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प्रतिमा विसर्जन के साथ दुर्गापूजा समारोह का समापन
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प्रतिमा विसर्जन के साथ दुर्गा पूजा समारोह का समापन
शहर व कुछ ग्रामीण क्षेत्र की 542 प्रतिमाओं का हुआ विसर्जन
कुआनो नदी के अमहट घाट पर शहर की प्रतिमाओं का विसर्जन हुआ, भारी संख्या में पुलिस व पीएसी जवानों की रही तैैनाती
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। दशहरा के बाद बचीं मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन बुधवार को शरद पूर्णिमा के अवसर पर धूमधाम से कुआनो समेत जिले के विभिन्न नदी के घाटों पर किया गया। विसर्जन के लिए शहर के विभिन्न हिस्सों से झांकियों के साथ प्रतिमाएं निकलीं। इस दौरान श्रद्धालुओं ने जमकर अबीर-गुलाल उड़ाए और माता के जयकारे लगाए। शाम छह से बजे से शुरू हुआ विसर्जन का सिलसिला पूरी रात चला। विसर्जन के लिए पुलिस की ओर से सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। जिले की डीएम सौम्या अग्रवाल और एसपी आशीष श्रीवास्तव भी व्यवस्था का जायजा लेने में लगे रहे।
शहर में विसर्जन जुलूस के रूट पर दोनों किनारे जगह-जगह मेले लगे, जहां शहरी व गंवई संस्कृति का समागम देखने को मिला। भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस कर्मी व्यवस्था बनाए रखने के लिए भागदौड़ करते रहे। पुलिस की पूरी कोशिश रही कि भीड़ में किसी तरह का विवाद न हो। इन सबके बीच, आकर्षक ढंग से सजाए गए ट्रक, ट्रैक्टर-ट्राली व डीसीएम से मां दुर्गा की प्रतिमाएं घाट तक पहुंचीं। पुरानी बस्ती की प्रतिमाएं करुआ बाबा स्थान के पास एकत्र हुईं। वहां से जुलूस की शक्ल में पांडेय बाजार, दक्षिण दरवाजा, पक्का बाजार, गांधीनगर और कंपनी बाग होते अमहट घाट पहुंचीं।
संवेदनशील और सांप्रदायिक क्षेत्रों में खास इंतजाम किए गए थे। बड़ी संख्या में बाहरी फोर्स और पीएसी के जवानों की मौजूदगी में मूर्तियों का विसर्जन कराया गया। पुरानी बस्ती, कोतवाली, वाल्टरगंज और नगर थाना क्षेत्र की कुछ प्रतिमाओं का विसर्जन भी अमहट घाट पर किया गया। ग्रामीण क्षेत्र की प्रतिमाओं का विसर्जन नजदीक की नदी में किया गया। अंतिम प्रतिमा के विसर्जित होने तक प्रशासनिक अमला घाट पर डटा रहा। घाटों पर पर्याप्त प्रकाश की व्यवस्था की गई थी ताकि विसर्जन में किसी तरह की असुविधा न हो। 10 नाव और एक मोटर बोट लगाई गई थी। घाटों पर आकस्मिक घटनाओं को रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम था। जरूरत के हिसाब से नाव, जल पुलिस, प्रकाश, साफ-सफाई की गई थी। पुलिस और प्रशासनिक अधिकिारियों के अलावा फायर ब्रिगेड, एंटी रायट स्क्वाड भी तैनात थे।
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रुधौली की 35 मूर्तियां विसर्जित
रुधौली। बुधवार को शरद पूर्णिमा की अवसर पर रुधौली क्षेत्र की शेष बची 35 मूर्तियों का विसर्जन शांतिपूर्ण ढंग से प्रशासन ने करवाया। प्रभारी निरीक्षक संजय मिश्रा ने बताया कि विसर्जन कार्यक्रम को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए उच्चाधिकारियों के निर्देश पर कस्बे की शराब की दुकान बुधवार दोपहर दो बजे के बाद बंद करवा दी गई। विसर्जन के क्रम में आमी नदी के कडसरा पुल में 14, रेरुआ नहर में चार, बाघड़ीह पुल में चार, हनुमंता पुल में एक, हनुमान गंज नहर में सात सहित अन्य स्थानों पर विसर्जन कराया गया। इस दौरान उप जिलाधिकारी आनंद श्रीनेत, अपर पुलिस अधीक्षक/क्षेत्राधिकारी धनंजय सिंह कुशवाहा, नगर अधिशासी अधिकारी अवनीश सिंह, चेयरमैन धीरसेन निषाद, तहसीलदार प्रमोद कुमार, कानूनगो देवेंद्र यादव के साथ लेखपाल अजय कुमार वर्मा, अंजनी नंदन चौधरी, अंकित चौधरी, प्रेमपाल सहित तमाम प्रशासनिक अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।
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35 प्रतिमाओं का अयोध्या में विसर्जन
सिकंदरपुर। परशुरामपुर क्षेत्र के सिकंदरपुर हैदराबाद जोगापुर परवरपारा, रिधौरा, नंदनगर चौरी आदि स्थानों की 35 प्रतिमाओं को अयोध्या के सरयू घाट पर विसर्जित किया गया। दो प्रतिमाओं का मखौड़ाधाम स्थित मनोरमा नदी में किया गया। देर रात तक विसर्जन का क्रम चलता रहा।
