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सुरक्षित सफर चाहिए तो लगाएं हेलमेट
ब्यूरो/अमर उजाला बस्ती
Updated Sun, 18 Feb 2018 11:30 PM IST
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वाल्टरगंज में एक ही बाइक पर सवार तीन लोग।
- फोटो : अमर उजाला
बस्ती। छोटी से लापरवाही बाइक चालकों पर कैसे भारी पड़ती है, इसका रिकॉर्ड वर्ष 2017 है। इस दौरान 1123 सड़क हादसे दर्ज किए गए, जिसमें 321 बाइक चालकों को जान से हाथ धोना पड़ा है। हादसों में 75 फीसदी बाइक सवारों ने हेड इंजरी की वजह से जान गंवाई है। मुकदमों की तफ्तीश करने वाले ज्यादातर सब इंस्पेक्टर बताते हैं कि यदि यह सब हेलमेट पहने होते तो उनकी जिंदगी सुरक्षित होती।
जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. रामजी सोनी के अनुसार हेड इंजरी वाले मरीजों को बचाना सबसे मुश्किल काम है। क्योंकि घायल का खून तेजी से बहने लगता है, जो बाद में मौत का कारण बनता है। हालांकि बहुत लोग हेलमेट लगाकर ही बाहर निकलते हैं। कुछ ही लोग ऐसे हैं, जो हकीकत को अभी नजरअंदाज कर रहे हैं। संभागीय परिवहन अधिकारी डॉ. आरके विश्वकर्मा कहते हैं कि युवाओं को ज्यादा सचेत होना पड़ेगा। यदि स्टाइल और फैशन के नाते ऐसा कर रहे हैं, तो घातक होगा।
विक्रमजोत के नेतवरपट्टी के प्रधान संतोष शुक्ल 1992 में हुई दुर्घटना का जिक्र करते हैं कि कचहरी जाते समय हर्रैया के पास ट्रक में पीछे से उनकी बाइक टकरा गई। इससे हाथ और पैर की हड्डियां टूट चुकी थी, केवल सिर बचा था। हेलमेट पहना था इसलिए जान बच गई है। लखनऊ में डॉक्टरों ने डिस्चार्ज करते समय कहा अभी तक नहीं भूला कि आज तुम हेलमेट कि वजह से जिंदा जा रहे हो। विक्रमजोत क्षेत्र के ही डॉ. यशवीर सिंह कहते हैं कि मैं और पत्नी दोनों पेशे से डॉक्टर हैं। विक्रमजोत फोरलेन किनारे क्लीनिक है, जहां अक्सर बाइक दुर्घटना में घायल लाए जाते हैं। बताते हैं कि सर्वाधिक गंभीर उनकी हालत होती है, जो हेलमेट नहीं लगाए होते। यदि सिर सुरक्षित रहे तो शरीर में गंभीर चोट लगने के बाद भी जान बचाई जा सकती है।
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जामडीह पांडेय निवासी ओपी त्रिपाठी प्रतिदिन बस्ती से संतकबीर नगर आते-जाते हैं। कहते हैं कि उनकी बाइक दो बार दुर्घटनाग्रस्त हुई। बगैर हेलमेट चलता ही नहीं हूं, इसलिए दोनों बार गंभीर घायल होने से बच गए। बताया कि एक बार नील गाय ओर दूसरी बार जंगली सुअर उनकी बाइक से टकराई थी। इस दौरान बेकाबू होने से बाइक समेत सड़क पर जा गिरा। उस घटना की याद आती है तो रोंगटे खड़े हो जाते हैं और हेलमेट के महत्व के बारे में सबको बताते हैं।
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जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. रामजी सोनी के अनुसार हेड इंजरी वाले मरीजों को बचाना सबसे मुश्किल काम है। क्योंकि घायल का खून तेजी से बहने लगता है, जो बाद में मौत का कारण बनता है। हालांकि बहुत लोग हेलमेट लगाकर ही बाहर निकलते हैं। कुछ ही लोग ऐसे हैं, जो हकीकत को अभी नजरअंदाज कर रहे हैं। संभागीय परिवहन अधिकारी डॉ. आरके विश्वकर्मा कहते हैं कि युवाओं को ज्यादा सचेत होना पड़ेगा। यदि स्टाइल और फैशन के नाते ऐसा कर रहे हैं, तो घातक होगा।
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विक्रमजोत के नेतवरपट्टी के प्रधान संतोष शुक्ल 1992 में हुई दुर्घटना का जिक्र करते हैं कि कचहरी जाते समय हर्रैया के पास ट्रक में पीछे से उनकी बाइक टकरा गई। इससे हाथ और पैर की हड्डियां टूट चुकी थी, केवल सिर बचा था। हेलमेट पहना था इसलिए जान बच गई है। लखनऊ में डॉक्टरों ने डिस्चार्ज करते समय कहा अभी तक नहीं भूला कि आज तुम हेलमेट कि वजह से जिंदा जा रहे हो। विक्रमजोत क्षेत्र के ही डॉ. यशवीर सिंह कहते हैं कि मैं और पत्नी दोनों पेशे से डॉक्टर हैं। विक्रमजोत फोरलेन किनारे क्लीनिक है, जहां अक्सर बाइक दुर्घटना में घायल लाए जाते हैं। बताते हैं कि सर्वाधिक गंभीर उनकी हालत होती है, जो हेलमेट नहीं लगाए होते। यदि सिर सुरक्षित रहे तो शरीर में गंभीर चोट लगने के बाद भी जान बचाई जा सकती है।
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जामडीह पांडेय निवासी ओपी त्रिपाठी प्रतिदिन बस्ती से संतकबीर नगर आते-जाते हैं। कहते हैं कि उनकी बाइक दो बार दुर्घटनाग्रस्त हुई। बगैर हेलमेट चलता ही नहीं हूं, इसलिए दोनों बार गंभीर घायल होने से बच गए। बताया कि एक बार नील गाय ओर दूसरी बार जंगली सुअर उनकी बाइक से टकराई थी। इस दौरान बेकाबू होने से बाइक समेत सड़क पर जा गिरा। उस घटना की याद आती है तो रोंगटे खड़े हो जाते हैं और हेलमेट के महत्व के बारे में सबको बताते हैं।