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Basti News: मास्टरमाइंड शुभम से जुड़ रहे गणपति फार्मा के तार
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बस्ती। कोडीनयुक्त कफ सिरप की सप्लाई में अहम भूमिका निभाने वाली बोगस फर्म गणपति फार्मा के संचालक के बारे में एसआईटी को अहम सुराग मिले हैं। बताया जा रहा है उसकी पृष्ठभूमि बनारस से जुड़ी हुई है। पुलिस उसे मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल के सिंडिकेट का अहम हिस्सा मानकर जांच कर रही है।
बोगस फर्म संचालित करने वाले मास्टरमाइंड की बस्ती से बनारस तक तलाश की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि बोगस फर्म संचालक के गिरफ्त में आने के बाद उससे जुड़े और लोगों के चेहरे से भी नकाब हट जाएगा। जांच में यह स्पष्ट हो गया है कि कोडीनयुक्त सिरप की तस्करी के मुख्य आरोपी वाराणसी के शुभम जायसवाल के सिंडिकेट से बस्ती के धंधेबाजों के भी तार जुड़े हुए है।
एसआईटी की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है तस्करी के नेटवर्क में शामिल लोगों की धड़कनें बढ़तीं जा रहीं हैं। बस्ती की जिन चार फर्मों ने गणपति फार्मा को 1.72 लाख शीशी सिरप की आपूर्ति की है उनकी पहचान पहले ही हो चुकी है।
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इसमें हर्ष मेडिसिन जिला अस्पताल, आईडियल एजेंसी गांधीनगर, संस फार्मा जिला अस्पताल और एस फार्मा खीरीघाट शामिल हैं। इनके नाम पते सही हैं लेकिन रांची से बड़ी मात्रा में कोडीनयुक्त सिरप मंगाकर उसकी सप्लाई गणपति फार्मा को किए जाने में इन्हीं फर्मों का नाम सामने आया है। इन फर्मों के संचालक भूमिगत हो गए हैं। पुलिस मोबाइल नंबर के जरिये इन संचालकों को भी ट्रेस करने में जुटी है। हालांकि, ऊंचे रसूख के कारण ये बचते आ रहे हैं।
फुटकर व्यापारियों के भी सामने आए नाम : नवंबर में पहली बार बस्ती में पकड़े गए कोडीनयुक्त सिरप के मामले में पुरानी बस्ती के गोयल फार्मा के खिलाफ पुरानी बस्ती थाने में पहली एफआईआर दर्ज हुई थी। फर्म संचालक खुशबू गोयल और ऋत्विक गोयल हाईकोर्ट से गिरफ्तारी पर स्थगन आदेश लेने के बाद पुलिस के संपर्क में हैं।
एसआईटी अपनी जांच में कोडीनयुक्त सिरप से जुड़ा विवरण भी इनसे जुटा रही है। इसमें कोडीनयुक्त सिरप खरीदने वाले दवा के फुटकर व्यापारियों के नाम भी सामने आए हैं। हालांकि, पुलिस अभी किसी नाम का खुलासा नहीं कर रही है।
30 नवंबर से बदल गया पंजीकरण का नियम : कोडीनयुक्त सिरप की तस्करी के मामले में सूबे में फर्जी नाम पते पर एजेंसी का लाइसेंस जारी किए जाने का खेल सामने आने के बाद शासन स्तर से 30 नवंबर को ही पंजीकरण से संबंधित नियमावली में काफी संशोधन कर दिया गया है। अब लाइसेंस की प्रक्रिया में जियो टैग अनिवार्य कर दिया गया है।
फर्म संचालक को दुकान के साथ पहचान के लिए अपना स्पष्ट फोटो भी आवेदन के साथ अपलोड करना होगा। इसके बाद औषधि विभाग संबंधित दुकान का भौतिक सत्यापन करेगा।
