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घाघरा खतरे के निशान से ऊपर
ब्यूरो अमर उजाला/ बस्ती
Updated Tue, 19 Jul 2016 11:36 PM IST
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विक्रमजोत मे हो रहा बंधे का कटान।
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छह दिन से लगातार बढ़ रहा घाघरा का जलस्तर मंगलवार को खतरे के निशान को पार कर गया। मंगलवार की सुबह यह खतरे के निशान (92.730 मीटर) को पार कर 92.770 मीटर तक पहुंच गया। जो शाम तक बढ़कर 92.990 मीटर हो गया। घाघरा के बढ़ते जलस्तर और कटान के चलते बंधे के किनारे बसे करीब दो दर्जन गांव वालों की नींद उड़ गई है। लोलपुर-विक्रमजोत बंधे का ठोकर नंबर नौ का 80 फीसदी भाग बह चुका है। अब घाघरा का दबाव गौरियानैन गांव के ठीक सामने है। दुबौलिया क्षेत्र में खतरे के निशान से चार सेमी ऊपर बहाव है। वही दुबौलिया क्षेत्र का टकटकवा गांव भी खतरे की जद में आ गया है। बंधे को बचाने की कोशिश में जुटे प्रशासन के साथ मंगलवार को गौरियानैन गांव के लोगों ने भी मोर्चा सम्हाल लिया।
लोलपुर-विक्रमजोत बंधे के नौ नंबर ठोकर के पास सोमवार सुबह भीषण कटान शुरू हुई थी मंगलवार को ठोकर का 80 फीसदी भाग कटकर नदी में समा गया। महत्वपूर्ण हिस्सा कटते ही गांव वालों में हाहाकार मच गई। लगातार बोल्डर और ईट गिट्टी आदि डाली जा रही है लेकिन हालात पर पूरी तरह से नियंत्रण नहीं हो पा रहा है। बताया जा रहा कि 1500 मीटर लंबे मीटर बांध का आधा हिस्सा संवेदनशील बन गया है। नदी स्थान बदल बदल कर रैंपो को काट रही है। जिस गति से कार्य हो रहा है उससे संकट बढ़ सकता है। बंधे पर काम कर रहे मजदूरों का कहना है कि रिंग रोड नहीं होता तो गांव में पानी घुस गया होता।
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लोलपुर-विक्रमजोत बंधे के नौ नंबर ठोकर के पास सोमवार सुबह भीषण कटान शुरू हुई थी मंगलवार को ठोकर का 80 फीसदी भाग कटकर नदी में समा गया। महत्वपूर्ण हिस्सा कटते ही गांव वालों में हाहाकार मच गई। लगातार बोल्डर और ईट गिट्टी आदि डाली जा रही है लेकिन हालात पर पूरी तरह से नियंत्रण नहीं हो पा रहा है। बताया जा रहा कि 1500 मीटर लंबे मीटर बांध का आधा हिस्सा संवेदनशील बन गया है। नदी स्थान बदल बदल कर रैंपो को काट रही है। जिस गति से कार्य हो रहा है उससे संकट बढ़ सकता है। बंधे पर काम कर रहे मजदूरों का कहना है कि रिंग रोड नहीं होता तो गांव में पानी घुस गया होता।
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