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बाढ़ का पानी गांव में घुसा
अमर उजाला बस्ती
Updated Fri, 29 Jul 2016 11:41 PM IST
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बाढ़ से लोग परेशान।
- फोटो : अमर उजाला
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घाघरा का बढ़ता जलस्तर तटबंध के किनारे के गांवों के लिए ही नहीं अफसरों के लिए चिंता का कारण बन गया है। शुक्रवार सुबह जलस्तर 92:990 पर था जो कि शाम को बढ़कर 93:020 मीटर पर पहुंच गया। 12 घंटे में 29 मिमी की वृद्धि हुई है।
उफनाई घाघरा के बाढ़ का पानी बगल के कई गांवों में फैल रहा है। यही नहीं कल्याणपुर, भरथापुर, सहजौरा पाठक में नदी बिल्कुल सटकर बहने लगी है। सैकड़ों एकड़ खेत व फसल धारा में समा गई है। अब इनके घरों से बेघर होने की बारी आ गयी है। दिनभर गांव के बच्चे, बूढ़े, औरतें कटान व शोर मचाती नदी को देखते रहते हैं। भीषण खतरे को देखते हुए डीएम के आदेश पर प्रशासन ने तो इनको विस्थापित करने की योजना बनाने लगा है कल्याणपुर का प्राथमिक विद्यालय भी बंद है। पशुओं का चारा दूर गांवों से लाते हैं यह फिर जान जोखिम में डालकर घाघरा पार करके नावों से हरा चारा काट कर ला रहे हैं। इतनी चुनौती भरी दिनचर्या के बाद भी सर पर हरहराती नदी रात कि नींद छीन ली है।
विक्रमजोत लोलपुर बांध के अधूरे 1600 मीटर बने बांध पर जहां नदी का दबाव रैंपो व स्पर पर ज्यादा बढ़ने लगा हैं जिससे संकट अभी टला नहीं है। जिससे गौरियानैन और बाघानाला के ग्रामीणों में भय और आशंका के बादल छटने का नाम नहीं ले रहे हैं। बाढ़ चौकी पर दिन रात कैंप कर रहे जेई ज्ञान प्रकाश जायसवाल व दया शंकर सिंह ने बताया कि घाघरा शनिवार से घट सकती हैं जिससे गांवों में फैल रहा पानी वापस होने लगेगा। मगर यह स्थिति एक दो दिन हि रहेगी। पहाड़ों की बरसात और तीन बैराजों का पानी आना चालू हो जाएगा।फिर नदी अप स्टीम (बढ़ते क्रम मे) हो जाएगी। खतरा टल रहा हैं खत्म नही हुआ है।
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घाघरा का जलस्तर खतरे का निशान पार कर 27सेंटीमीटर के ऊपर है। विक्रमजोत लोलपुर तटबंध अधूरा होने के कारण केशवपुर, भदोई, बाघानाला तथा संदलपुर कल्यानपुर के रास्ते से आबादी की तरफ़ बढ कर बाढ का पानी तबाही मचा देता है अगर नदी निरंतर बढ़ती रही तो उक्त गांवों के साथ राष्ट्रीय राज मार्ग भी बाढ से अछूता नहीं रहेगा।
इन गांवों में हो रही कटान
विक्रमजोत विकास खंड के सहजौरा पाठक, भरथापुर, कल्यानपुर, बाघानाला, केशवपुर में नदी का जलस्तर बढ़ने पर भी रुक रुक कर कटान हो रही है। कुदरहा, घाघरा नदी और बाढ़ खंड के बीच आए दिन कटान और भरान का खेल चल रहा है। इसमें नदी ने तटबंध को बचाने के लिए बने 21 स्परों के बडे़ हिस्से को क्षति पहुंची है।
कुदरहा प्रतिनिधि के मुताबिक घाघरा नदी के आए दिन कटान से घाघरा तटबंध के लिए खतरा बढ़ता जा रहा था। बाढ़ खंड के अब तक के कोशिशों पर नदी का कहर भारी पड़ रहा था। विभाग दिन में ईंट के टुकड़े और पत्थर डाल कर स्परों की मरम्मत करता तो रात में नदी दो मीटर आगे बढ़कर काट देता। इसी से निपटने के लिए अब पुराने स्पर एक और दो के बीच में पांच नये स्पर बनाये जा रहे हैं। इससे नदी की धारा का दबाव शुरु में ही कम हो जाएगा। इन स्परों से लड़कर नदी दक्षिण चली जाएगी। इससे आगे के स्परो पर कटान का दबाव घट जायेगा। सहायक अभियता जितेंद्र कुमार का कहना है विभाग ने तकनीकी रूप से नदी के कटान को प्रभावी रूप से रोकने के लिए पांच स्पर का निर्माण शुरु किया है इससे कटान पर प्रभावी अंकुश लग जायेगा।
दुबौलिया प्रतिनिधि के मुताबिक घाघरा के बढ़ते जलस्तर से गांव वालों की मुसीबत भी बढ़ती जा रही है। जहां कटरिया, पारा और चांदपुर के पास कटान से लोग दहशत में हैं। वहीं सुविका बाबू, गौरिया, सपहा, देवरागंग बरार, एकटकवा, विलासपुर, आराजी डूमरी, धरमूपुर एहतमाली सहित 11 गांव बाढ़ की चपेट में हैं। बच्चे स्कूल के लिए नावों का सहारा ले रहे हैं। वहीं बाजार आदि से जरूरी सामान के लिए भी नाव ही एक मात्रा इन गांवों के लोगों का आवागमन का साधन बचा है।