साहू कटरा में एजेंसी पर पड़ा था छापा : तीन दिन पहले औषधि निरीक्षक अरविंद कुमार ने गांधीनगर के साहू कटरा में स्थित दवा की एक दुकान में छापा मारा था। औषधि निरीक्षक का कहना है कि दुकान में कोडिनयुक्त सिरप की खरीद-फरोख्त और स्टॉक की जांच में इसकी मात्रा नहीं मिली। दुकानदार से छह महीने के बिल-वाउचर सहित अन्य विवरण तलब किया गया है। इस छापेमारी को लेकर भी काफी चर्चा हैं।
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बोगस फर्म संचालित करने वाले मास्टरमाइंड की बस्ती से बनारस तक तलाश की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि बोगस फर्म संचालक के गिरफ्त में आने के बाद उससे जुड़े और लोगों के चेहरे से भी नकाब हट जाएगा। जांच में यह स्पष्ट हो गया है कि कोडीनयुक्त सिरप की तस्करी के मुख्य आरोपी वाराणसी के शुभम जायसवाल के सिंडिकेट से बस्ती के धंधेबाजों के भी तार जुड़े हुए है।
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एसआईटी की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है तस्करी के नेटवर्क में शामिल लोगों की धड़कनें बढ़तीं जा रहीं हैं। बस्ती की जिन चार फर्मों ने गणपति फार्मा को 1.72 लाख शीशी सिरप की आपूर्ति की है उनकी पहचान पहले ही हो चुकी है।
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इसमें हर्ष मेडिसिन जिला अस्पताल, आईडियल एजेंसी गांधीनगर, संस फार्मा जिला अस्पताल और एस फार्मा खीरीघाट शामिल हैं। इनके नाम पते सही हैं लेकिन रांची से बड़ी मात्रा में कोडीनयुक्त सिरप मंगाकर उसकी सप्लाई गणपति फार्मा को किए जाने में इन्हीं फर्मों का नाम सामने आया है। इन फर्मों के संचालक भूमिगत हो गए हैं। पुलिस मोबाइल नंबर के जरिये इन संचालकों को भी ट्रेस करने में जुटी है। हालांकि, ऊंचे रसूख के कारण ये बचते आ रहे हैं।
फुटकर व्यापारियों के भी सामने आए नाम : नवंबर में पहली बार बस्ती में पकड़े गए कोडीनयुक्त सिरप के मामले में पुरानी बस्ती के गोयल फार्मा के खिलाफ पुरानी बस्ती थाने में पहली एफआईआर दर्ज हुई थी। फर्म संचालक खुशबू गोयल और ऋत्विक गोयल हाईकोर्ट से गिरफ्तारी पर स्थगन आदेश लेने के बाद पुलिस के संपर्क में हैं।
एसआईटी अपनी जांच में कोडीनयुक्त सिरप से जुड़ा विवरण भी इनसे जुटा रही है। इसमें कोडीनयुक्त सिरप खरीदने वाले दवा के फुटकर व्यापारियों के नाम भी सामने आए हैं। हालांकि, पुलिस अभी किसी नाम का खुलासा नहीं कर रही है।
30 नवंबर से बदल गया पंजीकरण का नियम : कोडीनयुक्त सिरप की तस्करी के मामले में सूबे में फर्जी नाम पते पर एजेंसी का लाइसेंस जारी किए जाने का खेल सामने आने के बाद शासन स्तर से 30 नवंबर को ही पंजीकरण से संबंधित नियमावली में काफी संशोधन कर दिया गया है। अब लाइसेंस की प्रक्रिया में जियो टैग अनिवार्य कर दिया गया है।
फर्म संचालक को दुकान के साथ पहचान के लिए अपना स्पष्ट फोटो भी आवेदन के साथ अपलोड करना होगा। इसके बाद औषधि विभाग संबंधित दुकान का भौतिक सत्यापन करेगा।
साहू कटरा में एजेंसी पर पड़ा था छापा : तीन दिन पहले औषधि निरीक्षक अरविंद कुमार ने गांधीनगर के साहू कटरा में स्थित दवा की एक दुकान में छापा मारा था। औषधि निरीक्षक का कहना है कि दुकान में कोडिनयुक्त सिरप की खरीद-फरोख्त और स्टॉक की जांच में इसकी मात्रा नहीं मिली। दुकानदार से छह महीने के बिल-वाउचर सहित अन्य विवरण तलब किया गया है। इस छापेमारी को लेकर भी काफी चर्चा हैं।