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खाद का नमूना फेल तो दोबारा जांच
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 15 Jan 2016 12:45 AM IST
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बस्ती। सरकार ने उन खाद के कारोबारियों को बड़ी राहत दी है, जिनके खाद के
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नमूने फेल हो जाने पर व्यापारियों का लाइसेंस निरस्त हो जाता था या फिर
उनके विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर दिया जाता था। व्यापारियों को कार्रवाई के
विरुद्ध अपील करने तक की छूट नहीं थी। नई व्यवस्था के तहत अब कोई भी
व्यापारी नमूना फेल होने की स्थिति में दोबारा किसी अन्य प्रयोगशाला में
जांच करा सकता है।
बस, इसके लिए व्यापारी को नोटिस मिलने के 21 दिन के अंदर कृषि निदेशालय में दोबारा जांच की अपील करनी होगी। जिला कृषि अधिकारी डाक्टर सतीशचंद्र पाठक ने बताया कि कृषि निदेशालय के यहां जो अपील की जाएगी, उस नमूने की जांच दूसरे प्रदेश के प्रयोगशाला में होगा।
खाद के थोक और खुदरा बिक्रेताओं के यहां अफसरों के निरीक्षण में जो खाद के नमूने लिए जाते हैं, विभाग उन नमूने की जांच अपने प्रयोगशाला में कराता है। प्रयोगशाला में अगर कोई नमूना फेल हो जाता है, तो विभाग पहले स्टाक की बिक्री पर रोक लगाता या स्टॉक को सीज कर देता है।
उसके बाद विभाग कार्रवाई करने से पहले संबंधित फर्म को नमूना फेल होने की नोटिस देकर जवाब मांगता है। जवाब से संतुष्ट न होने की स्थिति में विभाग या तो लाइसेंस को निरस्त कर देता है या फिर उसे निलंबित कर देता है। उर्वरक नियंत्रण अधिनियम के तहत यह व्यवस्था बनाई गई है कि अगर कोई व्यापारी नमूने के परिणाम से संतुष्ट नहीं है तो वह नमूने की दोबारा जांच करवा सकता है।
बस, इसके लिए व्यापारी को नोटिस मिलने के 21 दिन के अंदर कृषि निदेशालय में दोबारा जांच की अपील करनी होगी। जिला कृषि अधिकारी डाक्टर सतीशचंद्र पाठक ने बताया कि कृषि निदेशालय के यहां जो अपील की जाएगी, उस नमूने की जांच दूसरे प्रदेश के प्रयोगशाला में होगा।
खाद के थोक और खुदरा बिक्रेताओं के यहां अफसरों के निरीक्षण में जो खाद के नमूने लिए जाते हैं, विभाग उन नमूने की जांच अपने प्रयोगशाला में कराता है। प्रयोगशाला में अगर कोई नमूना फेल हो जाता है, तो विभाग पहले स्टाक की बिक्री पर रोक लगाता या स्टॉक को सीज कर देता है।
उसके बाद विभाग कार्रवाई करने से पहले संबंधित फर्म को नमूना फेल होने की नोटिस देकर जवाब मांगता है। जवाब से संतुष्ट न होने की स्थिति में विभाग या तो लाइसेंस को निरस्त कर देता है या फिर उसे निलंबित कर देता है। उर्वरक नियंत्रण अधिनियम के तहत यह व्यवस्था बनाई गई है कि अगर कोई व्यापारी नमूने के परिणाम से संतुष्ट नहीं है तो वह नमूने की दोबारा जांच करवा सकता है।