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उफनाई घाघरा के बाढ़ का पानी बगल के कई गांवों में फैल रहा है। यही नहीं कल्याणपुर, भरथापुर, सहजौरा पाठक में नदी बिल्कुल सटकर बहने लगी है। सैकड़ों एकड़ खेत व फसल धारा में समा गई है। अब इनके घरों से बेघर होने की बारी आ गयी है। दिनभर गांव के बच्चे, बूढ़े, औरतें कटान व शोर मचाती नदी को देखते रहते हैं। भीषण खतरे को देखते हुए डीएम के आदेश पर प्रशासन ने तो इनको विस्थापित करने की योजना बनाने लगा है कल्याणपुर का प्राथमिक विद्यालय भी बंद है। पशुओं का चारा दूर गांवों से लाते हैं यह फिर जान जोखिम में डालकर घाघरा पार करके नावों से हरा चारा काट कर ला रहे हैं। इतनी चुनौती भरी दिनचर्या के बाद भी सर पर हरहराती नदी रात कि नींद छीन ली है।
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विक्रमजोत लोलपुर बांध के अधूरे 1600 मीटर बने बांध पर जहां नदी का दबाव रैंपो व स्पर पर ज्यादा बढ़ने लगा हैं जिससे संकट अभी टला नहीं है। जिससे गौरियानैन और बाघानाला के ग्रामीणों में भय और आशंका के बादल छटने का नाम नहीं ले रहे हैं। बाढ़ चौकी पर दिन रात कैंप कर रहे जेई ज्ञान प्रकाश जायसवाल व दया शंकर सिंह ने बताया कि घाघरा शनिवार से घट सकती हैं जिससे गांवों में फैल रहा पानी वापस होने लगेगा। मगर यह स्थिति एक दो दिन हि रहेगी। पहाड़ों की बरसात और तीन बैराजों का पानी आना चालू हो जाएगा।फिर नदी अप स्टीम (बढ़ते क्रम मे) हो जाएगी। खतरा टल रहा हैं खत्म नही हुआ है।
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घाघरा का जलस्तर खतरे का निशान पार कर 27सेंटीमीटर के ऊपर है। विक्रमजोत लोलपुर तटबंध अधूरा होने के कारण केशवपुर, भदोई, बाघानाला तथा संदलपुर कल्यानपुर के रास्ते से आबादी की तरफ़ बढ कर बाढ का पानी तबाही मचा देता है अगर नदी निरंतर बढ़ती रही तो उक्त गांवों के साथ राष्ट्रीय राज मार्ग भी बाढ से अछूता नहीं रहेगा।
इन गांवों में हो रही कटान
विक्रमजोत विकास खंड के सहजौरा पाठक, भरथापुर, कल्यानपुर, बाघानाला, केशवपुर में नदी का जलस्तर बढ़ने पर भी रुक रुक कर कटान हो रही है। कुदरहा, घाघरा नदी और बाढ़ खंड के बीच आए दिन कटान और भरान का खेल चल रहा है। इसमें नदी ने तटबंध को बचाने के लिए बने 21 स्परों के बडे़ हिस्से को क्षति पहुंची है।
कुदरहा प्रतिनिधि के मुताबिक घाघरा नदी के आए दिन कटान से घाघरा तटबंध के लिए खतरा बढ़ता जा रहा था। बाढ़ खंड के अब तक के कोशिशों पर नदी का कहर भारी पड़ रहा था। विभाग दिन में ईंट के टुकड़े और पत्थर डाल कर स्परों की मरम्मत करता तो रात में नदी दो मीटर आगे बढ़कर काट देता। इसी से निपटने के लिए अब पुराने स्पर एक और दो के बीच में पांच नये स्पर बनाये जा रहे हैं। इससे नदी की धारा का दबाव शुरु में ही कम हो जाएगा। इन स्परों से लड़कर नदी दक्षिण चली जाएगी। इससे आगे के स्परो पर कटान का दबाव घट जायेगा। सहायक अभियता जितेंद्र कुमार का कहना है विभाग ने तकनीकी रूप से नदी के कटान को प्रभावी रूप से रोकने के लिए पांच स्पर का निर्माण शुरु किया है इससे कटान पर प्रभावी अंकुश लग जायेगा।
दुबौलिया प्रतिनिधि के मुताबिक घाघरा के बढ़ते जलस्तर से गांव वालों की मुसीबत भी बढ़ती जा रही है। जहां कटरिया, पारा और चांदपुर के पास कटान से लोग दहशत में हैं। वहीं सुविका बाबू, गौरिया, सपहा, देवरागंग बरार, एकटकवा, विलासपुर, आराजी डूमरी, धरमूपुर एहतमाली सहित 11 गांव बाढ़ की चपेट में हैं। बच्चे स्कूल के लिए नावों का सहारा ले रहे हैं। वहीं बाजार आदि से जरूरी सामान के लिए भी नाव ही एक मात्रा इन गांवों के लोगों का आवागमन का साधन बचा है।