्करी होती है। हालांकि, जानबूझकर अंजान बने हुए या तस्कर मौके का फायदा उठा रहा है, यह जांच का विषय है, लेकिन सीमा पर नेपाल सशस्त्र जवानों के सामने से तस्करी होती है। वह किसी तस्करों को नहीं रोकते हैं। दो हजार रुपये के अंतर के कारण काफी लंबे समय से इसकी तस्करी होती रही है।
खुली सीमा का उठा रहे लाभ
नेपाल सीमा से लगने वाली जिले की 84 किलोमीटर जनपद की सीमा पूरी तरह से खुली हुई है। यहां बिना रोक-टोक के दोनों देश के लोग आते-जाते हैं। लेकिन देश विरोधी तत्व दोनों देशों में बिकने वाली वस्तु की जब भी मांग बढ़ती है, तो उसकी तस्करी शुरू कर देते हैं। चाहे वह चरस कबाड़ और अन्य सामान हो या फिर अनाज या तिलहन हो, जिसमें मुनाफा औैर मांग बढ़ी, उसे इस पार से उस पार ले जाने का काम शुरू हो जाता है। सीमा पर सुरक्षा एजेंसियों के अलावा सीमावर्ती थानों की पुलिस तैनात रही है। लेकिन, सीमा खुली होने के कारण तस्कर पगडंडियों का भी सहारा लेते हैं। भारत नेपाल सीमा संवेदनशील होने के साथ ही भारत से नेपाल आने जाने के वालों के द्वारा एक गंभीर समस्या है। सरहद की 84 किलोमीटर खुली सीमा में करीब 104 पगडंडियां हैं।
जनपद से लगी नेपाल के नवलपरासी व महराजगंज की दूरी
मधुबनिया - कोल्हुई-पगडंडी 5 किमी
मर्चवार - कोल्हुई- पगडंडी मार्ग दो किमी
माया देवी-नौतनवां - पगडंडी आठ किमी
भैरहवा-सोनौली - अन्तराष्ट्रीय चार किमी
धकधई- भगवानपुर चौकी - पगडंडी तीन किमी
परासी - बरगदवा - पगडंडी 3 किमी
परासी-परसामलिक - पगडंडी 4 किमी
बेलाटारी-निचलौल - पगडंडी 6 किमी
बेलाटारी-ठूठीबारी - मुख्य मार्ग 6 किमी
सीमावर्ती इलाकों में संयुक्त गश्त की जा रही है। रात्रि गश्त बढ़ा दी गई है। सख्ती के कारण ही समय-समय पर बरामदगी होती है। सभी थानों को सतर्क रहने का निर्देश है।
-आतिश कुमार सिंह, अपर पुलिस अधीक्षक