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सादगी के साथ हुई मैईया की विदाई
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सादगी के साथ हुई मैइया की विदाई
जयकारों के बीच विसर्जित हुई प्रतिमाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। कोविड-19 के चलते इस बार दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन में न तो भीड़ उमड़ी और न ही लोगों में उत्साह दिखा। चौराहों व सार्वजनिक स्थलों से हटकर प्रतिमाएं स्थापित की गई थी। शनिवार को सादगी के साथ देवी मैइया को विदा किया गया।
शहरी क्षेत्र के अलावा ग्रामीण क्षेत्र की कुछ दुर्गा प्रतिमाओं को मिलाकर कुल 226 प्रतिमाओं का विसर्जन शरद पूर्णिमा पर अमहट समेत विभिन्न घाटों पर हुआ। इस दौरान शांति व्यवस्था कायम रखने के लिए आठ सौ से ज्यादा पुलिस बल तैनात रहे। पहली प्रतिमा का विसर्जन सुबह पांच बजे हुआ। इसके बाद विसर्जन का दौरान देर शाम तक चलता रहा। कुछ लोग कार तो कुछ लोग ट्रैक्टर पर दुर्गा प्रतिमाओं को लेकर पहुंचे थे। एक वाहन पर महज चार लोगों को ही प्रशासन की ओर से अनुमति दी गई थी। इस दौरान कुछ लोग अबीर-गुलाल उड़ते दिखे, लेकिन पहले जैसा नजारा नहीं दिखा। पिछले वर्ष प्रतिमाओं की संख्या ज्यादा थी। भव्य पंडाल लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे थे, लेकिन इस बार सब फीका रहा।
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जयकारों के बीच विसर्जित हुई प्रतिमाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। कोविड-19 के चलते इस बार दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन में न तो भीड़ उमड़ी और न ही लोगों में उत्साह दिखा। चौराहों व सार्वजनिक स्थलों से हटकर प्रतिमाएं स्थापित की गई थी। शनिवार को सादगी के साथ देवी मैइया को विदा किया गया।
शहरी क्षेत्र के अलावा ग्रामीण क्षेत्र की कुछ दुर्गा प्रतिमाओं को मिलाकर कुल 226 प्रतिमाओं का विसर्जन शरद पूर्णिमा पर अमहट समेत विभिन्न घाटों पर हुआ। इस दौरान शांति व्यवस्था कायम रखने के लिए आठ सौ से ज्यादा पुलिस बल तैनात रहे। पहली प्रतिमा का विसर्जन सुबह पांच बजे हुआ। इसके बाद विसर्जन का दौरान देर शाम तक चलता रहा। कुछ लोग कार तो कुछ लोग ट्रैक्टर पर दुर्गा प्रतिमाओं को लेकर पहुंचे थे। एक वाहन पर महज चार लोगों को ही प्रशासन की ओर से अनुमति दी गई थी। इस दौरान कुछ लोग अबीर-गुलाल उड़ते दिखे, लेकिन पहले जैसा नजारा नहीं दिखा। पिछले वर्ष प्रतिमाओं की संख्या ज्यादा थी। भव्य पंडाल लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे थे, लेकिन इस बार सब फीका रहा।
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