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Basti News: एजिथ्रोमाइसिन के एक बैच पर रोक, 78 हजार टैबलेट वापस
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बस्ती। सरकारी अस्पतालों में मरीजों को वितरित की जाने वाली एजिथ्रोमाइसिन-500 एमजी टैबलेट का एक बैच जांच में मिसब्रांडेड पाया गया है। औषधि प्रशासन की जांच रिपोर्ट आने के बाद संबंधित बैच की दवा के वितरण और इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई है।
ड्रग वेयर हाउस ने सीएमओ को पत्र भेजकर सभी चिकित्सा इकाइयों से बचा हुआ स्टॉक वापस मंगाने के निर्देश दिए हैं। अब तक करीब 78 हजार टैबलेट वापस जमा कराई जा चुकी हैं।
मामला एजिथ्रोमाइसिन टैबलेट आईपी 500 एमजी के बैच नंबर एजेडआईटी-56031 से जुड़ा है। इसका निर्माण मेसर्स सनराइज इंटरनेशनल लैब्स लिमिटेड, तेलंगाना ने किया है। दवा की निर्माण तिथि दिसंबर 2025 और एक्सपायरी नवंबर 2027 है। औषधि निरीक्षक मुकेश ने 15 सितंबर 2026 को जनप्रिय ड्रग वेयर हाउस, यूपीएमएससीएल बस्ती से दवा का नमूना लिया था।
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राजकीय विश्लेषक, उत्तर प्रदेश, वाराणसी की ओर से 13 अक्तूबर को जारी जांच रिपोर्ट में नमूने को ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत निर्धारित लेबलिंग संबंधी अनिवार्य शर्तों के अनुरूप नहीं पाया गया।
इसके आधार पर दवा को मिसब्रांडेड घोषित किया गया। इसके बाद औषधि निरीक्षक ने 21 अक्तूबर को संबंधित वेयर हाउस को नोटिस जारी किया। इसमें चिह्नित बैच का स्टॉक अलग रखने, खरीद और वितरण से जुड़े अभिलेख उपलब्ध कराने तथा जिन चिकित्सा इकाइयों को दवा भेजी गई है, वहां से उसे वापस मंगाने के निर्देश दिए गए।
यूपी मेडिकल सप्लाइज कॉरपोरेशन लिमिटेड की ओर से इस बैच की करीब तीन लाख टैबलेट 22 दिसंबर 2025 को मंडलीय ड्रग वेयर हाउस को उपलब्ध कराई गई थीं। यहां से जिला अस्पताल, महिला अस्पताल, मेडिकल कॉलेज, टीबी अस्पताल और जिले की सीएचसी-पीएचसी समेत अन्य चिकित्सा इकाइयों को दवा भेजी गई थी।
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ड्रग वेयर हाउस ने सीएमओ को पत्र भेजकर सभी चिकित्सा इकाइयों से बचा हुआ स्टॉक वापस मंगाने के निर्देश दिए हैं। अब तक करीब 78 हजार टैबलेट वापस जमा कराई जा चुकी हैं।
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मामला एजिथ्रोमाइसिन टैबलेट आईपी 500 एमजी के बैच नंबर एजेडआईटी-56031 से जुड़ा है। इसका निर्माण मेसर्स सनराइज इंटरनेशनल लैब्स लिमिटेड, तेलंगाना ने किया है। दवा की निर्माण तिथि दिसंबर 2025 और एक्सपायरी नवंबर 2027 है। औषधि निरीक्षक मुकेश ने 15 सितंबर 2026 को जनप्रिय ड्रग वेयर हाउस, यूपीएमएससीएल बस्ती से दवा का नमूना लिया था।
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राजकीय विश्लेषक, उत्तर प्रदेश, वाराणसी की ओर से 13 अक्तूबर को जारी जांच रिपोर्ट में नमूने को ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत निर्धारित लेबलिंग संबंधी अनिवार्य शर्तों के अनुरूप नहीं पाया गया।
इसके आधार पर दवा को मिसब्रांडेड घोषित किया गया। इसके बाद औषधि निरीक्षक ने 21 अक्तूबर को संबंधित वेयर हाउस को नोटिस जारी किया। इसमें चिह्नित बैच का स्टॉक अलग रखने, खरीद और वितरण से जुड़े अभिलेख उपलब्ध कराने तथा जिन चिकित्सा इकाइयों को दवा भेजी गई है, वहां से उसे वापस मंगाने के निर्देश दिए गए।
यूपी मेडिकल सप्लाइज कॉरपोरेशन लिमिटेड की ओर से इस बैच की करीब तीन लाख टैबलेट 22 दिसंबर 2025 को मंडलीय ड्रग वेयर हाउस को उपलब्ध कराई गई थीं। यहां से जिला अस्पताल, महिला अस्पताल, मेडिकल कॉलेज, टीबी अस्पताल और जिले की सीएचसी-पीएचसी समेत अन्य चिकित्सा इकाइयों को दवा भेजी गई थी।