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शहर व कुछ ग्रामीण क्षेत्र की 542 प्रतिमाओं का हुआ विसर्जन
कुआनो नदी के अमहट घाट पर शहर की प्रतिमाओं का विसर्जन हुआ, भारी संख्या में पुलिस व पीएसी जवानों की रही तैैनाती
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। दशहरा के बाद बचीं मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन बुधवार को शरद पूर्णिमा के अवसर पर धूमधाम से कुआनो समेत जिले के विभिन्न नदी के घाटों पर किया गया। विसर्जन के लिए शहर के विभिन्न हिस्सों से झांकियों के साथ प्रतिमाएं निकलीं। इस दौरान श्रद्धालुओं ने जमकर अबीर-गुलाल उड़ाए और माता के जयकारे लगाए। शाम छह से बजे से शुरू हुआ विसर्जन का सिलसिला पूरी रात चला। विसर्जन के लिए पुलिस की ओर से सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। जिले की डीएम सौम्या अग्रवाल और एसपी आशीष श्रीवास्तव भी व्यवस्था का जायजा लेने में लगे रहे।
शहर में विसर्जन जुलूस के रूट पर दोनों किनारे जगह-जगह मेले लगे, जहां शहरी व गंवई संस्कृति का समागम देखने को मिला। भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस कर्मी व्यवस्था बनाए रखने के लिए भागदौड़ करते रहे। पुलिस की पूरी कोशिश रही कि भीड़ में किसी तरह का विवाद न हो। इन सबके बीच, आकर्षक ढंग से सजाए गए ट्रक, ट्रैक्टर-ट्राली व डीसीएम से मां दुर्गा की प्रतिमाएं घाट तक पहुंचीं। पुरानी बस्ती की प्रतिमाएं करुआ बाबा स्थान के पास एकत्र हुईं। वहां से जुलूस की शक्ल में पांडेय बाजार, दक्षिण दरवाजा, पक्का बाजार, गांधीनगर और कंपनी बाग होते अमहट घाट पहुंचीं।
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संवेदनशील और सांप्रदायिक क्षेत्रों में खास इंतजाम किए गए थे। बड़ी संख्या में बाहरी फोर्स और पीएसी के जवानों की मौजूदगी में मूर्तियों का विसर्जन कराया गया। पुरानी बस्ती, कोतवाली, वाल्टरगंज और नगर थाना क्षेत्र की कुछ प्रतिमाओं का विसर्जन भी अमहट घाट पर किया गया। ग्रामीण क्षेत्र की प्रतिमाओं का विसर्जन नजदीक की नदी में किया गया। अंतिम प्रतिमा के विसर्जित होने तक प्रशासनिक अमला घाट पर डटा रहा। घाटों पर पर्याप्त प्रकाश की व्यवस्था की गई थी ताकि विसर्जन में किसी तरह की असुविधा न हो। 10 नाव और एक मोटर बोट लगाई गई थी। घाटों पर आकस्मिक घटनाओं को रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम था। जरूरत के हिसाब से नाव, जल पुलिस, प्रकाश, साफ-सफाई की गई थी। पुलिस और प्रशासनिक अधिकिारियों के अलावा फायर ब्रिगेड, एंटी रायट स्क्वाड भी तैनात थे।
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रुधौली की 35 मूर्तियां विसर्जित
रुधौली। बुधवार को शरद पूर्णिमा की अवसर पर रुधौली क्षेत्र की शेष बची 35 मूर्तियों का विसर्जन शांतिपूर्ण ढंग से प्रशासन ने करवाया। प्रभारी निरीक्षक संजय मिश्रा ने बताया कि विसर्जन कार्यक्रम को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए उच्चाधिकारियों के निर्देश पर कस्बे की शराब की दुकान बुधवार दोपहर दो बजे के बाद बंद करवा दी गई। विसर्जन के क्रम में आमी नदी के कडसरा पुल में 14, रेरुआ नहर में चार, बाघड़ीह पुल में चार, हनुमंता पुल में एक, हनुमान गंज नहर में सात सहित अन्य स्थानों पर विसर्जन कराया गया। इस दौरान उप जिलाधिकारी आनंद श्रीनेत, अपर पुलिस अधीक्षक/क्षेत्राधिकारी धनंजय सिंह कुशवाहा, नगर अधिशासी अधिकारी अवनीश सिंह, चेयरमैन धीरसेन निषाद, तहसीलदार प्रमोद कुमार, कानूनगो देवेंद्र यादव के साथ लेखपाल अजय कुमार वर्मा, अंजनी नंदन चौधरी, अंकित चौधरी, प्रेमपाल सहित तमाम प्रशासनिक अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।
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35 प्रतिमाओं का अयोध्या में विसर्जन
सिकंदरपुर। परशुरामपुर क्षेत्र के सिकंदरपुर हैदराबाद जोगापुर परवरपारा, रिधौरा, नंदनगर चौरी आदि स्थानों की 35 प्रतिमाओं को अयोध्या के सरयू घाट पर विसर्जित किया गया। दो प्रतिमाओं का मखौड़ाधाम स्थित मनोरमा नदी में किया गया। देर रात तक विसर्जन का क्रम चलता रहा।