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उधार से चल रही गृहस्थी, कर्ज में डूबे कई कर्मी
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उधार से चल रही गृहस्थी, कर्ज में डूबे कई कर्मी
बस्ती। नगर पालिका परिषद में कूड़ा उठाने वाले करीब 250 आउट सोर्सिंग कर्मियों को सात माह से मानदेय नहीं मिला है। इसके चलते कई सफाई कर्मियों को घर उधार लेकर गृहस्थी चलानी पड़ रही है। इस वजह से कई कर्मी कर्ज में डूब गए हैं। आउट सोर्सिंग से सड़क से लेकर गलियों तक को लकदक बनाने वालों के बच्चे व परिवार के अन्य सदस्य आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।
नगर पालिका में सफाई व्यवस्था के लिए आउट सोर्सिंग से करीब 250 कर्मियों की भर्ती हुई है। इन कर्मियों को आठ से दस हजार रुपये मानदेय पर कूड़ा व गंदगी साफ करने के लिए तैनात किया गया है। इनका परिवार काम के बदले मिलने वाले मानदेय से चलता है। इन सफाई कर्मियों को हर दिन दिक्कतों से दो चार होना पड़ रहा है।
कूड़ा गाड़ी चलाने वाले शिवनाथ ने बताया कि उनके परिवार में कुल पांच लोग हैं। बच्चे पढ़ते हैं। सात माह से मानदेय न मिलने के कारण उनकी फीस जमा नहीं हो पा रही थी। स्कूल से नाम काटने का नोटिस आ गया। इसके बाद कर्ज लेकर फीस तो दे दी, लेकिन गृहस्थी चलाने के लिए भी तो धन चाहिए। इसे भी उधार से ही चलाया जा रहा है। राशन वाले ने अनाज देने से मना कर दिया था, किसी तरह उसे शीघ्र देने का वादा कर मनाए हैं।
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इसी प्रकार वीरेंद्र की भी स्थिति खराब है। वह सफाई कर्मी हैं। कहते हैं कि परिवार आर्थिक तंगी से गुजर रहा है। कर्ज लेकर फीस तो दे दी, मगर लगता है कि पढ़ाई छूट जाएगी। उधार लेकर कब तक काम चलाया जाए। कई बार अधिकारियों से भी कहा गया, मगर सुनने वाला कोई नहीं है। तकरीबन पचास हजार रुपये उधार हो चुका है।
नगर पालिका परिषद के ईओ दुर्गेश्वर त्रिपाठी ने कहा कि सफाई कर्मियों को प्राथमिकता के आधार पर भुगतान के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए आपूर्ति कंपनी को कुछ भुगतान हुआ है, जिससे अधिकांश का मानदेय दिया जा सकेगा।
बोले आउट सोर्सिंग संचालक
आउट सोर्सिंग कंपनी के संचालक ओम प्रकाश मिश्र ने कहा कि पालिका की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। ऐसे में छिटपुट कर भुगतान किया जा रहा है। यह सही है कि सात माह से भुगतान नहीं किया जा सका, मगर अब इस मामले में पालिका ने धन उपलब्ध कराया है। जितना हो सकेगा, उतना दिया जाएगा।
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बस्ती। नगर पालिका परिषद में कूड़ा उठाने वाले करीब 250 आउट सोर्सिंग कर्मियों को सात माह से मानदेय नहीं मिला है। इसके चलते कई सफाई कर्मियों को घर उधार लेकर गृहस्थी चलानी पड़ रही है। इस वजह से कई कर्मी कर्ज में डूब गए हैं। आउट सोर्सिंग से सड़क से लेकर गलियों तक को लकदक बनाने वालों के बच्चे व परिवार के अन्य सदस्य आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।
नगर पालिका में सफाई व्यवस्था के लिए आउट सोर्सिंग से करीब 250 कर्मियों की भर्ती हुई है। इन कर्मियों को आठ से दस हजार रुपये मानदेय पर कूड़ा व गंदगी साफ करने के लिए तैनात किया गया है। इनका परिवार काम के बदले मिलने वाले मानदेय से चलता है। इन सफाई कर्मियों को हर दिन दिक्कतों से दो चार होना पड़ रहा है।
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कूड़ा गाड़ी चलाने वाले शिवनाथ ने बताया कि उनके परिवार में कुल पांच लोग हैं। बच्चे पढ़ते हैं। सात माह से मानदेय न मिलने के कारण उनकी फीस जमा नहीं हो पा रही थी। स्कूल से नाम काटने का नोटिस आ गया। इसके बाद कर्ज लेकर फीस तो दे दी, लेकिन गृहस्थी चलाने के लिए भी तो धन चाहिए। इसे भी उधार से ही चलाया जा रहा है। राशन वाले ने अनाज देने से मना कर दिया था, किसी तरह उसे शीघ्र देने का वादा कर मनाए हैं।
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इसी प्रकार वीरेंद्र की भी स्थिति खराब है। वह सफाई कर्मी हैं। कहते हैं कि परिवार आर्थिक तंगी से गुजर रहा है। कर्ज लेकर फीस तो दे दी, मगर लगता है कि पढ़ाई छूट जाएगी। उधार लेकर कब तक काम चलाया जाए। कई बार अधिकारियों से भी कहा गया, मगर सुनने वाला कोई नहीं है। तकरीबन पचास हजार रुपये उधार हो चुका है।
नगर पालिका परिषद के ईओ दुर्गेश्वर त्रिपाठी ने कहा कि सफाई कर्मियों को प्राथमिकता के आधार पर भुगतान के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए आपूर्ति कंपनी को कुछ भुगतान हुआ है, जिससे अधिकांश का मानदेय दिया जा सकेगा।
बोले आउट सोर्सिंग संचालक
आउट सोर्सिंग कंपनी के संचालक ओम प्रकाश मिश्र ने कहा कि पालिका की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। ऐसे में छिटपुट कर भुगतान किया जा रहा है। यह सही है कि सात माह से भुगतान नहीं किया जा सका, मगर अब इस मामले में पालिका ने धन उपलब्ध कराया है। जितना हो सकेगा, उतना दिया जाएगा।