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Basti News: टूटकर गिर रहा पीएचसी भवन का प्लास्टर, कर्मियों में दहशत
Thu, 09 Mar 2023 10:56 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Thu, 09 Mar 2023 10:56 PM IST
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फोटो-
संवाद न्यूज एजेंसी
बनकटी। पीएचसी की इमारत जर्जर हो चुकी है। हर दूसरे तीसरे दिन छत का प्लास्टर टूटकर गिर रहा है। इसे लेकर स्वास्थ्य कर्मियों में इमारत के ढहने की आशंका बनी हुई है। बारिश में छत से पानी टपकता है, जिससे अभिलेख और दवाओं को सुरक्षित रखने में कर्मियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
पीएचसी भवन का निर्माण वर्ष 1986 में कराया गया था, लेकिन रखरखाव और मरम्मत के अभाव में अब यह भवन जर्जर हो चुका है। परिसर में ही चिकित्सकों व कर्मचारियों का आवास भी स्थित है। सभी भवन जर्जर हो चुके हैं। बारिश में छत टपकने के कारण टीके की कोल्ड चेन, दवाएं और अभिलेख सुरक्षित रखने के लिए कर्मियों को जद्दोजहद करनी पड़ती है। भवन की दीवारों में दरारें पड़ गई हैं। सभी जगहों से प्लास्टर उखड़ रहा है।
फार्मासिस्ट पीसी पांडेय ने बताया कि आवास और ओपीडी में रहने पर हर समय डर बना रहा है। पता नहीं कब कहां का प्लास्टर टूटकर गिर जाए। लैब टेक्नीशियन मुनिराम ने बताया कि जब से कंट्रोल रूम का छज्जा, ओपीडी और लैब की छप का प्सास्टर टूटकर गिरा है, तब से डर लगा रहता है।
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आवास और अस्पताल का अवर अभियंता से सर्वे कराकर रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी गई है। जो व्यवस्था विभाग के पास है उसी के सहारे अस्पताल संचालित किया जा रहा है।
-डॉ. राजेश कुमार, प्रभारी चिकित्साधिकारी
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संवाद न्यूज एजेंसी
बनकटी। पीएचसी की इमारत जर्जर हो चुकी है। हर दूसरे तीसरे दिन छत का प्लास्टर टूटकर गिर रहा है। इसे लेकर स्वास्थ्य कर्मियों में इमारत के ढहने की आशंका बनी हुई है। बारिश में छत से पानी टपकता है, जिससे अभिलेख और दवाओं को सुरक्षित रखने में कर्मियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
पीएचसी भवन का निर्माण वर्ष 1986 में कराया गया था, लेकिन रखरखाव और मरम्मत के अभाव में अब यह भवन जर्जर हो चुका है। परिसर में ही चिकित्सकों व कर्मचारियों का आवास भी स्थित है। सभी भवन जर्जर हो चुके हैं। बारिश में छत टपकने के कारण टीके की कोल्ड चेन, दवाएं और अभिलेख सुरक्षित रखने के लिए कर्मियों को जद्दोजहद करनी पड़ती है। भवन की दीवारों में दरारें पड़ गई हैं। सभी जगहों से प्लास्टर उखड़ रहा है।
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फार्मासिस्ट पीसी पांडेय ने बताया कि आवास और ओपीडी में रहने पर हर समय डर बना रहा है। पता नहीं कब कहां का प्लास्टर टूटकर गिर जाए। लैब टेक्नीशियन मुनिराम ने बताया कि जब से कंट्रोल रूम का छज्जा, ओपीडी और लैब की छप का प्सास्टर टूटकर गिरा है, तब से डर लगा रहता है।
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आवास और अस्पताल का अवर अभियंता से सर्वे कराकर रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी गई है। जो व्यवस्था विभाग के पास है उसी के सहारे अस्पताल संचालित किया जा रहा है।
-डॉ. राजेश कुमार, प्रभारी चिकित्साधिकारी